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इसरो साजिश मामला: सीबीआई ने कहा- आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत

Fri, 06 Aug 2021 10:17 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 06 Aug 2021 10:17 PM IST
सार

इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) साजिश मामले में सीबीआई ने केरल हाईकोर्ट में आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध किया और आरोपियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ करने की जरूरत पर जोर दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई अब 11 अगस्त को करेगी।

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CBI says custodial interrogation of accused is required in ISRO conspiracy case
केरल उच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

इसरो साजिश मामले में सीबीआई ने शुक्रवार को केरल हाईकोर्ट में दाखिल केरल पुलिस के तीन पूर्व पुलिस अधिकारियों और इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक सेवानिवृत्त अधिकारी की जमानत याचिकाओं का विरोध किया। एजेंसी ने अदालत से कहा कि पाकिस्तान की आईएसआई जैसी विदेशी खुफिया एजेंसियों ने भारत में क्रायोजेनिक प्रौद्योगिकी के विकास को पटरी से उतारने के लिए साजिश रची है। इसके पीछे किसका दिमाग है, यह जानने के लिए आरोपियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ करना बहुत जरूरी है। 

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सीबीआई की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने न्यायाधीश अशोक मोहन के सामने यह बात रखी। उन्होंने अदालत को बताया कि यह एक गंभीर मामला है जो राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। एजेंसी ने यह भी कहा कि आरोपियों (पुलिस अधिकारी एस विजयन, थंपी एस दुर्गा दत्त व आरबी श्रीकुमार और सेवानिवृत्त आईबी अधिकारी पीएस जयप्रकाश) को कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि मामले की जांच इस समय अपने प्रारंभिक चरण में है।
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अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगर अग्रिम जमानत दी गई तो आरोपी कुछ भी नहीं बताएंगे और इससे गंभीर सबूत खोने की आशंका है। उन्होंने कहा, 'हम यह जानने में असफल रह जाएंगे कि इस पूरे मामले का असली साजिशकर्ता कौन था।' वहीं, आरोपियों ने सीबीआई के दावे को खारिज करते हुए कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी को 1994-95 में अपनी जांच में कुछ नहीं मिला था, अब वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की संलिप्तता की नई कहानी लेकर आ रही है। 
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दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 11 अगस्त तय कर दी और चारों आरोपियों को दी गई गिरफ्तारी से अंतरिम राहत की अवधि को तब तक के लिए बढ़ा दिया। सीबीआई ने 1994 के जासूसी मामले में इसरो के वैज्ञानिक नांबी नारायणन की गिरफ्तारी के सिलसिले में 18 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने तब अपनी जांच में माना था कि नारायणन की गिरफ्तारी के लिए केरल में शीर्ष पुलिस अधिकारी जिम्मेदार थे, जिसे एजेंसी ने अवैध बताया था।

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