CBIC: GST दर में बदलाव वाली खबरें अटकलें, परिषद ने ऐसा कोई विमर्श नहीं किया; सीमा शुल्क बोर्ड ने साफ की स्थिति
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने ट्वीट किया कि जीएसटी परिषद ने अभी तक जीएसटी दर में किसी भी बदलाव पर चर्चा नहीं की है। परिषद को जीओएम (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) की सिफारिशें भी नहीं मिली हैं।
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विस्तार
जीएसटी की दरों में बदलाव को लेकर लगातार तेज हो रही अटकलों के बीच केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड का बड़ा दावा सामने आया है। इसमें बताया गया है कि जीएसटी परिषद ने अभी तक जीएसटी दर में बदलाव पर कोई चर्चा नहीं की है। परिषद को जीओएम (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) की सिफारिशें भी नहीं मिली हैं। दरअसल, जीओएम को अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देना है और फिर वह परिषद को प्रस्तुत करेगा, जिसके बाद परिषद जीओएम की सिफारिशों पर अंतिम निर्णय लेगी।
Central Board of Indirect Taxes & Customs tweets, "... The GST Council has not yet deliberated on any GST rate changes. The Council has not even received the recommendations of the GoM. In fact, the GoM has yet to finalise and present its recommendations to the Council after… pic.twitter.com/ORQuX4sE4a
— ANI (@ANI) December 3, 2024
रिपोर्ट जमा करने के लिए 6 महीने की मुहलत
वहीं इस मामले में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के नेतृत्व में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) क्षतिपूर्ति उपकर पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने सोमवार को रिपोर्ट सौंपने के लिए जीएसटी परिषद से छह महीने की मोहलत मांगने का फैसला किया। इस समूह में असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मंत्री शामिल हैं। इस समूह को 31 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट जीएसटी परिषद को सौंपने का आदेश दिया गया था।
अधिकारी ने दी थी जानकारी
एक अधिकारी के अनुसार, जीओएम ने यह फैसला किया है कि मुआवजा उपकर से जुड़े कई कानूनी मुद्दे हैं, जिन पर विस्तार से चर्चा करनी होगी, जिसमें समय लगेगा। इसलिए, उन्होंने परिषद को रिपोर्ट जमा करने के लिए समय बढ़ाने की मांग करने का फैसला लिया। अधिकारी के अनुसार, जीएसटी परिषद से 5-6 महीने का एक्सटेंशन मांगा जा सकता है।
इन चिजों पर टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में अलग-अलग चीजों पर टैक्स तय करने वाले मंत्री समूह (जीओएम) ने सोमवार को बैठक की। इसमें फैसला हुआ कि समाज के लिए नुकसानदेह वस्तुओं पर टैक्स को बढ़ाया जाएगा। इसी के मद्देनजर सिगरेट, तंबाकू, कोल्ड ड्रिंक्स समेत अन्य कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और इनसे जुड़े उत्पादों पर 35 फीसदी टैक्स लगाने का फैसला किया गया है। अभी इन उत्पादों पर 28 फीसदी टैक्स की दर तय है।
इसके साथ ही इस मामले में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में मंत्रियों के समूह ने कपड़ों पर टैक्स दरों के युक्तीकरण पर फैसला किया। इसके तहत 1500 रुपये तक के रेडीमेड गारमेंट्स पर 5 फीसदी टैक्स लगेगा, वहीं 1500 से 10 हजार तक के कपड़ों पर 18 फीसदी और 10,000 से ऊपर के कपड़ों पर 28 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा।