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CBI Court: 20 साल पुराने पवनराजे निम्बालकर हत्याकांड में बड़ा फैसला, पूर्व मंत्री पद्मसिंह समेत सभी आरोपी बरी
Sat, 20 Jun 2026 03:19 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 20 Jun 2026 03:19 PM IST
सार
Pawanraje Nimbalkar Murder Case: महाराष्ट्र के चर्चित पवनराजे निम्बालकर हत्याकांड में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल समेत आठ आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष साजिश की पूरी कड़ी साबित नहीं कर सका और सरकारी गवाह पारसमल जैन की गवाही भरोसेमंद नहीं पाई गई। वर्ष 2006 में कांग्रेस नेता पवनराजे निम्बालकर और उनके ड्राइवर की हत्या कर दी गई थी। आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं...
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महाराष्ट्र के चर्चित राजनीतिक हत्या मामले में बड़ा फैसला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाराष्ट्र की राजनीति के चर्चित पवनराजे निम्बालकर हत्याकांड में करीब दो दशक बाद बड़ा फैसला आया है। मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व महाराष्ट्र गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल और सात अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष साजिश की पूरी कड़ी साबित करने में विफल रहा। वर्ष 2006 में कांग्रेस नेता पवनराजे निम्बालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले को महाराष्ट्र की सबसे चर्चित राजनीतिक हत्याओं में से एक माना जाता है। 20 साल तक चली जांच और सुनवाई के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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इस मामले में सीबीआई ने 2009 में करीब 5000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। वर्ष 2011 में मुकदमे की औपचारिक सुनवाई शुरू हुई। बाद में कई गवाहों के बयान बदलने की घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अलीबाग से मुंबई स्थानांतरित कर दिया। लगभग 15 वर्षों तक चली सुनवाई में 128 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मई 2026 में फैसला सुरक्षित रखा गया था और 20 जून 2026 को अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
पवनराजे निम्बालकर महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा नाम थे। उनके बेटे ओमप्रकाश राजे निम्बालकर वर्तमान में लोकसभा सांसद हैं। वहीं पद्मसिंह पाटिल राज्य की राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। ऐसे में इस मामले के फैसले का राजनीतिक महत्व भी काफी बड़ा माना जा रहा है। दो दशक तक चले इस मामले में अदालत के फैसले ने कानूनी लड़ाई का एक अहम अध्याय समाप्त कर दिया है।
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अदालत ने सभी आरोपियों को बरी क्यों किया?
विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश सत्यनारायण नवंदर ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ साजिश की पूरी श्रृंखला स्थापित नहीं कर पाया। अदालत ने विशेष रूप से आरोपी से सरकारी गवाह बने पारसमल जैन की गवाही पर सवाल उठाए। अभियोजन पक्ष का मामला काफी हद तक जैन की गवाही पर आधारित था। हालांकि अदालत ने उनकी गवाही को संदिग्ध मानते हुए स्वीकार नहीं किया। अदालत का मानना था कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी आधार पर पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आठ आरोपियों को बरी कर दिया गया।
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पवनराजे निम्बालकर हत्याकांड क्या था?
3 जून 2006 को कांग्रेस नेता पवनराजे निम्बालकर और उनके ड्राइवर समद काजी मुंबई से उस्मानाबाद, जो अब धाराशिव कहलाता है, जा रहे थे। इसी दौरान नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में उनकी कार को रोककर हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। इस हमले में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। शुरुआत में मामले की जांच नवी मुंबई पुलिस और राज्य सीआईडी ने की थी। बाद में पवनराजे की पत्नी ने जांच पर असंतोष जताया, जिसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2008 में मामला सीबीआई को सौंप दिया।
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सीबीआई ने पद्मसिंह पाटिल पर क्या आरोप लगाए थे?
सीबीआई के अनुसार पद्मसिंह पाटिल इस मामले के मुख्य आरोपी थे। जांच एजेंसी का आरोप था कि राजनीतिक और कारोबारी प्रतिद्वंद्विता के कारण उन्होंने अपने रिश्तेदार पवनराजे निम्बालकर की हत्या की साजिश रची थी। सीबीआई ने दावा किया था कि हत्या के लिए सुपारी दी गई थी और इसके लिए धनराशि भी उपलब्ध कराई गई थी। जून 2009 में सीबीआई ने पद्मसिंह पाटिल को गिरफ्तार किया था। हालांकि उसी वर्ष सितंबर में उन्हें अलीबाग की सत्र अदालत से जमानत मिल गई थी।पारसमल जैन की भूमिका इतनी अहम क्यों थी?
इस मामले में पारसमल जैन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी गई। जांच एजेंसी के अनुसार जैन ने शुरुआत में हत्या की सुपारी स्वीकार की थी। बाद में उन्हें माफी देकर सरकारी गवाह बनाया गया। अभियोजन पक्ष ने उनकी गवाही के आधार पर पूरी साजिश को साबित करने की कोशिश की। लेकिन अदालत ने कहा कि उनकी गवाही भरोसेमंद नहीं है और उससे घटनाओं की श्रृंखला स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं होती। यही कारण रहा कि अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ गया और अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ दे दिया।सुनवाई के दौरान अन्ना हजारे का नाम कैसे आया?
मामले की सुनवाई के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का नाम भी सामने आया था। पारसमल जैन के बयान में दावा किया गया था कि पद्मसिंह पाटिल ने कथित तौर पर अन्ना हजारे को भी निशाना बनाने की योजना बनाई थी। वर्ष 2019 में अन्ना हजारे ने अदालत में अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में बयान दर्ज कराया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस दोहरे हत्याकांड की जानकारी मीडिया के जरिए मिली थी और उन्हें भी खतरे की जानकारी दी गई थी। हालांकि यह पहलू भी अदालत में आरोप साबित करने के लिए निर्णायक नहीं बन सका।इस मामले में सीबीआई ने 2009 में करीब 5000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। वर्ष 2011 में मुकदमे की औपचारिक सुनवाई शुरू हुई। बाद में कई गवाहों के बयान बदलने की घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अलीबाग से मुंबई स्थानांतरित कर दिया। लगभग 15 वर्षों तक चली सुनवाई में 128 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मई 2026 में फैसला सुरक्षित रखा गया था और 20 जून 2026 को अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
पवनराजे निम्बालकर महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा नाम थे। उनके बेटे ओमप्रकाश राजे निम्बालकर वर्तमान में लोकसभा सांसद हैं। वहीं पद्मसिंह पाटिल राज्य की राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। ऐसे में इस मामले के फैसले का राजनीतिक महत्व भी काफी बड़ा माना जा रहा है। दो दशक तक चले इस मामले में अदालत के फैसले ने कानूनी लड़ाई का एक अहम अध्याय समाप्त कर दिया है।