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West Bengal: दुष्कर्म पीड़िता का गर्भपात कराने पर हाईकोर्ट नाराज, चिकित्सकों से मांगा स्पष्टीकरण

Sat, 03 Feb 2024 07:08 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: आदर्श शर्मा Updated Sat, 03 Feb 2024 07:08 PM IST
सार

दुष्कर्म पीड़िता का गर्भपात करने के मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने मामले पर चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने कहा कि हमनें इसके लिए अनुमति नहीं दी थी। 

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Calcutta HC seeks explanation of doctors who carried out medical termination of pregnancy of victim
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

चिकित्सकों द्वारा दुष्कर्म की पीड़िता का गर्भपात करने के मामले पर कलकता हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने कहा कि केवल मेडिकल बोर्ड गठित करने के आदेश के बावजूद ऐसा क्यों किया गया। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दायर एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्भावस्था को पहले ही खत्म कर दिया गया है।
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हमने नहीं दी थी कोई गर्भपात की अनुमति- कोर्ट
कोर्ट में न्यायाधीश ने कहा कि अदालत ने गर्भापात कराने की अनुमति नहीं दी थी, बल्कि केवल इस पर रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों की ओर से की गई यह कार्रवाई अतिशयोक्ति है। कोर्ट ने इस मामले में संबंधित चिकित्सकों को स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अदालत के बिना आदेश के इतनी जल्दबाजी में गर्भपात क्यों किया गया है। गौरतलब है कि अदालत ने निर्देश दिया कि नौ फरवरी को उसके सामने दाखिल की जाने वाली रिपोर्ट में बताया जाएगा कि क्या ऐसी कार्रवाई का कोई कारण था। 
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सिर्फ मेडिकल बोर्ड बनाने के दिए थे निर्देश- कोर्ट
बता दें मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 29 जनवरी को पश्चिम बंगाल सरकार को एक मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया था। जिसमें कहा था कि दुष्कर्म की पीड़िता की स्थिति की स्वास्थ्य करेगी। निर्देश दिया था कि मेडिकल बोर्ड में कम से कम दो सदस्य शामिल होंगे, जिनमें से दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छी तरह से स्थापित चिकित्सक होने चाहिए। उनमें से एक स्त्री रोग विज्ञान के क्षेत्र से और दूसरा बाल चिकित्सा के क्षेत्र से होना चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष कहा था कि वह गंभीर मानसिक आघात झेल रही है और ऐसे में अदालत गर्भावस्था के चिकित्सीय समापन की अनुमति दे सकती है, जो 20 से 24 सप्ताह के बीच बताई गई है।
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