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CBI Books DHFL: बधावन बंधुओं की मुश्किलें बढ़ीं, 34615 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का नया मामला दर्ज
Thu, 23 Jun 2022 07:57 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 23 Jun 2022 07:57 PM IST
सार
मामला दर्ज होने के बाद एजेंसी के 50 से अधिक अधिकारियों की एक टीम ने प्राथमिकी में दर्ज आरोपियों से संबंधित 12 स्थानों पर मुंबई में तलाशी ली।
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डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल वधावन
- फोटो : social media
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विस्तार
सीबीआई ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड, उसके पूर्व सीएमडी कपिल वधावन, निदेशक धीरज वधावन और अन्य के खिलाफ 34,615 करोड़ रुपये धोखाधड़ी का नया मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही यह एजेंसी द्वारा जांच की गई सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी का मामला बन गया है। मामला दर्ज होने के बाद एजेंसी के 50 से अधिक अधिकारियों की एक टीम ने प्राथमिकी में दर्ज आरोपियों से संबंधित 12 स्थानों पर मुंबई में तलाशी ली, जिसमें अमरेलिस रियल्टर्स के सुधाकर शेट्टी और आठ अन्य बिल्डर भी शामिल हैं।
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अधिकारियों ने कहा कि बैंक ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने 2010 और 2018 के बीच विभिन्न व्यवस्थाओं के तहत कंसोर्टियम से 42,871 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा का लाभ उठाया था, लेकिन मई 2019 से पुनर्भुगतान में चूक करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि ऋणदाता बैंकों द्वारा खातों को अलग-अलग समय पर गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीएस) घोषित किया गया था। जब जनवरी 2019 में डीएचएफएल जांच की चपेट में आ गया था, तब मीडिया में धन के डायवर्जन, राउंड ट्रिपिंग और फंड की हेराफेरी के आरोपों पर मीडिया रिपोर्ट सामने आई थी।
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सदस्यों ने केपीएमजी को 1 अप्रैल, 2015 से 31 दिसंबर, 2018 तक डीएचएफएल की विशेष समीक्षा ऑडिट करने के लिए नियुक्त किया। बैंकों ने कपिल और धीरज वधावन के खिलाफ 18 अक्टूबर, 2019 को उन्हें देश छोड़ने से रोकने के लिए लुक आउट सर्कुलर जारी करने की प्रक्रिया शुरू की।बैंक ने आरोप लगाया है कि केपीएमजी ने अपने ऑडिट में संबंधित और परस्पर जुड़ी संस्थाओं और व्यक्तियों को ऋण और एडवांस की आड़ में धन का कहीं और निवेश कर दिया।
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एनएसई घोटाला : ओपीजी सिक्योरिटीज के संजय गुप्ता गिरफ्तार
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को लोकेशन मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ओपीजी सिक्योरिटीज के मालिक व प्रबंध निदेशक संजय गुप्ता को गिरफ्तार किया है। गुप्ता के खिलाफ चार साल पहले एफआईआर दर्ज हुई थी। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि संजय गुप्ता को समन जारी कर सीबीआई मुख्यालय पूछताछ के लिए बुलाया गया था। कुछ घंटे चली पूछताछ में गुप्ता सवालाें का गोलमोल जवाब दे रहे थे और जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, जिसके बाद मंगलवार रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि गुप्ता ने कुछ और लोगों के साथ मिलकर सुबूत मिटाने और सिंडिकेट सदस्यों के जरिये सेबी अधिकारियों को रिश्वत की पेशकश कर जांच प्रभावित करने का प्रयास किया। सीबीआई अब यह पता लगा रही है कि सिंडिकेट सदस्यों को दी गई रिश्वत की राशि सेबी अधिकारियों तक पहुंची थी या नहीं।
14,683 करोड़ रुपये से अधिक के फंड को डायवर्ट किया
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि डीएचएफएल ने कथित तौर पर तत्कालीन अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक कपिल वधावन, निदेशक धीरज वधावन और व्यवसायी सुधाकर शेट्टी द्वारा नियंत्रित नौ रियल एस्टेट फर्मों के माध्यम से 14,683 करोड़ रुपये से अधिक के फंड को डायवर्ट किया, जहां उनके वित्तीय हित थे। इन रियल एस्टेट फर्मों की भूमिका शेट्टी के सहाना समूह से संबंधित पांच और चार अन्य, दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) में 34,615 करोड़ रुपये के घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के दायरे में आ गई है। अधिकारियों ने कहा कि सामने आया कि कंपनियों को ऋण कथित तौर पर कपिल वधावन और धीरज वधावन के निर्देशों के तहत वितरित किए गए थे।
सीबीआई से संपर्क करने वाले यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने आरोप लगाया है कि एमारिलिस रिएलटर्स, गुलमर्ग रिएलटर्स, और स्काइलार्क बिल्डकॉन पर 98.33 करोड़ रुपये और दर्शन डेवलपर्स और सिग्तिया कंस्ट्रक्शन पर डीएचएफएल का 3,970 करोड़ रुपये बकाया है। अधिकारियों ने बताया कि सभी पांच कंपनियां सहाना समूह की हैं। यह भी आरोप है कि दर्शन डेवलपर्स और सिगटिया कंस्ट्रक्शन को वधावनों द्वारा नियंत्रित किया गया था।