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सीबीआई रिश्वत मामला: अपने जीवन में हमेशा सुर्खियों में रहे हैं राकेश अस्थाना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 28 Oct 2018 12:47 PM IST
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राकेश अस्थाना
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सीबीआई के दो उच्च अधिकारियों राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा के बीच की लड़ाई ने इतना तूल पकड़ा कि इस मामले को सुलझाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।देश के प्रतिष्ठित जांच एजेंसी के दो बेहद लोकप्रिय और दमदार अधिकारियों पर रिश्वत लेने का आरोप लग रहा है और दोनो के बीच की तनातनी एजेंसी की साख पर बट्टा लगाने का काम कर रही है।
बात करें राकेश अस्थाना की तो वो आलोक वर्मा से वरीयता में कम हैं लेकिन शुरूआत से ही सरकार ने उनकी कार्यशैली से प्रभावित हो अहम जिम्मेदारी और पद दिया । सीबीआई के इस अधिकारी के करियर का सफर हमेशा सुर्खियों में रहा चाहे वो चारा घोटाला रहा हो, या फिर गोधरा कांड और अब रिश्वत मामला ।
चारा घोटाला
बता दें कि, सीबीआई के पूर्व विशेष अधिकारी राकेश अस्थाना 2002 के वही आईपीएस अधिकारी हैं जिसने तब बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले का मामला दर्ज करने की हिम्मत की थी। इसी दौरान जब चारा घोटले मामले पर जांच चल रही थी, तभी गुजरात में 2002 गुजरात दंगों के कारण 'गोधरा कांड' हुआ। जिसके बाद गोधरा ट्रेन नरसंहार मामले की जांच सीबीआई को सौपने की मांग तेज हो गयी। लेकिन चारा घोटाला अस्थाना के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है जिसमें लालू प्रसाद यादव आरोपी पाए गए और इस कारण अस्थाना भाजपा के और भी प्रिय बन गए।
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गोधरा कांड
वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने नरसंहार के तीन दिन पहले की चुनाव जीतकर गुजरात के मुख्यमंत्री का पद हासिल किया था। मोदी ने गोधरा कांड की जांच का जिम्मा राकेश अस्थाना को सौंप दिया।खूफिया जांच विभाग और रेलवे पुलिस के पुलिस उपमहानिरीक्षक पद पर रहते हुए राकेश अस्थाना पहले से ही इस नरसंहार मामले की जांच कर रहे थे। गुजरात की नई मोदी सरकार ने सीबीआई की जांच की मांग को टालने के लिए सीबीआई से आये अधिकारी को ही जांच की जिम्मेदारी देकर मुश्किलें कम की।
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बात करें राकेश अस्थाना की तो वो आलोक वर्मा से वरीयता में कम हैं लेकिन शुरूआत से ही सरकार ने उनकी कार्यशैली से प्रभावित हो अहम जिम्मेदारी और पद दिया । सीबीआई के इस अधिकारी के करियर का सफर हमेशा सुर्खियों में रहा चाहे वो चारा घोटाला रहा हो, या फिर गोधरा कांड और अब रिश्वत मामला ।
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चारा घोटाला
बता दें कि, सीबीआई के पूर्व विशेष अधिकारी राकेश अस्थाना 2002 के वही आईपीएस अधिकारी हैं जिसने तब बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले का मामला दर्ज करने की हिम्मत की थी। इसी दौरान जब चारा घोटले मामले पर जांच चल रही थी, तभी गुजरात में 2002 गुजरात दंगों के कारण 'गोधरा कांड' हुआ। जिसके बाद गोधरा ट्रेन नरसंहार मामले की जांच सीबीआई को सौपने की मांग तेज हो गयी। लेकिन चारा घोटाला अस्थाना के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है जिसमें लालू प्रसाद यादव आरोपी पाए गए और इस कारण अस्थाना भाजपा के और भी प्रिय बन गए।
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गोधरा कांड
वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने नरसंहार के तीन दिन पहले की चुनाव जीतकर गुजरात के मुख्यमंत्री का पद हासिल किया था। मोदी ने गोधरा कांड की जांच का जिम्मा राकेश अस्थाना को सौंप दिया।खूफिया जांच विभाग और रेलवे पुलिस के पुलिस उपमहानिरीक्षक पद पर रहते हुए राकेश अस्थाना पहले से ही इस नरसंहार मामले की जांच कर रहे थे। गुजरात की नई मोदी सरकार ने सीबीआई की जांच की मांग को टालने के लिए सीबीआई से आये अधिकारी को ही जांच की जिम्मेदारी देकर मुश्किलें कम की।
राकेश अस्थाना ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि गोधरा कांड एक पूर्व नियोजित नरसंहार था जिसमें आईएसआई से लेकर सीमी जैसे आतंकवादी संगठन पर आरोप स्थापित किया गया। इतना ही नहीं राकेश अस्थाना ने आखिर में इसे नार्को आतंकवाद का हिस्सा भी बताया । हालांकि 2011 में, अदालत ने 94 आरोपियों में से 63 को बरी कर दिया, उनमें से मौलाना उमरजी भी शामिल था जिसे चार्जशीट में मास्टरमाइंड के रूप में नामित किया गया था।
अहमदाबाद सीरियल बम विस्फोट
वडोदरा में रहते हुए अस्थाना द्वारा संचालित बड़े मामलों में से एक, सिमी ऑपरेटरों की गिरफ्तारी थी, जो 26 जुलाई 2008 को कथित तौर अहमदाबाद में सीरियल बम विस्फोट शामिल थे। इस बम विस्फोट में 56 लोगों की मौत हो गई थी। जिसके बाद लगातार मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में एक साथ गिरफ्तारियां की गईं।
पुरस्कार से हुए सम्मानित
राकेश अस्थाना उन अधिकारीयों में से एक है जिसका नाम बड़े मामलों में जुड़ता गया और मिजाज कुछ ऐसा हो गया की बड़े मामलों के इतर उन्हें छोटे मामलों में किसी प्रकार की रूचि नहीं होती थी। सूत्रों के मुताबिक उनके एक साथी ने बयान दिया है कि, वो अपने लिए पदों का चयन भी खुद करते थे और अधिकतर वैसा ही होता था जो वह चाहते थे। राकेश अस्थाना के कार्यकाल के दौरान, सूरत देश के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक था, जिसके लिए अस्थाना को फिक्की से पुरस्कार भी मिला था।
इतने विशेष कार्यों को अंजाम देने वाले अधिकारी राकेश अस्थाना सीबीआई में एक विवेकवान और अपने काम के प्रति जिम्मेदार अधिकारी के रूप में जाने जाते थे लेकिन अस्थाना दिल्ली के अधिकारियों को समझने में नाकाम रहे और दूसरों पर भरोसे के कारण आज रिश्वत मामले जैसे संकट में फंसते चले गए।
अहमदाबाद सीरियल बम विस्फोट
वडोदरा में रहते हुए अस्थाना द्वारा संचालित बड़े मामलों में से एक, सिमी ऑपरेटरों की गिरफ्तारी थी, जो 26 जुलाई 2008 को कथित तौर अहमदाबाद में सीरियल बम विस्फोट शामिल थे। इस बम विस्फोट में 56 लोगों की मौत हो गई थी। जिसके बाद लगातार मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में एक साथ गिरफ्तारियां की गईं।
पुरस्कार से हुए सम्मानित
राकेश अस्थाना उन अधिकारीयों में से एक है जिसका नाम बड़े मामलों में जुड़ता गया और मिजाज कुछ ऐसा हो गया की बड़े मामलों के इतर उन्हें छोटे मामलों में किसी प्रकार की रूचि नहीं होती थी। सूत्रों के मुताबिक उनके एक साथी ने बयान दिया है कि, वो अपने लिए पदों का चयन भी खुद करते थे और अधिकतर वैसा ही होता था जो वह चाहते थे। राकेश अस्थाना के कार्यकाल के दौरान, सूरत देश के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक था, जिसके लिए अस्थाना को फिक्की से पुरस्कार भी मिला था।
इतने विशेष कार्यों को अंजाम देने वाले अधिकारी राकेश अस्थाना सीबीआई में एक विवेकवान और अपने काम के प्रति जिम्मेदार अधिकारी के रूप में जाने जाते थे लेकिन अस्थाना दिल्ली के अधिकारियों को समझने में नाकाम रहे और दूसरों पर भरोसे के कारण आज रिश्वत मामले जैसे संकट में फंसते चले गए।