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अमर उजाला विशेष : केंद्र ने राज्यों से एचसीक्यू की दो करोड़ गोलियों को खपाने को कहा, डब्ल्यूएचओ ने बताया है बेअसर

Mon, 19 Jul 2021 08:03 AM IST
Jeet Kumar परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 19 Jul 2021 08:03 AM IST
सार

केंद्र की ओर से कहा है स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन कर्मियों को एचसीक्यू दवा का सेवन कराया जाए। साथ ही कोरोना संक्रमण के हल्के लक्षण वालों को यह दवा देने को कहा गया है

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Center says to consume two crore tablets of HCQ
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन - फोटो : iStock

विस्तार

कोरोना संक्रमण के उपचार प्रोटोकॉल से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन (एचसीक्यू) को बाहर करने के बाद भी केंद्र की ओर से दवाओं को खपाने पर जोर दिया जा रहा है। एक वेयर हाउस में बीते एक महीने से करीब दो करोड़ से ज्यादा एचसीक्यू गोलियां पड़ी हैं। 

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अलग-अलग राज्यों को आवंटित हुईं इन गोलियों को अब तक राज्य सरकारों ने नहीं लिया है। इसीलिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 19 राज्य और 12 केंद्रीय अस्पतालों को पत्र लिख इन दवाओं को उठाने के लिए कहा जा रहा है। 
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साथ ही निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन कर्मियों को एचसीक्यू दवा का सेवन कराया जाए। साथ ही कोरोना संक्रमण के हल्के लक्षण वालों को यह दवा देने को कहा गया है।
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 दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि बीते 16 जून को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से यह चिट्ठी आई थी। नई दिल्ली स्थित कुतुब औद्योगिक क्षेत्र में भारत सरकार के सरकारी मेडिकल स्टोर डिपार्टमेंट में यह दवा रखी हुई है। 

उन्होंने बताया कि जून माह के पहले सप्ताह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड उपचार प्रोटोकॉल से एचसीक्यू को हटा लिया था। उसके बाद भी दिल्ली को 20 लाख गोलियां लेने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस दवा का असर ही नहीं है उसे इस्तेमाल क्यों किया जाए? 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने चिट्ठी में लिखा है कि कोविड प्रबंधन के तहत एचसीक्यू दवा वितरण को लेकर मंत्रालय की ओर से आपूर्ति की जा रही है। इसके तहत 1.85 करोड़ एचसीक्यू की गोलियां राज्य सरकारों एवं केंद्रीय अस्पतालों के लिए आवंटित की गई थीं , लेकिन अब तक इन दवाओं को प्राप्त नहीं किया गया है। 

चिट्ठी में राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इन दवाओं को लेकर व्यवस्थित रुप से इस्तेमाल किया जाए। स्वास्थ्य कर्मचारियों, फ्रंटलाइन वर्कर और हल्के लक्षण वाले रोगियों को सेवन कराया जाए। केंद्र ने चिट्ठी के साथ साथ राज्यवार आवंटित की गई दवाओं की मात्रा के बारे में भी बताया है। 

इसके अनुसार अंडमान निकोबार के लिए एक, अरूणांचल प्रदेश के लिए 5.5, असम के लिए 15, चंडीगढ़ के लिए दो, दादर नागर हेवली के लिए 4.75, दिल्ली के लिए 20, गुजरात के लिए 26, हिमाचल प्रदेश के सात, जम्मू कश्मीर-केरल के लिए 13-13, लद्दाख के लिए पांच, मणिपुर के लिए चार लाख गोलियां आवंटित की गईं। 

इनके अलावा मेघालय तीन, नगालैंड-ओडिशा दो-दो, पंजाब 10, सिक्किम तीन, उत्तराखंड पांच और लक्षद्वीप के लिए दो लाख एचसीक्यू गोलियां हैं। यह सभी गोलियां अभी तक दिल्ली के वेयर हाउस में ही पड़ी हुई हैं।

बाजारों में आपूर्ति की सलाह 
दिल्ली एम्स की एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा कि कोरोना से पहले इन दवाओं का इस्तेमाल असाध्य रोगियों के लिए किया जा रहा है। पिछले साल जब कोविड प्रोटोकॉल के तहत एचसीक्यू का इस्तेमाल शुरू हुआ तो बाजार में इनकी कमी आ गई। इसके चलते अर्थराइटिस सहित अन्य असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को काफी परेशानियां हुई। 

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तौर पर कोविड उपचार में एचसीक्यू का असर नहीं मिला है। ऐसे में सरकार को आवंटित गोलियां बाजार में उपलब्ध करनी चाहिए ताकि जरूरतमंद तक इनकी उपलब्धता हो सके। 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन ने भी कहा कि एचसीक्यू गोलियां का इस्तेमाल अन्य मरीजों में भी काफी होता है। उन्हें सही जगह पहुंचना चाहिए न कि राज्यों पर खपाने के लिए जोर देना चाहिए।

दिल्ली एम्स ने भी नहीं लीं एचसीक्यू दवा
पिछले डेढ़ साल से कोविड उपचार में एचसीक्यू दवा के इस्तेमाल की पैरवी करने वाले दिल्ली एम्स ने भी वेयर हाउस से गोलियां नहीं ली है। केंद्र सरकार ने दिल्ली सहित देश भर के एम्स और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज सहित करीब 12 केंद्रीय अस्पतालों के लिए सर्वाधिक 39.25 लाख गोलियां आवंटित की हैं लेकिन जानकारी के अनुसार अब तक अस्पतालों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

डब्ल्यूएचओ के परीक्षण में नहीं मिला था इस दवा का कोई असर 
पिछले साल कोरोना वायरस संक्रमण शुरू होने के दौर में एचसीक्यू के इस्तेमाल पर खासा जोर दिया गया था। लेकिन बाद कई परीक्षणों के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एचसीक्यू को कोविड संक्रमण के इलाज में अत्यंत कम असरदार पाया। 

परीक्षणों के इन नतीजों के बाद डब्ल्यूएचओ ने एचसीक्यू के कोरोना के इलाज में इस्तेमाल के खिलाफ एडवाइजरी जारी की थी। डब्ल्यूएचओ ने सॉलिडैरिटी ट्रॉयल के दौरान 30 अलग-अलग देशों के 500 अस्पतालों में 11,266 मरीजों पर इन दवाओं के परीक्षण किए थे। 


डब्ल्यूएचओ के नतीजों में पाया गया था कि ये दवाएं मरीजों की जान बचाने और संक्रमण के दिनों को कम करने में भी कारगर साबित नहीं हुई हैं। दरअसल अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की और से एचसीक्यू को असरदार बताए जाने के बाद से दुनियाभर में इसकी मांग बेहद बढ़ गई थी ।

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