पदोन्नति में पिछड़े सीबीआईसी के टैक्स असिस्टेंट: तीन साल में मिलने वाली पदोन्नति के लिए लग रहे 10 साल
इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन के संगठन सचिव हर्ष चतुर्वेदी ने बताया, इस तरह के नए नियम बनाने से पहले कार्मिकों की राय नहीं ली गई। दोनों विभागों में टैक्स असिटेंट की भर्ती प्रक्रिया से लेकर उनके काम करने का तरीका एक जैसा है, तो फिर पदोन्नति को लेकर यह भेदभाव क्यों?
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केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) में 'टैक्स सहायक' के पद पर नियुक्ति पाने वाले कार्मिकों में अपनी पदोन्नति में हो रही देरी को लेकर रोष व्याप्त है। सीबीआईसी में टैक्स असिस्टेंट को पहले तीन साल में प्रमोशन मिलता था, अब 10 साल लग रहे हैं। मौजूदा नियमों के अंतर्गत टैक्स असिस्टेंट को अगर इंस्पेक्टर के पद पर पहुंचना है, तो उसे तीन दशक का इंतजार करना पड़ सकता है। पूरे सेवाकाल के दौरान मुश्किल से दो या तीन प्रमोशन ही मिलेंगे। दूसरी तरफ केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) में टैक्स असिटेंट को तीन वर्ष में पहली पदोन्नति मिल रही है। उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति के पांच अवसर मिल रहे हैं, जबकि दोनों विभागों की भर्ती प्रक्रिया एवं योग्यता समान है।
ऑल इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन ने मेरिट बेस्ड प्रमोशन का प्रपोजल तैयार कर डीओपीटी को भेजा है। राजस्व सचिव ने भी इस प्रपोजल को अपनी मंजूरी दी है। अगर डीओपीटी, इसे अपनी स्वीकृति दे देती है, तो प्रमोशन लेने के लिए दस साल का लंबा इंतज़ार कम होकर पांच वर्ष रह जाएगा। दो माह से यह फाइल डीओपीटी के पास है, मगर अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है।
प्रमोशन में पिछड़ जाते हैं सीबीआईसी के टैक्स असिसेंट
कर्मचारी चयन आयोग 'एसएससी' की सीजीएल की परीक्षा पास करने के बाद वित्त विभाग के अंतर्गत केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क 'सीबीआईसी' और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड 'सीबीडीटी' में टैक्स असिसेंट के पद पर नियुक्ति होती है। सीबीआईसी और सीबीडीटी में इस पद के लिए एक समान योग्यता रखी गई है। भर्ती एजेंसी और परीक्षा का स्वरुप भी एक ही है, लेकिन बात जब प्रमोशन की आती है तो 'सीबीआईसी' के टैक्स असिसेंट, 'सीबीडीटी' के मुकाबले पिछड़ जाते हैं। यहां पर टैक्स असिस्टेंट के पद पर नियुक्त हुआ व्यक्ति तीन साल में सीनियर टैक्स असिस्टेंट बनता है। उसके बाद इंस्पेक्टर बनने का नंबर आता है।
दोनों ही विभागों में टैक्स असिस्टेंट के पदों पर चयन एक ही परीक्षा और मानक के तहत होता है। दोनों का काम भी एक ही जैसा होता है, लेकिन प्रमोशन के नियम अलग-अलग हैं। इसके चलते कार्मिकों के बीच भेदभाव की भावना उत्पन्न हो गई है। सीबीआईसी में तो अब दस साल में पहला प्रमोशन मिलता है। ऐसे में टैक्स असिटेंट के लिए सहायक आयुक्त, अधीक्षक या उपायुक्त के पद तक पहुंचने की संभावना लगभग खत्म हो गई है।
