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Waqf: 'केवल दुर्लभतम मामलों में ही रोक लगाई जा सकती', जानें वक्फ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

Mon, 15 Sep 2025 03:44 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Mon, 15 Sep 2025 03:44 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि इसके कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई है। आइए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें...।

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'Can be banned only rare cases', know the important things about the Supreme Court's decision regarding Waqf
वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कानून पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कानून पर केवल दुर्लभतम मामलों में ही रोक लगाई जा सकती है। हमने माना है कि अनुमान हमेशा कानून की सांविधानिकता के पक्ष में होता है। हालांकि कोर्ट ने कानून से जुड़े कुछ अहम प्रावधानों पर रोक लगा दी है। आइए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें...। 
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  • मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अगुवाई वाली पीठ ने संपूर्ण वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
     
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे संपूर्ण कानून के प्रावधानों पर रोक लगाने का कोई मामला नहीं मिला।
     
  • धारा 3(1)(आर) में प्रावधान है कि केवल कम से कम पांच वर्षों तक इस्लाम का पालन करने वाला व्यक्ति ही वक्फ बना सकता है। कोर्ट ने इस प्रावधान पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक राज्य सरकार द्वारा यह निर्धारित करने के लिए नियम नहीं बना लिए जाते कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं, इसका सत्यापन कैसे किया जाएगा?
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  • सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संपत्ति जांच प्रावधानों पर रोक लगा दी। इसके तहत किसी संपत्ति को केवल नामित अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर गैर-वक्फ नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल ऐसी रिपोर्टों के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड और बोर्ड रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जाएगा।
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  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वक्फ को उनकी संपत्तियों से बेदखल नहीं किया जाएगा और न ही आधिकारिक रिकॉर्ड में प्रविष्टियों को तब तक बदला जाएगा जब तक कि शीर्षक विवाद का अंतिम निर्णय धारा 83 के तहत वक्फ न्यायाधिकरण द्वारा नहीं कर लिया जाता। ऐसी कार्यवाही के दौरान उन संपत्तियों के संबंध में किसी तीसरे पक्ष के अधिकार का सृजन नहीं किया जा सकता।
     
  • शीर्ष अदालत ने राज्य वक्फ बोर्डों और केन्द्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिमों के प्रतिनिधित्व पर सीमा लगा दी। केंद्रीय वक्फ परिषद के 22 सदस्यों में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं। 11 सदस्यीय राज्य वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं।
     
  • सर्वोच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड के सीईओ के मुद्दे पर विचार किया तथा धारा 23 पर रोक नहीं लगाई, जो सीईओ की पदेन सचिव के रूप में नियुक्ति से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि जहां तक संभव हो, सीईओ की नियुक्ति मुस्लिम समुदाय से की जानी चाहिए।
     
  • उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ये निर्देश अंतरिम प्रकृति के हैं और अंतिम चरण में संशोधित प्रावधानों की सांविधानिक वैधता पर बहस या निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगे।
22 मई को सुरक्षित रख लिया था फैसला
सभी मुद्दे वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उठे थे। चीफ जस्टिस (सीजेआई) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने 22 मई को इन तीनों पर दोनों पक्षों की दलीलों को सुना था, जिसके बाद अंतरिम अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया गया था।


पांच अप्रैल को राष्ट्रपति ने दी थी मंजूरी
केंद्र सरकार ने आठ अप्रैल को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित किया था। इससे पहले पांच अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अधिनियम को मंजूरी दी थी। लोकसभा और राज्यसभा ने क्रमशः तीन और चार अप्रैल को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित किया था।

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