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सावधान: पांच एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं से लिवर-किडनी को खतरा, CDSCO ने जारी की चेतावनी
सार
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने 5 आम एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं (जैसे टेट्रासाइक्लिन और मेट्रोनिडाजोल) को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। इन दवाओं के इस्तेमाल से मरीजों के लिवर और किडनी प्रभावित होने के साथ-साथ त्वचा पर गंभीर चकत्ते और फफोले (ड्रेस सिंड्रोम) जैसे साइड इफेक्ट्स देखे गए हैं। सीडीएससीओ ने दवा कंपनियों को पैकेट पर ये चेतावनियां लिखना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, संस्था ने साफ किया है कि दवाएं असुरक्षित नहीं हैं, लेकिन मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन करने या अचानक बंद करने से बचना चाहिए।
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सीडीएससीओ ने जारी की चेतावनी
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
एंटीबायोटिक और एंटीफंगल की पांच दवाओं के गंभीर दुष्प्रभाव सामने आए हैं। इनमें कुछ दवाओं से मरीजों में लीवर और किडनी जैसे अहम अंग प्रभावित होने का खतरा है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इन पांचों दवाइयों को लेकर नई चेतावनी जारी की है। संगठन ने दवा कंपनियों को पांचों दवाओं के साथ इसके दुष्प्रभाव अंकित करने के निर्देश दिए हैं। इन दवाओं में चार संक्रमणरोधी यानी एंटीबायोटिक/एंटीप्रोटोजोअल और एक एंटीफंगल दवा शामिल है। सीडीएससीओ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों से कहा है कि वे अपने यहां दवा बनाने वाली कंपनियों से इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराएं।
इन दवाओं से चकत्ते, त्वचा रोग व जलन की समस्या
गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण में दिए जाने वाली वैनकॉमायसिन से मरीजों में ड्रेस सिंड्रोम बुखार, चकत्ते देखने को मिल रहे हैं। मुंहासे, श्वसन व अन्य संक्रमण रोगों में दी जाने वाली टेट्रासाइक्लिन दवा से त्वचा में प्रतिक्रिया की समस्या हो रही है। इसे लेने से मरीजों में बार-बार एक ही जगह चकत्ते और फफोले हो रहे हैं। यूटीआई, फेफड़ों व अन्य संक्रमण में दी जाने वाली कोट्रिमोक्साजोल से भी मरीजों में चकत्ते और फफोले देखे जा रहे हैं। पेट, आंत, दांत व अन्य संक्रमण की समस्या में आमतौर पर मरीजों को मेट्रोनिडाजोल और फंगल संक्रमण में ओरल इट्राकोनाजोल दी जाती है। इसके चलते भी मरीजों में चकत्ते, जलन, फफोले और लाल चकत्ते देखने को मिले हैं।
बगैर डॉक्टर की सलाह न करें दवा का सेवन
सीडीएससीओ ने कहा है कि ये दवाएं असुरक्षित नहीं हैं और न ही इनका इस्तेमाल बंद कर दिया गया है। बगैर चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद या शुरू नहीं करनी चाहिए। उसके दिए निर्देशों का मकसद डॉक्टरों और मरीजों को संभावित गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में पहले से सचेत करना है। इन दवाओं से त्वचा पर बार-बार चकत्ते, फफोले, तेज बुखार, चेहरे या शरीर में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देंने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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इन दवाओं से चकत्ते, त्वचा रोग व जलन की समस्या
गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण में दिए जाने वाली वैनकॉमायसिन से मरीजों में ड्रेस सिंड्रोम बुखार, चकत्ते देखने को मिल रहे हैं। मुंहासे, श्वसन व अन्य संक्रमण रोगों में दी जाने वाली टेट्रासाइक्लिन दवा से त्वचा में प्रतिक्रिया की समस्या हो रही है। इसे लेने से मरीजों में बार-बार एक ही जगह चकत्ते और फफोले हो रहे हैं। यूटीआई, फेफड़ों व अन्य संक्रमण में दी जाने वाली कोट्रिमोक्साजोल से भी मरीजों में चकत्ते और फफोले देखे जा रहे हैं। पेट, आंत, दांत व अन्य संक्रमण की समस्या में आमतौर पर मरीजों को मेट्रोनिडाजोल और फंगल संक्रमण में ओरल इट्राकोनाजोल दी जाती है। इसके चलते भी मरीजों में चकत्ते, जलन, फफोले और लाल चकत्ते देखने को मिले हैं।
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बगैर डॉक्टर की सलाह न करें दवा का सेवन
सीडीएससीओ ने कहा है कि ये दवाएं असुरक्षित नहीं हैं और न ही इनका इस्तेमाल बंद कर दिया गया है। बगैर चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद या शुरू नहीं करनी चाहिए। उसके दिए निर्देशों का मकसद डॉक्टरों और मरीजों को संभावित गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में पहले से सचेत करना है। इन दवाओं से त्वचा पर बार-बार चकत्ते, फफोले, तेज बुखार, चेहरे या शरीर में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देंने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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