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जाति जनगणना: कांग्रेस ने मोदी सरकार की नीयत पर उठाए सवाल, सभी दलों से बातचीत की मांग की
Mon, 26 Jan 2026 04:01 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 26 Jan 2026 04:01 PM IST
सार
कांग्रेस ने मोदी सरकार की जाति जनगणना की नीयत पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जनगणना के फॉर्म में ओबीसी का जिक्र न होना शक पैदा करता है। कांग्रेस ने मांग की है कि प्रक्रिया तय करने से पहले सभी दलों और राज्यों से बात की जाए।
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कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
कांग्रेस ने जाति जनगणना के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा हो। पार्टी ने कहा कि जनगणना के पहले चरण यानी मकानों की सूची बनाने (हाउसलिस्टिंग) के लिए जो सवाल तैयार किए गए हैं, वे सरकार की असली मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि जाति जनगणना की प्रक्रिया तय करने से पहले सरकार को राजनीतिक दलों, राज्यों और सामाजिक संगठनों के साथ बातचीत करनी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जनगणना 2027 का काम काफी देरी से चल रहा है। इसका पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा। दूसरा चरण, जिसमें जनसंख्या की गिनती होगी, वह फरवरी 2027 में होगा। हालांकि, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे बर्फीले इलाकों में यह सितंबर 2026 में ही हो जाएगा।
सरकार के यू-टर्न और नीयत पर सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने पहले जाति जनगणना का विरोध किया था। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने इसे शहरी नक्सली सोच बताया था। लेकिन बाद में राहुल गांधी और कांग्रेस के दबाव में सरकार को झुकना पड़ा और उन्होंने इसे जनगणना 2027 में शामिल करने की बात मानी।
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रमेश ने बताया कि सरकार ने मकानों की सूची बनाने के लिए जो फॉर्म जारी किया है, उसमें सवाल नंबर 12 चिंताजनक है। इसमें पूछा गया है कि क्या घर का मुखिया अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या 'अन्य' श्रेणी से है। इसमें ओबीसी और सामान्य वर्ग के बारे में साफ तौर पर नहीं पूछा गया है। रमेश ने कहा कि यह तरीका बताता है कि सरकार निष्पक्ष जाति जनगणना के लिए गंभीर नहीं है।
तेलंगाना मॉडल अपनाने की सलाह
कांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि सरकार को तेलंगाना सरकार के 2025 के सर्वे (SEEEPC) से सीखना चाहिए। वहां शिक्षा, रोजगार और आय पर जाति-वार जानकारी जुटाई गई थी। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए ऐसी जानकारी जरूरी है।
सरकार ने जारी किए 33 सवाल
सरकार ने जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवालों की अधिसूचना जारी की है। यह चरण 1 अप्रैल से शुरू होगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि अधिकारियों को लोगों से कई तरह की जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है।
सर्वे में पूछे जाने वाले प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं-
जनगणना का बजट
जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच होगा। हर राज्य अपने हिसाब से 30 दिनों का समय तय करेगा। लोगों के पास खुद जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी होगा, जो सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले खुलेगा। इस पूरी कवायद पर 11,718 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जनगणना 2027 का काम काफी देरी से चल रहा है। इसका पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा। दूसरा चरण, जिसमें जनसंख्या की गिनती होगी, वह फरवरी 2027 में होगा। हालांकि, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे बर्फीले इलाकों में यह सितंबर 2026 में ही हो जाएगा।
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सरकार के यू-टर्न और नीयत पर सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने पहले जाति जनगणना का विरोध किया था। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने इसे शहरी नक्सली सोच बताया था। लेकिन बाद में राहुल गांधी और कांग्रेस के दबाव में सरकार को झुकना पड़ा और उन्होंने इसे जनगणना 2027 में शामिल करने की बात मानी।
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रमेश ने बताया कि सरकार ने मकानों की सूची बनाने के लिए जो फॉर्म जारी किया है, उसमें सवाल नंबर 12 चिंताजनक है। इसमें पूछा गया है कि क्या घर का मुखिया अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या 'अन्य' श्रेणी से है। इसमें ओबीसी और सामान्य वर्ग के बारे में साफ तौर पर नहीं पूछा गया है। रमेश ने कहा कि यह तरीका बताता है कि सरकार निष्पक्ष जाति जनगणना के लिए गंभीर नहीं है।
तेलंगाना मॉडल अपनाने की सलाह
कांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि सरकार को तेलंगाना सरकार के 2025 के सर्वे (SEEEPC) से सीखना चाहिए। वहां शिक्षा, रोजगार और आय पर जाति-वार जानकारी जुटाई गई थी। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए ऐसी जानकारी जरूरी है।
सरकार ने जारी किए 33 सवाल
सरकार ने जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवालों की अधिसूचना जारी की है। यह चरण 1 अप्रैल से शुरू होगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि अधिकारियों को लोगों से कई तरह की जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है।
सर्वे में पूछे जाने वाले प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं-
- घर के फर्श, दीवार और छत में कौन सी सामग्री लगी है?
- घर में कितने शादीशुदा जोड़े रहते हैं?
- घर के मुखिया का नाम और लिंग क्या है?
- परिवार किस तरह का अनाज खाता है?
- घर में कौन सी आधुनिक सुविधाएं और वाहन मौजूद हैं?
- घर के मुखिया की जाति (SC/ST या अन्य) और मकान के मालिकाना हक की जानकारी।
जनगणना का बजट
जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच होगा। हर राज्य अपने हिसाब से 30 दिनों का समय तय करेगा। लोगों के पास खुद जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी होगा, जो सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले खुलेगा। इस पूरी कवायद पर 11,718 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।