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DMA: सीडीएस जनरल अनिल चौहान बोले, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सहयोगात्मक प्रयास आवश्यक

Tue, 05 Mar 2024 11:41 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 05 Mar 2024 11:41 PM IST
सार

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान मंगलवार को सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) की तरफ से स्वदेशीकरण को प्रोत्साहन पर आयोजित दो दिवसीय विचार मंथन सत्र  'इंपीटस टू इंडिजिनाइजेशन' के आखिरी दिन अपने विचार रख रहे थे।

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CDS General Anil Chauhan said collaborative efforts necessary for self-reliance in defence sector
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान - फोटो : ANI

विस्तार

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने रक्षा विनिर्माण और उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार, सैन्य बलों, अनुसंधान एवं विकास और रक्षा उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र को एक संपूर्ण राष्ट्र के दृष्टिकोण के साथ सहयोगात्मक प्रयास करने की आवश्यकता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सीडीएस मंगलवार को सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) की तरफ से स्वदेशीकरण को प्रोत्साहन पर आयोजित दो दिवसीय विचार मंथन सत्र  'इंपीटस टू इंडिजिनाइजेशन' के आखिरी दिन अपने विचार रख रहे थे। कार्यक्रम मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ द्वारा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के सहयोग से आयोजित किया गया था।

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सत्र में सीडीएस ने रक्षा सुधारों को लेकर चल रही परिवर्तनकारी प्रक्रिया पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के विजन 2047 के लिए रक्षा विनिर्माण और उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में नवाचारों और संपूर्ण राष्ट्र के दृष्टिकोण की आवश्यकता है। कार्यक्रम के उद्धाटन सत्र को रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने भी संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने भी रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी से स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया था।
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सेना प्रमुख ने भी आत्मनिर्भरता पर दिया था जोर
कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित फर्स्टपोस्ट रक्षा शिखर सम्मेलन में पहुंचे थे। सम्मेलन को संबोधित करते हुए जनरल पांडे ने कहा था कि देश की सुरक्षा को हम न तो आउटसोर्स कर सकते हैं और न ही हम अपनी सुरक्षा को किसी के उदारता पर निर्भर कर सकते हैं। देश की सुरक्षा के संरक्षक के रूप में हम अपनी विकास आवश्यकताओं के लिए आयात निर्भरता से पूरी तरह दूर रहने की आवश्यकता से अवगत हैं। भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए हमारी रणनीतिक योजना में यह पहलू महत्वपूर्ण है। हमारी रक्षा जरूरतों को पूरा करने में आत्मनिर्भर होने की जरूरत है। रक्षा बल भविष्य के लिए तैयार रहेंगे और सेना परिवर्तनों के अनुरूप रहेगी। प्रौद्योगिकियां पारंपरिक युद्ध के तरीके को बदल रहीं हैं। 
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नौसेना प्रमुख ने भी सेना के आधुनिकरण पर दिया था जोर
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित रायसीन डायलॉग कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार भी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि हाल के सभी संघर्षों में फिर चाहे वह इस्राइल हमास युद्ध हो या यूक्रेन रूस युद्ध, जंग की प्रकृति में बदलाव आया है। इसलिए हमें अब आधुनिक तकनीकों के उपयोग को अपनाने की जरूरत है। तकनीके हाल में काफी अधिक किफायती और सुलभ होती जा रही हैं। हमें अब समुद्री क्षमताओं में निवेश की आवश्यकता है। कार्यक्रम में संयुक्त राज्य अमेरिका के यूएस इंडो पैसिफिक कमांड के कमांडर एडम जॉन सी एक्विलिनो ने कहा कि हमें अपने बल की रक्षा करनी चाहिए। वाणिज्य के मुक्त प्रवाह की रक्षा करनी चाहिए।

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