तीस साल पुराने सामूहिक हत्याकांड में माफिया बृजेश सिंह को हाईकोर्ट से लगा झटका
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तीस साल पुराने सामूहिक हत्याकांड में विधान परिषद सदस्य माफिया बृजेश सिंह को हाईकोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने मुकदमे का ट्रायल दूसरी कोर्ट में स्थानांतरित करने की उनकी अर्जी खारिज कर दी है। साथ ही आदेश दिया है कि मुकदमे का निस्तारण शीघ्रता से किया जाए। बृजेश सिंह ने याचिका दाखिल कर कहा था कि उनके मुकदमे की सुनवाई कर रहे अपर जिला जज से उनको निष्पक्ष न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।
याचिका पर न्यायमूर्ति प्रत्यूष कुमार ने सुनवाई की। एमएलसी बृजेश सिंह की याचिका का अधिवक्ता आशीष गुप्ता ने विरोध किया। याचिका में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट के जज विपक्षी वकीलों और गवाहों से अपने चैंबर मिल रहे हैं। उनसे निष्पक्ष फैसला मिलने की उम्मीद नहीं है।
घटना सिकरौरा नरसंहार के नाम से काफी चर्चित हुई थी
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दे सका जिससे पता चल सके कि ट्रायल कोर्ट जज पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। उनके किसी आदेश से ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है। इससे पहले भी हाईकोर्ट इस मामले में सुनवाई स्थगित करने की मांग अस्वीकार कर ट्रायल छह माह में पूरा करने का आदेश दे चुका है। उल्लेखनीय है कि 1986 में बलुआ थानाक्षेत्र (वर्तमान में चंदौली जिला) में पीड़िता हीरावती देवी के पति सहित परिवार के सात सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
घटना सिकरौरा नरसंहार के नाम से काफी चर्चित हुई थी। इस घटना में बृजेश सिंह और अन्य लोग आरोपी हैं। पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। विचारण अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम के यहां चल रहा है। बृजेश सिंह ने विचारण किसी दूसरे न्यायाधीश के यहां स्थानांतरित करने की मांग की थी।