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दारुल उलूम देवबंद ने कहा, समान नागरिक संहिता किसी कीमत पर मंजूर नहीं
शशांक मिश्र/ देवबंद(सहारनपुर)
Updated Wed, 19 Oct 2016 07:33 PM IST
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तीन तलाक व समान नागरिक संहिता पर देशभर में मचे बवाल के बीच दारुल उलूम ने इसे दीन धर्म से खिलवाड़ करार दिया। तीन तलाक को धर्म का जरूरी हिस्सा बताते हुए समान नागरिक संहिता को किसी कीमत पर मंजूर करने से इनकार किया और साफ किया इसे लाने के जितने रास्ते होंगे उसे बंद करने की कोशिश की जाएगी। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि इसके लिए पर्सनल लॉ बोर्ड के नेतृत्व में दारुल उलूम सहित सभी जमातें देशभर में अभियान चलाएंगी।
दारुल उलूम के मोहतमिम ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि इस बात पर हम पूरे मुल्क के मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों के दस्तखत इकट्ठा कर रहे हैं। ताकि यह मालूम हो जाए कि जिन्हें इसके लिए खड़ा किया गया है वह एक फीसदी भी नहीं हैं। इस पूरे अभियान में हमारा नेतृत्व मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड कर रहा है। नोमानी ने इस पूरे मामले में सरकार को भी आड़े हाथ लिया और इसे सरकार के मेनिफेस्टो का हिस्सा करार दिया। उन्होंने कहा कि जहां तक इस्लाम में औरतों के हक की बात है जितना सम्मान इस्लाम धर्म में औरतों को है उतना शायद किसी धर्म में नहीं है। यहां विरासत में हिस्सा दिया जाता है।
धार्मिक चीजों के अलावा किसी को कोई ऐतराज नहीं
एक देश एक कानून पर नोमानी ने कहा कि क्रिमिनल कोर्ट के अंदर देश में एक कानून लागू है और सब उसे मानते हैं। धार्मिक चीजों के अलावा किसी को कोई ऐतराज नहीं है। भारत में बहुत से धर्म और जाति के लोग रहते हैं और हर एक का अपना सिविल कोर्ट है। संविधान में सभी को अपने मजहब को मानने की आजादी दी गई है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अंदर निकाह, तलाक, इद्दत, गोद लेने सहित 14 चीजों को रखा गया है। इसके अलावा जितनी चीजे हैं उस पर अदालत फैसला करती है। इसलिए मुसलमान हर हाल में पाबंद है कि वह अपने मजहब की किताब कुरान की पैरवी करें।
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दारुल उलूम के मोहतमिम ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि इस बात पर हम पूरे मुल्क के मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों के दस्तखत इकट्ठा कर रहे हैं। ताकि यह मालूम हो जाए कि जिन्हें इसके लिए खड़ा किया गया है वह एक फीसदी भी नहीं हैं। इस पूरे अभियान में हमारा नेतृत्व मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड कर रहा है। नोमानी ने इस पूरे मामले में सरकार को भी आड़े हाथ लिया और इसे सरकार के मेनिफेस्टो का हिस्सा करार दिया। उन्होंने कहा कि जहां तक इस्लाम में औरतों के हक की बात है जितना सम्मान इस्लाम धर्म में औरतों को है उतना शायद किसी धर्म में नहीं है। यहां विरासत में हिस्सा दिया जाता है।
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धार्मिक चीजों के अलावा किसी को कोई ऐतराज नहीं
एक देश एक कानून पर नोमानी ने कहा कि क्रिमिनल कोर्ट के अंदर देश में एक कानून लागू है और सब उसे मानते हैं। धार्मिक चीजों के अलावा किसी को कोई ऐतराज नहीं है। भारत में बहुत से धर्म और जाति के लोग रहते हैं और हर एक का अपना सिविल कोर्ट है। संविधान में सभी को अपने मजहब को मानने की आजादी दी गई है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अंदर निकाह, तलाक, इद्दत, गोद लेने सहित 14 चीजों को रखा गया है। इसके अलावा जितनी चीजे हैं उस पर अदालत फैसला करती है। इसलिए मुसलमान हर हाल में पाबंद है कि वह अपने मजहब की किताब कुरान की पैरवी करें।
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मुस्लिम मुल्कों में तीन तलाक का चलन खत्म होने की बात प्रोपेगंडा
नोमानी कहते हैं कि कई मुस्लिम मुल्कों में तीन तलाक का चलन खत्म होने की बात एक प्रोपेगंडा है। पहली बात तो ये कि वे कौन से मुल्क हैं। दूसरा उसका प्रूफ क्या है। सबसे बड़े मुस्लिम देश सऊदी अरब की धार्मिक कमेटी ने मीटिंग करके फैसला कर दिया है कि तीन तलाक दिए जाएंगे तो तीन होंगे।
जब बात न बने तभी तीन तलाक
हमारी समाज सुधार की जो मीटिंग होती है उसमें समझाया जाता है कि शादी विवाह का बंधन जीवन का बहुत बड़ा आधार है। इसको तोड़ना बहुत बड़ी मूर्खता है और बिल्कुल निर्वाह न हो सके तो इस्लाम के अंदर तरकीब है। यह सबसे आखिरी काम है कि तीन तलाक दिया जाए। लेकिन इसके बावजूद अगर कोई बेवकूफी करता है तो वह माना जाएगा। इसको लेकर हव्वा खड़ा किया गया है।
समान नागरिक संहिता और तीन तलाक आपस में जुड़े हैं
समान नागरिक संहिता और तीन तलाक को आपस में जोड़कर पर्सनल लॉ बोर्ड पर सियासत करने के आरोप पर नोमानी ने कहा कि यह एकदम अलग नहीं है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अंदर 14 चीजें हैं। हम दोनों की एक साथ मुखालफत कर रहे हैं। चूंकि तीन तलाक का मसला कोर्ट में है। वहां हलफनामा दाखिल हुआ है वहां बहस होगी। समान नागरिक संहिता का प्रोफार्मा का विरोध मैदान में कर रहे हैं। चाहे दोनों को एक करें या अलग इसमें सियासत क्या है।
जब बात न बने तभी तीन तलाक
हमारी समाज सुधार की जो मीटिंग होती है उसमें समझाया जाता है कि शादी विवाह का बंधन जीवन का बहुत बड़ा आधार है। इसको तोड़ना बहुत बड़ी मूर्खता है और बिल्कुल निर्वाह न हो सके तो इस्लाम के अंदर तरकीब है। यह सबसे आखिरी काम है कि तीन तलाक दिया जाए। लेकिन इसके बावजूद अगर कोई बेवकूफी करता है तो वह माना जाएगा। इसको लेकर हव्वा खड़ा किया गया है।
समान नागरिक संहिता और तीन तलाक आपस में जुड़े हैं
समान नागरिक संहिता और तीन तलाक को आपस में जोड़कर पर्सनल लॉ बोर्ड पर सियासत करने के आरोप पर नोमानी ने कहा कि यह एकदम अलग नहीं है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अंदर 14 चीजें हैं। हम दोनों की एक साथ मुखालफत कर रहे हैं। चूंकि तीन तलाक का मसला कोर्ट में है। वहां हलफनामा दाखिल हुआ है वहां बहस होगी। समान नागरिक संहिता का प्रोफार्मा का विरोध मैदान में कर रहे हैं। चाहे दोनों को एक करें या अलग इसमें सियासत क्या है।