{"_id":"61b324df9250a050526c3864","slug":"cds-general-bipin-rawat-news-new-cds-challenges-after-joining-know-from-bipin-rawat-senior-and-his-friend-major-general-ajv-jaini-retd","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"CDS Gen Rawat laid To Rest: नए सीडीएस के सामने क्या चुनौतियां होंगी, बिपिन रावत के सीनियर और उनके मित्र से जानिए","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
CDS Gen Rawat laid To Rest: नए सीडीएस के सामने क्या चुनौतियां होंगी, बिपिन रावत के सीनियर और उनके मित्र से जानिए
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
जनरल बिपिन रावत और मेजर जनरल ए जे वी जैनी (सेवानिवृत)
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
तमिलनाडु हेलिकॉप्टर क्रैश में निधन के बाद सीडीएस जनरल बिपिन रावत को शुक्रवार को अंतिम विदाई दी गई। इस घटना में जनरल रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत 13 लोगों की मौत हो गई। जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत का पार्थिव शरीर शुक्रवार को बेस हॉस्पिटल से उनके आवास पर लाया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, एनएसए अजीत डोभाल, कई केंद्रीय मंत्रियों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी का शाम में अंतिम संस्कार किया गया।जनरल रावत के निधन से नरेंद्र मोदी सरकार के सामने रक्षा प्रतिष्ठान के पास अगले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) को तत्काल चुनने की चुनौती खड़ी हो गई है। मोदी सरकार ने सैन्य ढांचे में सुधार के लिए सीडीएस का पद बनाया था। पहले सीडीएस होने के नाते जनरल बिपिन रावत सेना में व्यापक सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2016 में उन्हें सेना प्रमुख के पद पर पदोन्नत किया गया था और सेवानिवृति से ठीक एक दिन पहले एक जनवरी 2020 को उन्हें पहला सीडीएस बनाया गया था। सीडीएस के रूप में उनकी नियुक्ति स्वाभाविक रूप से पूर्वी और पश्चिमी दोनों क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों से निपटने के उनके अनुभव को देखते हुए की गई थी।
आगे क्या
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अगले सीडीएस की नियुक्ति एक हफ्ते में कर सकती है। सीडीएस के चयन के लिए कोई निश्चित नियम नहीं हैं। यह मुख्य रूप से एक निर्णय है जिसे सरकार सीमा सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में करती है। वायु सेना के पूर्व अधिकारियों के मुताबिक सीडीएस की नियुक्ति के लिए सरकार ने कोई रूलबुक सार्वजनिक नहीं किया है।
बिपिन रावत को अनोखी श्रद्धांजलि
- फोटो :
अमर उजाला
सीडीएस की नियुक्ति के लिए बुनियादी मानदंड सरल हैं। तीनों सेवाओं भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना का कोई भी कमांडिंग ऑफिसर सीडीएस के पद के लिए पात्र हैं। सरकार को सैन्य अधिकारी की योग्यता-सह-वरिष्ठता के आधार पर निर्णय लेना होता है। सीडीएस का पद धारण करने वाले व्यक्ति की आयु 65 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। सशस्त्र बलों के तीन सेवारत प्रमुखों में से, भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे जनरल बिपिन रावत के बाद सेना में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। जनरल नरवणे का भारतीय सेना प्रमुख के रूप में अप्रैल 2022 तक का कार्यकाल है।
नई सीडीएस के सामने क्या चुनौतियां होंगी?
जनरल बिपिन रावत के सीनियर और उनके मित्र रहे मेजर जनरल ए जे वी जैनी (सेवानिवृत) अपने भाई सरीखे दोस्त के जाने से गमगीन हैं। लेकिन बहुत हिम्मत जुटाकर वे बताते हैं ‘अभी चार-पांच दिनों पहले बिपिन रावत से मुलाकात हुई थी और उन्होंने मुझे कहा था अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले मैं इंटिग्रेटेड थिएटर कमान के गठन का काम पूरा कर लूंगा। इस आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि रावत कई काम अधूरा छोड़ गए हैं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण काम है इंटिग्रेटेड थिएटर कमान के गठन का। थिएटर कमांड के गठन में उनकी बड़ी भूमिका थी और इसकी जिम्मेदारी उनके पास थी। तीनों सेनाओं की अलग-अलग कमांड है। तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बनाने के लिए इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड को अमल में लाना नए सीडीएस के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी’।
नई सीडीएस के सामने क्या चुनौतियां होंगी?
