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'CAPF' की सेना से नहीं होगी बराबरी: उग्रवाद और नक्सल के मोर्चे पर डटे ये बल चीन-पाक को दे चुके हैं झटका

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 07 Sep 2021 03:58 PM IST
सार

पूर्व अफसर कहते हैं, हमें यहां पर ये बात समझ नहीं आई कि अगर ये बल सिविलियन हैं तो गुजरात के रण में सीआरपीएफ ने पाकिस्तान की ब्रिगेड को कैसे भारी नुकसान पहुंचाकर उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। यह फोर्स तो रोजाना ही आतंकियों और नक्सलियों से लड़ रही है। होट स्प्रिंग की घटना को कैसे भुला सकते हैं...

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central armed police forces cannot get army-like status
बीएसएफ (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

लद्दाख के हॉट स्प्रिंग इलाके में चीन की सेना 'पीएलए' और सरदार पोस्ट पर पाकिस्तानी सेना की एक ब्रिगेड को धूल चटाने वाले केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को सेना जैसा दर्जा नहीं मिल सकता। अतीत में पंजाब का आतंकवाद, मौजूद जम्मू कश्मीर में आतंकियों का जमावड़ा, उत्तर-पूर्व में उग्रवाद और आधा दर्जन से अधिक राज्यों में नक्सल प्रभावित क्षेत्र, ऐसी सभी जगहों पर इन बलों ने अपनी बहादुरी का डंका बजाया है। देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की तरफ से जब केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास यह प्रस्ताव भेजा गया कि यहां पर भी आर्मी की तर्ज पर 15 दिन की बजाए 28 दिन की कैजुअल लीव कर दी जाए। मंत्रालय ने जवाब दिया है कि 7वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार, यह संभव नहीं हो सकता। सीएपीएफ अनिवार्य तौर से एक सिविलियन फोर्स है। इसकी सेवा शर्तें डिफेंस फोर्सेज से अलग हैं।

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बता दें कि 'सीएपीएफ' जिसमें सीआरपीएफ, असम राइफल, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे बल शामिल हैं, वहां 15 दिन की कैजुअल लीव मंज़ूर करने का प्रावधान है। सेना में 28 दिन की कैजुअल लीव मिलती है। सीएपीएफ में सामान्य तौर पर बटालियन या ग्रुप सेंटर पर 15 दिन की कैजुअल लीव मिलती है। वजह, ऐसी पोस्टिंग वाली जगहों पर छह दिन का सप्ताह होता है। दूसरी तरफ, स्थायी लोकेशन जैसे मुख्यालय आदि पर तैनात स्टाफ को आठ दिन की केजुअल लीव मिलती है। इसका कारण, वहां पांच दिन का सप्ताह होता है। सीआरपीएफ की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजे गए केजुअल लीव बदलाव के प्रपोजल को सभी बलों के लिए नकार दिया गया है।

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इन बलों के पूर्व अफसर कहते हैं, हमें यहां पर ये बात समझ नहीं आई कि अगर ये बल सिविलियन हैं तो गुजरात के रण में सीआरपीएफ ने पाकिस्तान की ब्रिगेड को कैसे भारी नुकसान पहुंचाकर उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। यह फोर्स तो रोजाना ही आतंकियों और नक्सलियों से लड़ रही है। होट स्प्रिंग की घटना को कैसे भुला सकते हैं। बीएसएफ भी पाकिस्तान के सीज फायर उल्लंघन और घुसपैठियों को माकूल जवाब देती है। इसके बावजूद इन्हें सिविलियन फोर्स कहा जा रहा है। पूर्व अफसरों का कहना है, गृह मंत्रालय को यह डर लगा हुआ है कि इन बलों की एक छोटी सी मांग मान ली गई, तो आगे मुख्यालय की तरफ से इनकी कोई दूसरी मांग सामने आ सकती है। ये बल पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर सकते हैं। सीएसडी कैंटीन की तर्ज पर सीएपीएफ कैंटीन को जीएसटी से छूट देना, सेना की तरह वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधाओं की मांग उठा सकते हैं।  

कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने गत सप्ताह भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की थी। राष्ट्रपति को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की लंबित पड़ी मांगों को जल्द पूरा कराने के लिए एक ज्ञापन सौंपा था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एसोसिएशन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बाद कहा कि वे जायज मुद्दों को अपनी सिफारिश के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजेंगे। प्रमुख मांगों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को पुरानी पेंशन व्यवस्था के दायरे में लाना, राज्यों में अर्धसैनिक कल्याण बोर्डों का गठन करना, सीपीसी कैंटीन पर पचास फीसदी जीएसटी की छूट देना, सरदार पटेल के नाम पर राज्यों की राजधानियों में अर्धसैनिक स्कूलों की स्थापना, शस्त्र-सेना झंडा दिवस की तर्ज पर अर्धसेना झंडा-दिवस कोष की स्थापना व सीजीएचएस डिस्पेंसरियों का विस्तार, आदि शामिल हैं। एसोसिएशन ने पैरामिलिट्री फोर्सेस के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार की एक लाख से अधिक हस्ताक्षरित पिटिशन महामहिम राष्ट्रपति को सौंपी हैं।

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