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सीएपीएफ (जीए) अधिनियम 2026 लागू: 100 फीसदी डीजी/एसडीजी, 67 % एडीजी, 50% आईजी पद पर रहेंगे आईपीएस

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 08 Oct 2026 09:48 PM IST
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CAPF (GA) Act 2026 Comes Into Effect, Sets Quota for IPS Officers in Senior CAPF Posts
CAPF - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

केंद्र सरकार ने गुरुवार को 'सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026' की अधिसूचना जारी कर दी है। अब यह अधिनियम 'केंद्रीय अर्धसैनिक बलों' में लागू हो गया है। इसके तहत सीएपीएफ में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के पदों को लेकर स्थिति साफ हो गई है। डीजी और एसडीजी के पदों पर सौ फीसदी नियुक्तियां, आईपीएस अधिकारी की होंगी। एडीजी के 67 प्रतिशत पद आईपीएस से भरे जाएंगे, जबकि आईजी के पचास फीसदी पदों पर भी आईपीएस नियुक्त होंगे। दूसरी तरफ इस नए अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सर्वोच्च अदालत में इस मामले की सुनवाई जारी है। 

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बता दें कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026, एक अप्रैल को राज्यसभा में और दो अप्रैल को लोकसभा में पारित किया गया था। नौ अप्रैल को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी। उसके बाद यह विधेयक, अधिनियम बना था। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद बताते हैं, सरकार ने इस अधिनियम को लागू कर कैडर अफसरों के हितों पर कुठाराघात किया है। यह बात तो सुप्रीम कोर्ट भी मान चुकी है कि कैडर अफसरों को पदोन्नति के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। सीआरपीएफ और बीएसएफ के अलावा दूसरे केंद्रीय बलों में पदोन्नति को लेकर हालात खराब होते जा रहे हैं। यूपीएससी की परीक्षा पास कर सेवा में आए ग्राउंड कमांडर यानी सहायक कमांडेंट को 15 साल में पहली पदोन्नति नहीं मिल पा रही। बतौर सूद, भविष्य में इस रफ्तार से तो वे कमांडेंट के पद से ही रिटायर हो जाएंगे। दो तीन सौ अफसरों में से एक आध ही एडीजी तक पहुंच सकेगा।
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 बीएसएफ और सीआरपीएफ की बात करें तो 2016 से इन बलों में कैडर रिव्यू ही नहीं हुआ है। डीओपीटी का नियम है कि हर पांच वर्ष में कैडर रिव्यू हो। कैडर अफसरों के पास कार्य करने की क्षमता और लंबा अनुभव है, लेकिन पॉलिसी लेवल पर निर्णय लेने में इनका इस्तेमाल बहुत कम है, जबकि बॉर्डर या इंटरनल सिक्योरिटी में इनका बड़ा योगदान है। 
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सुप्रीम कोर्ट में कैडर अफसरों से जुड़े दो मामलों की सुनवाई चल रही है। इनमें से एक अवमानना का केस और दूसरा, नए अधिनियम को चुनौती देना, शामिल है। पिछले दिनों अवमानना केस की सुनवाई के दौरान उक्त एक्ट के नोटिफाई नहीं होने की बात उठी थी। सरकारी वकील की तरफ से कहा गया था कि ये तो अप्रैल में ही नोटिफाई हो गया था। सूद के मुताबिक, ऐसा नहीं था कि तब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। वह एक्ट बना था। अब अधिसूचना लागू होने के बाद यह अधिनियम लागू हुआ है। 

अवमानना केस की सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी। उसमें सर्वोच्च अदालत यह फैसला करेगी कि अवमानना केस से जुड़ी कौन सी बातें इस अधिनियम को चैलेंज करने वाली याचिका में शामिल नहीं हैं। उसके बाद ही तय होगा कि दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ होगी या अलग केस रहेगा। कैडर रिव्यू, सर्विस रूल्स और एनएफएफयू जैसे मुद्दे, 'सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026' में नहीं हैं। पूर्व एडीजी ने कहा, ऐसे में नहीं लगता कि सर्वोच्च अदालत इन दोनों केसों का विलय करेगी। हालांकि सरकार का प्रयास है कि सर्वोच्च न्यायालय, दोनों केसों की सुनवाई एक साथ करे। 

सर्वोच्च न्यायालय ने 23 मई 2025 को संजय प्रकाश एवं अन्य बनाम भारत सरकार मामले में एक ऐतिहासिक निर्णय दिया गया था। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने सीएपीएफ के ग्रुप 'ए' कार्यपालक संवर्ग को संगठित ग्रुप 'ए' सेवा (ओजीएएस) घोषित करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। उनमें आईजी लेवल तक आईपीएस प्रतिनियुक्ति में चरणबद्ध तरीके से कमी लाना, ताकि संवर्ग अधिकारियों को स्वाभाविक पदोन्नति का अवसर मिल सके। नियमित कैडर समीक्षा हो, नए सेवा नियमों का निर्माण तथा नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (एनएफएफयू) लागू कर दीर्घकालीन पदोन्नति ठहराव को दूर करना शामिल था। केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ संसद में 'सीएपीएफ (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) अधिनियम, 2026' पारित करा दिया। इस बाबत पूर्व कैडर अफसरों, मौजूदा अधिकारियों और विपक्षी दलों का पुरजोर विरोध देखने को मिला था। कैडर अफसरों के पास सुप्रीम कोर्ट में उक्त विधेयक को चुनौती देने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा था। 

सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दो साल में आईजी लेवल तक आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को कम किया जाए। दूसरी तरफ सरकार ने सीएपीएफ में आईपीएस लगाने की रफ्तार बढ़ा दी। केंद्रीय बलों में 46 से ज्यादा आईपीएस प्रतिनियुक्ति पर आ गए। केंद्र सरकार ने बाकायदा यह ब्यौरा सुप्रीम कोर्ट में भी दिया है। स्वतंत्र भारत के विधिक इतिहास में इसे एक अभूतपूर्व घटनाक्रम कहा जाएगा कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लगभग तीन हजार कैडर अफसरों ने सीएपीएफ (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) अधिनियम, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इन कैडर अफसरों में शौर्य चक्र विजेताओं के अलावा महिला अधिकारी भी शामिल हैं। 


पूर्व कैडर अफसरों का कहना है कि इस अधिनियम के माध्यम से सीएपीएफ में आईजी तथा उससे ऊपर के पदों पर आईपीएस प्रतिनियुक्ति को न्यूनतम प्रतिशत के साथ वैधानिक संरक्षण प्रदान किया गया है। साथ ही, सेवा संबंधी मामलों में गृह मंत्रालय को व्यापक एवं सर्वोपरि अधिकार दिए गए हैं, जिससे सीएपीएफ की स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। एचआर सिंह का कहना है कि सरकार को सीएपीएफ के कैडर अफसरों के हित, ओपीएस और दूसरे मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। 

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