जनरल बिपिन रावत के सीनियर और उनके मित्र रहे मेजर जनरल ए जे वी जैनी (सेवानिवृत) अपने भाई सरीखे दोस्त के जाने से गमगीन हैं। लेकिन बहुत हिम्मत जुटाकर वे बताते हैं ‘अभी चार-पांच दिनों पहले बिपिन रावत से मुलाकात हुई थी और उन्होंने मुझे कहा था अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले मैं इंटिग्रेटेड थिएटर कमान के गठन का काम पूरा कर लूंगा। इस आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि रावत कई काम अधूरा छोड़ गए हैं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण काम है इंटिग्रेटेड थिएटर कमान के गठन का। थिएटर कमांड के गठन में उनकी बड़ी भूमिका थी और इसकी जिम्मेदारी उनके पास थी। तीनों सेनाओं की अलग-अलग कमांड है। तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बनाने के लिए इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड को अमल में लाना नए सीडीएस के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी’।
श्रद्धांजलि अर्पित करतीं सीडीएस जनरल बिपिन रावत की बेटी।
- फोटो :
ANI
नए सीडीएस को यह काम करने होंगे
1-नए सीडीएस के सामने यह चुनौती रहेगी कि इंटीग्रेटेड थिएटर कमान का गठन जल्द हो।
2- इसका कांसेप्ट पेपर तैयार करना है।
3-युद्ध के समय की रणनीति पर और वार गेमिंग पर चर्चा होनी है।
4- थिएटर कमांड्स के मापदंड तय करने होंगे।
5- क्या प्रशासनिक और वित्त समस्याएं आ सकती हैं उसके सभी पहलूओं पर काम करना है।
6- थिएटर कमांड्स की कई योजनाओं और कार्यनीतियों पर काम करना है।
1-नए सीडीएस के सामने यह चुनौती रहेगी कि इंटीग्रेटेड थिएटर कमान का गठन जल्द हो।
2- इसका कांसेप्ट पेपर तैयार करना है।
3-युद्ध के समय की रणनीति पर और वार गेमिंग पर चर्चा होनी है।
4- थिएटर कमांड्स के मापदंड तय करने होंगे।
5- क्या प्रशासनिक और वित्त समस्याएं आ सकती हैं उसके सभी पहलूओं पर काम करना है।
6- थिएटर कमांड्स की कई योजनाओं और कार्यनीतियों पर काम करना है।
श्रद्धांजलि स्थल की ओर सीडीएस बिपिन रावत का शव ले जाते सैनिक
- फोटो :
जी पाल
सेना का आधुनिकीकरण भी करना होगा
जैनी बिपिन रावत से बीते दिनों हुई मुलाकात को याद करते हुए आगे बताते हैं ‘ बिपिन ने कहा था, थिएटर कमांड बनाने की लंबे समय से अटकी योजना को पूरा करने का काम इतना आसान नहीं है। मैं कोशिश कर रहा हूं कि सेना की तीनों सेवाओं के बीच अधिक और अच्छा तालमेल हो जाए’।
जैनी याद करते हैं कि रावत ने उन्हें यह भी बताया था कि वे सेना के आधुनिकीकरण पर भी काम रहे हैं, तो जाहिर है नए सीडीए को भी रावत की इस पहल को जारी रखना होगा। साथ ही सीडीएस को यह सुनिश्चित करना होगा कि तीनों सेवाओं की प्राथमिकताओं को समान महत्व दिया जाए। तीनों सेवाओं को समग्र रूप से देखते हुए, एक दीर्घकालिक क्षमता विकास योजना विकसित करना होगा जो युद्ध सिद्धांत के अनुरूप हो।
सीडीएस नियुक्त होने के दो साल से भी कम समय में, जनरल रावत ने सैन्य सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की जो अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। अपने अभियान और दृढ़ संकल्प के साथ, उन्होंने यह सुनिश्चित किया होगा कि प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अब जबकि जनरल रावत नहीं हैं, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसकी गति खो न जाए।
जैनी बिपिन रावत से बीते दिनों हुई मुलाकात को याद करते हुए आगे बताते हैं ‘ बिपिन ने कहा था, थिएटर कमांड बनाने की लंबे समय से अटकी योजना को पूरा करने का काम इतना आसान नहीं है। मैं कोशिश कर रहा हूं कि सेना की तीनों सेवाओं के बीच अधिक और अच्छा तालमेल हो जाए’।