2015 से शुरू हुई थी यह दिक्कत
साल 2015 में सीबीआईसी ने सीनियर टैक्स असिस्टेंट का पद नाम बदलकर उसे 'एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट' कर दिया था। इस पद तक पहुंचने के लिए कर्मचारी को 10 साल का कार्यकाल पूरा करना होगा। दूसरी तरफ, सीबीडीटी' में टैक्स असिस्टेंट को तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद ही सीनियर टैक्स असिस्टेंट का प्रमोशन मिल जाता है। इतना ही नहीं, सीबीडीटी में सीनियर टैक्स असिस्टेंट बनने वाले कार्मिक को दो साल बाद इंस्पेक्टर के पद पर तरक्की दे दी जाती है। सीबीआईसी में कार्यरत टैक्स असिटेंट को 10 साल में केवल एक प्रमोशन मिल रहा है।
इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन के संगठन सचिव हर्ष चतुर्वेदी ने बताया, इस तरह के नए नियम बनाने से पहले कार्मिकों की राय नहीं ली गई। दोनों विभागों में टैक्स असिटेंट की भर्ती प्रक्रिया से लेकर उनके काम करने का तरीका एक जैसा है, तो फिर पदोन्नति को लेकर यह भेदभाव क्यों? 2015 से पहले दोनों ही विभागों में प्रमोशन के नियम एक जैसे थे, लेकिन सीबीआईसी ने प्रमोशन के नियम में बदलाव कर कार्मिकों के बीच भेदभाव पैदा कर दिया है। सीबीआईसी ने 2016 में फिर से स्टेकहोल्डर्स से सलाह लिए बिना ही इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोशन के लिए कार्यकाल की अवधि को बढ़ाकर दो साल से पांच साल कर दिया। यानी सीबीआईसी में काम कर रहे एक टैक्स असिस्टेंट को 15 साल में दो प्रमोशन मिल रहे हैं। वहीं, सीबीडीटी में काम कर रहे टैक्स असिस्टेंट को पांच साल में दो प्रमोशन दिए जाते हैं।
नए नियमों में छोड़ दिया गया प्रोटेक्शन क्लॉज
एसोसिएशन के संगठन सचिव हर्ष चतुर्वेदी के मुताबिक, डीओपीटी नियमों में यह बात कही गई है कि कोई टैक्स असिस्टेंट पहले से सर्विस में है, तो उस पर प्रोटेक्शन क्लॉज के तहत पुराने विभागीय नियम ही लागू होंगे। साल 2015 में जब सीबीआईसी के लिए नए नियम बनाए जा रहे थे, तो उनमें 'प्रोटेक्शन क्लॉज' का प्रावधान ही नहीं किया गया। भर्ती नियमों में यह संशोधन कराने की मांग को लेकर डीओपीटी को पांच बार फाइल भेजी गई है। हैरानी की बात है कि डीओपीटी ने हर बार बिना किसी लॉजिक के फाइल को रिजेक्ट कर दिया।
एसोसिएशन का आरोप है कि सक्सेसिव लेबल्स पर सीधे भर्ती नहीं होनी चाहिए, डीओपीटी एवं सीबीआईसी ने इस नियम का भी पालन नहीं किया। कार्मिकों को कम से कम आधे समय में पदोन्नति मिल जाए यानी वे दस की बजाए पांच साल में पहले प्रमोशन तक पहुंच सकें, इसके लिए 'एक बारगी 'छूट अर्थात वन टाइम रिलेक्सेशन मिल सकता है। राजस्व सचिव यह छूट प्रदान कर सकता है, लेकिन यहां से भी वह फाइल डीओपीटी के पास जाती है। उसमें डीओपीटी की राय या कमेंट मांगे जाते हैं। नवंबर में राजस्व सचिव की टेबल से मंजूरी पाने के बाद यह फाइल डीओपीटी के पास है। अगर वन टाइम रिलेक्सेशन मिलता है तो प्रमोशन के लिए लगने वाला समय आधा रह जाएगा। खास बात है कि सीबीआईसी भी इस मामले में अपने कार्मिकों के साथ हैं। अब केवल डीओपीटी से हरी झंडी मिलने का इंतजार है।