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कलकत्ता हाईकोर्ट: केंद्र के खिलाफ कड़ी टिप्पणी- पूर्व मुख्य सचिव के मामले में पूर्वाग्रह की बू आ रही है
Sat, 30 Oct 2021 03:34 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, कोलकाता।
एजेंसी, कोलकाता।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 30 Oct 2021 03:34 AM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इस साल 28 मई को चक्रवात ‘यास’ को लेकर हुई बैठक में बंगाल के मुख्य सचिव रहते हुए भी अलपन के शामिल नहीं होने पर केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू की थी।
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Calcutta High Court
- फोटो : www.calcuttahighcourt.gov.in
विस्तार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय की याचिका पर शुक्रवार को केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की। पूर्व अधिकारी ने अपने खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की कोलकाता बेंच में चुनौती दी थी, जिसे सुनवाई के लिए दिल्ली बेंच में ट्रांसफर कर दिया गया था।
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अलपन ने अपने केस के इस तरह कोलकाता से दिल्ली ट्रांसफर किए जाने को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती थी। इसी मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और रबिंद्रनाथ सामंत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई पूरी प्रक्रिया से पूर्वाग्रह की बू आ रही है। इसके साथ ही पीठ ने केस को ट्रांसफर करने के कैट के आदेश को रद्द कर दिया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इस साल 28 मई को चक्रवात ‘यास’ को लेकर हुई बैठक में बंगाल के मुख्य सचिव रहते हुए भी अलपन के शामिल नहीं होने पर केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू की थी।
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बाद में उन्हें दिल्ली में डीओपीटी में रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें रिलीव करने से मना कर दिया। इस बीच 31 मई को बंदोपाध्याय रिटायर हो गए। लेकिन डीओपीटी ने उनके खिलाफ कार्यवाही जारी रखी जिसके कारण उन्हें रिटायरमेंट से जुड़े लाभ नहीं मिल पाए।
अलपन ने डीओपीटी की कार्रवाई को कैट के कोलकाता पीठ में चुनौती दी मगर बाद में केंद्र सरकार के अनुरोध कैट ने 21 अक्तूबर को इस मामले को कैट के दिल्ली स्थिति प्रिंसिपल बेंच में ट्रांसफर कर दिया और अलपन को निर्देश दिया गया कि वो 22 अक्तूबर को दिल्ली में बेंच के सामने पेश हों। अलपन ने इस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी।
जस्टिस भट्टाचार्य और सामंत ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि प्रिंसिपल बेंच बिना मामले को देखे ही आश्चर्यजनक रूप से ये आभास कर लिया कि मामले से जुड़े अधिकांश गवाह और सुबूत दिल्ली में हैं। जबकि केस के दाखिल होने से पहले जजों की पीठ के लिए आने वाले गवाहों और सुबूतों के बारे में जानना असंभव है। पीठ ने केस ट्रांसफर के आदेश को खारिज करते हुए कैट की कोलकाता बेंच को इस मामले का जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया।