{"_id":"5aaa5e444f1c1bab758b5830","slug":"cauvery-water-dispute-resolution-passed-by-tamil-nadu-assembly-to-set-up-cauvery-management-board","type":"story","status":"publish","title_hn":"कावेरी जल विवाद: कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड की स्थापना के लिए तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पारित ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
कावेरी जल विवाद: कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड की स्थापना के लिए तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पारित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Updated Thu, 15 Mar 2018 05:21 PM IST
विज्ञापन
tamil nadu assembly
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार के अनुरोध पर गुरुवार को तमिलनाडु विधानसभा में कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड और कावेरी वॉटर मॉनिटरिंग कमिटी के गठन के लिए सर्वसम्मति से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया है।
विज्ञापन
इस बीच, डीएमके विधायकों ने तमिलनाडु विधानसभा के बाहर काले कपड़े पहनकर राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा कि पलानीस्वामी सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझ कर कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड के गठन में देरी की है।
विज्ञापन
डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष ने इसी कड़ी में आगे कहा कि हमारे विधायक कावेरी जल मुद्दे पर इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र की मोदी सरकार पर दबाव बनाने में नाकाम साबित हुई है।
विज्ञापन
Resolution urging Centre to constitute #CauveryManagementBoard and #CauveryWaterMonitoringCommittee passed unanimously in #TamilNadu Assembly. pic.twitter.com/2CRWzRIYlv
— ANI (@ANI) March 15, 2018
गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार (16 फरवरी) को दोनों राज्यों के बीच चल रहे जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अमिताव रॉय और ए.एम. खानविलकर की बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि नदी पर कोई राज्य दावा नहीं कर सकता है। बता दें कि कोर्ट ने तमिलनाडु के हिस्से का पानी घटाकर 177.25 टीएमसी कर दिया।
उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से कर्नाटक को 14.75 टीएमसी पानी का फायदा मिला था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया था कि कावेरी के जल में कर्नाटक का हिस्सा इस तथ्य को देखकर बढ़ाया जा रहा है कि बीते दिनों में बेंगलुरु में पीने के पानी की मांग बढ़ी है। साथ ही इंडस्ट्रियल इलाकों में भी पानी की खपत में इजाफा देखा गया है। विशेषज्ञों का माना है कि शीर्ष अदालत के इस फैसले का असर कर्नाटक में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है।