जैनी याद करते हैं कि रावत ने उन्हें यह भी बताया था कि वे सेना के आधुनिकीकरण पर भी काम रहे हैं, तो जाहिर है नए सीडीए को भी रावत की इस पहल को जारी रखना होगा। साथ ही सीडीएस को यह सुनिश्चित करना होगा कि तीनों सेवाओं की प्राथमिकताओं को समान महत्व दिया जाए। तीनों सेवाओं को समग्र रूप से देखते हुए, एक दीर्घकालिक क्षमता विकास योजना विकसित करना होगा जो युद्ध सिद्धांत के अनुरूप हो।
सीडीएस नियुक्त होने के दो साल से भी कम समय में, जनरल रावत ने सैन्य सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की जो अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। अपने अभियान और दृढ़ संकल्प के साथ, उन्होंने यह सुनिश्चित किया होगा कि प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अब जबकि जनरल रावत नहीं हैं, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसकी गति खो न जाए।
जनरल बिपिन रावत
- फोटो :
अमर उजाला
तख्तापलट के डर से सीडीएस की नियुक्ति से डरती रही सरकारें
जैनी कहते हैं आजादी के 73 साल बाद बड़ी मुश्किल से यह नियुक्ति हुई थी। भारतीय सेना अराजनीतिक आर्मी है, लेकिन अब तक सरकारें तख्तापलत के डर से सीडीएस की नियुक्ति से बचती रही। लेकिन इस सरकार ने सीडीएस की नियुक्ति तो कर दी लेकिन चूंकि यह नई नियुक्ति है इसलिए इसमें कई बातें अभी तक स्पष्ट नहीं है, जैसे चार्टर ऑफ ड्यूटी नहीं बनी, इनकी भूमिका और इनकी जिम्मेदारियों की रुपरेखा ठीक से तय नहीं हुई। उनके मुताबिक देश में सीडीएस की नियुक्ति सैन्य ढ़ांचों में बदलाव की एक क्रांति थी। इसकी नींव अभी तैयार ही हो रही थी। इसलिए नए सीडीएस को भविष्य के लिए इन बातों को जल्द ही स्पष्ट कर लेना जरूरी होगा।
क्या है थिएटर कमांड
कहा जाता है कि थिएटर कमांड बन जाने से भारतीय सेना बहुत शक्तिशाली हो जाएगी। जनरल बिपिन रावत ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनते ही कहा था कि भविष्य में देश में थिएटर कमांड्स बनाए जाएंगे जिससे कि युद्ध की स्थिति पैदा होने पर दुश्मन के दांत खट्टे करने के लिए रणनीति बनाई जा सके। युद्ध के समय तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बिठाने के लिए ही थिएटर कमांड के गठन पर काम चल रहा है। जनरल रावत सेना, वायुसेना और नौसेना को एकसाथ लाकर इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। देश में हैं 17 कमांड, इन्हें मिलाकर ही करीब पांच थिएटर कमांड्स को बनाने की तैयारी थी।
जैनी कहते हैं आजादी के 73 साल बाद बड़ी मुश्किल से यह नियुक्ति हुई थी। भारतीय सेना अराजनीतिक आर्मी है, लेकिन अब तक सरकारें तख्तापलत के डर से सीडीएस की नियुक्ति से बचती रही। लेकिन इस सरकार ने सीडीएस की नियुक्ति तो कर दी लेकिन चूंकि यह नई नियुक्ति है इसलिए इसमें कई बातें अभी तक स्पष्ट नहीं है, जैसे चार्टर ऑफ ड्यूटी नहीं बनी, इनकी भूमिका और इनकी जिम्मेदारियों की रुपरेखा ठीक से तय नहीं हुई। उनके मुताबिक देश में सीडीएस की नियुक्ति सैन्य ढ़ांचों में बदलाव की एक क्रांति थी। इसकी नींव अभी तैयार ही हो रही थी। इसलिए नए सीडीएस को भविष्य के लिए इन बातों को जल्द ही स्पष्ट कर लेना जरूरी होगा।
क्या है थिएटर कमांड
कहा जाता है कि थिएटर कमांड बन जाने से भारतीय सेना बहुत शक्तिशाली हो जाएगी। जनरल बिपिन रावत ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनते ही कहा था कि भविष्य में देश में थिएटर कमांड्स बनाए जाएंगे जिससे कि युद्ध की स्थिति पैदा होने पर दुश्मन के दांत खट्टे करने के लिए रणनीति बनाई जा सके। युद्ध के समय तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बिठाने के लिए ही थिएटर कमांड के गठन पर काम चल रहा है। जनरल रावत सेना, वायुसेना और नौसेना को एकसाथ लाकर इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। देश में हैं 17 कमांड, इन्हें मिलाकर ही करीब पांच थिएटर कमांड्स को बनाने की तैयारी थी।