क्या आरएसएस की काली टोपी को टक्कर दे सकेगी कांग्रेस की सफेद टोपी..
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भाजपा का थिंक टैंक कहे जाने वाले आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, को टक्कर देने के लिए कांग्रेस पार्टी अपने एक पुराने संगठन को दोबारा से खड़ा कर रही है। सफेद टोपी वाला यह संगठन, जिसे कांग्रेस सेवा दल कहा जाता है, अब काली टोपी वाले आरएसएस को टक्कर देगा। सेवा दल ने अगले तीन साल में 21 लाख सदस्यों को सफेद टोपी पहनाकर काली टोपी की पोल खोलने के लिए मैदान में उतारने का लक्ष्य रखा है। कांग्रेस सेवा दल के मुख्य संगठक लालजी देसाई का दावा है कि हम आरएसएस के सामने फ्रंट फुट पर खेलेंगे। लोगों को बताएंगे कि काले रंग का मतलब गुस्सा, असंतोष व अशांति होता है, जबकि सफेद रंग शांति, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है।
अमर उजाला डॉट कॉम के साथ गुरुवार को एक विशेष बातचीत में लालजी देसाई ने कहा, कांग्रेस सेवा दल आरएसएस से पुराना संगठन है। आजादी की लड़ाई में किस संगठन का कितना योगदान है, देश का बच्चा-बच्चा जानता है। मैं इसे गद्दारों का संगठन कहता हूं। इतिहास ऐसे तथ्यों से भरा पड़ा है। आज यह संगठन देश में भाईचारे को तोड़ रहा है। लोगों के बीच नफरत फैला रहा है। लोगों को आरएसएस की सच्चाई बताने के लिए अब हम खुल कर खेलेंगे। तीन साल के भीतर हर गांव में हमारे पांच-पांच प्रतिनिधि होंगे। यह ठीक है कि राजीव गांधी के बाद कांग्रेस सेवा दल लगभग खत्म सा हो गया था।
सेवा दल का अंतिम अधिवेशन 1984 में पटना के गांधी मैदान में हुआ था। उसके बाद अब इस साल फरवरी में यह अधिवेशन हुआ है। अजमेर में हुए इस अधिवेशन में राहुल गांधी ने साफतौर पर कह दिया कि सेवा दल पार्टी के पीछे नहीं चलेगा। इसकी अपनी एक सोच होगी। यह पार्टी को तो राय देगा ही, बल्कि लोगों के बीच धार्मिक सौहार्द बना रहे, वे कट्टरपंथी विचाधारा से दूर रहें, इस बाबत एक खास मुहिम पर काम करेगा।
एक या दो रंग वाले झंडे लंबा नहीं चलेंगे, मगर तिरंगा लंबा चल सकता है...
देसाई कहते हैं कि हमारी विचारधारा सबको साथ लेकर चलने की है।एक या दो रंग वाले झंडे लंबा नहीं चल सकते, मगर तिरंगा लंबा चलता है, लोग जानते हैं।तिरंगे में धर्मान्धता नहीं है, यहां पूरे देश की बात होती है।आरएसएस और भाजपा, ये अवसरवादी हैं। धर्म और जाति की बात करते हैं।काली टोपी का मकसद सत्ता के लिए लड़ना है, जबकि सफेद टोपी तंत्र के शुद्धिकरण के लिए होती है। ये दोनों संगठन एक्टर और डायरेक्टर की तरह काम करते हैं।
आरएसएस डायरेक्टर की भूमिका में होता है और भाजपा एक्टर की।देसाई के मुताबिक, काली टोपी की तरह संघ की सोच भी काली है।यहां किसी एक-आध अपवाद को छोड़कर उच्च जाति वाले ही विराजमान होते हैं।महिला को कभी मौका नहीं मिलता।दलित और मुसलमान का तो ख्याल ही दिमाग से निकाल दें।आरएसएस की इन बुराईयों से लोगों को अवगत कराने के लिए सेवा दल ने हर गांव में 'दल जगत' न्यूज लैटर भेजना शुरु किया है।सभी गांवों में अंतिम रविवार को तिरंगा फहराया जाएगा।
यह संगठन अब पूरी तरह बदल गया है। पहले इसे कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष से निर्देश लेने पड़ते थे, मगर अब यह स्वयं निर्देशित है। पहले कौन अध्यक्ष होगा और वह कैसे चुना जाएगा, इसका कोई नियम नहीं था। अब अध्यक्ष का अधिकतम कार्यकाल दस साल तय कर दिया गया है। 55 साल से कम आयु वालों को ही अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ऐसा इसलिए कि वह भागदौड़ ज्यादा कर सकेगा। इससे ज्यादा आयु वालों को निर्देशन, मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण का काम सौंपेंगे। पहले इस संगठन में सिफारिश पर नियुक्ति हो जाती थी, लेकिन अब केवल योग्यता और प्रशिक्षण के आधार पर सेवा दल में प्रवेश मिलेगा। अध्यक्ष पद तक पहुंचने के लिए सात पड़ाव पार करने होंगे। जैसे सेवा मंडल में काम करना, जिला स्तर या ब्लॉक स्तर का अनुभव आदि बातें देखी जाएंगी।
इस बार के लोकसभा चुनाव में सेवा दल से प्रशिक्षत सात उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है।यंग ब्रिगेड बनाई गई है।इनकी ड्रेस नेवी ब्लू जींस और सफेद टी-शर्ट रहेगी।1180 ज़िला कांग्रेस हेडक्वार्टर पर यंग ब्रिगेड खड़ी कर दी गई है।कांग्रेस में ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किया जा रहा है। इस काम पर दो सौ से ज्यादा विशेषज्ञ लगे हैं। सेवा दल के न्याय सेवा संगठन, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर अलग अलग विंग गठित की जा रही हैं। गैर-सरकारी संगठन भी सेवा दल का हिस्सा रहेंगे। देसाई ने कहा, हमारा मकसद है कि आगे आने चुनाव में लोगों के मुद्दों पर राजनीतिक दलों का एजेंडा तय हो, न कि दलों की सोच पर वे अपना एजेंडा तय करें।