सारदा चिटफंड घोटाला : कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरोपी देबजानी मुखर्जी को दी जमानत
सारदा चिटफंड घोटाले की शुरुआत वर्ष 2000 में शुरू हुई। उद्योगपति सुदीप्तो सेन ने इस ग्रुप की स्थापना की। सुदीप्तो ने इस ग्रुप के तहत 4-5 प्रमुख कंपनियों के अलावा 239 कंपनियां बनाईं। इन स्कीमों के जरिए जमाकर्ताओं को बताया गया कि उनको निवेश के बदले 25 गुना ज्यादा रिटर्न मिलेगा और इस लोभ में भोली भाली जनता आ गई फिर सभी ने निवेश शुरू कर दिया। लेकिन जब जनता ने अपने पैसे मांगे तो कंपनी देने से मुकर गई।
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सारदा चिटफंड घोटाले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल देबजानी मुखर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल व न्यायाधीश अरिजीत मुखर्जी की पीठ ने देबजानी को सशर्त जमानत दी है। इसके तहत आरोपी देबजानी का जिस थाना क्षेत्र में घर है वहां से वह बाहर नहीं जा सकती है। उसे सप्ताह में एक बार सीबीआइ के जांचकर्ता अधिकारी के समक्ष हाजिरी लगानी होगी। जेल के बाहर रहते हुए किसी भी गवाह से संपर्क या बात भी नहीं कर सकती।
फरारी के बाद कश्मीर से हुई थी गिरफ्तार
2013 में सारदा चिटफंड घोटाला सामने आने के बाद मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन के साथ देबजानी कोलकाता से फरार हो गई थी। इसके बाद बंगाल पुलिस की विशेष जांच दल ने सुदीप्त व देबजानी को कश्मीर से गिरफ्तार किया था।
क्या है सारदा चिटफंड घोटाला
सारदा चिटफंड घोटाले की शुरुआत वर्ष 2000 में शुरू हुई। उद्योगपति सुदीप्तो सेन ने इस ग्रुप की स्थापना की। सुदीप्तो ने इस ग्रुप के तहत 4-5 प्रमुख कंपनियों के अलावा 239 कंपनियां बनाईं। इन कंपनियों ने तीन तरह की स्कीमें चलाईं जिसके तहत ये फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट स्कीम थी। इन स्कीमों के जरिए जमाकर्ताओं को बताया गया कि उनको निवेश के बदले 25 गुना ज्यादा रिटर्न मिलेगा और इस लोभ में भोली भाली जनता आ गई फिर सभी ने निवेश शुरू कर दिया। लेकिन जब जनता ने अपने पैसे मांगे तो कंपनी देने से मुकर गई।
West Bengal: Calcutta High Court grants bail to Debjani Mukherjee in Saradha chit fund scam
— ANI (@ANI) June 19, 2021