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सूखे पर गुजरात व हरियाणा के साथ केंद्र, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 27 Apr 2016 03:54 AM IST
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केंद्र सरकार ने गुजरात द्वारा खुद को सूखाग्रस्त राज्य घोषित करने में देरी करने और हरियाणा द्वारा खुद को सूखाग्रस्त घोषित न करने के निर्णय को सही बताया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि गुजरात और हरियाणा ने इस संबंध में जो तर्क दिए हैं, वे संतोषजनक है।
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वहीं याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा कि देश के करीब 54 करोड़ लोग सूखे से प्रभावित हैं, जबकि केंद्र सरकार 33 करोड़ लोगों के सूखाग्रस्त होने की बात कह रही है। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पीएस नरसिम्हा ने पक्ष रखा। उन्होंने एक बार फिर कहा कि यह पूरी तरह से राज्य पर निर्भर करता है कि वह खुद को सूखाग्रस्त करना चाहते है या नहीं।
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केंद्र सरकार मात्र एडवाइजरी जारी करती है। उन्होंने कहा कि सूखे को लेकर केंद्र और सभी राज्य सरकारें गंभीर हैं। सभी इसे लेकर हर संभव काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रोजाना वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए राज्यों के मुख्य सचिवों से संपर्क किया जाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसा कतई नहीं है कि केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जो भी कानूनी प्रावधान हैं, उसका भलीभांति पालन किया जा रहा है। एएसजी ने इस मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह न तो भ्रष्टाचार का मामला है और न ही कानून के पालन न करने की बात है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की याचिका का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर जो भी करना पड़ेगा, सरकार करेगी। उन्होंने लातूर में पानी की किल्लत का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां टैंकर केजरिए पानी पहुंचाया जा रहा है।
वहीं याचिकाकर्ता संगठन स्वराज अभियान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने मनरेगा के कामगारों को इलेक्ट्रॉनिक तरीकेसे पैसे पहुंचाने की पहल को तो सही बताया लेकिन कहा कि फिलहाल इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। लोगों को पैसे नहीं मिले हैं। उन्होंने अदालत से पूर्व न्यायाधीशों को कोर्ट कमिश्नर बनाने की गुहार की।