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कलकत्ता हाईकोर्ट: महिलाओं और ट्रांसजेंडरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बताए उपाय
Fri, 23 Jul 2021 11:05 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 23 Jul 2021 11:05 PM IST
सार
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्ता में महिलाओं और ट्रांसजेंडरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट नवे शुक्रवार को कुछ उपाय प्रस्तावित किए। इनमें बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे कदम शामिल हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
विस्तार
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 12 अगस्त तय की है। अदालत ने केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन को इस मुद्दे पर अपने विचार और प्रस्ताव 12 अगस्त तक व्यक्त करने का निर्देश दिया है।
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खंडपीठ में शामिल रहे न्यायाधीश अरिजीत बनर्जी ने कहा कि समाज में महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के प्रति समाज के एक वर्ग की मानसिकता को भी बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस मानसिकता को बदलने की शुरुआत स्कूली शिक्षा स्तर से होनी चाहिए।
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सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए राज्य में हर बस में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा सकते हैं।
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इसके साथ ही अदालत ने सभी बसों और बस स्टॉप पर हेल्पलाइप नंबरों को प्रदर्शित करने का सुझाव दिया। अदालत ने कहा कि ट्रांसजेंडर लोगों के लिए समर्पित एक खास हेल्पलाइन भी शुरू की जा सकती है। यह कदम इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।