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CAG: कैग ने महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन की कमी पर जताई चिंता, कहा- खाली पदों को जल्द भरें

Sat, 21 Dec 2024 03:21 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: काव्या मिश्रा Updated Sat, 21 Dec 2024 03:21 PM IST
सार

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने कहा कि बड़ी आबादी को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए एक मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। 
 

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CAG report: Shortage of manpower at every level of health care institutions in Maharashtra
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक - फोटो : संवाद

विस्तार

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग के तहत स्वास्थ्य संस्थानों में हर स्तर पर मानव संसाधन की कमी और बुनियादी ढांचे पर बोझ बढ़ने की समस्या को लेकर भारतीय लेखा महानियंत्रक (CAG) की रिपोर्ट में चिंता व्यक्त की गई है। यह रिपोर्ट शनिवार को महाराष्ट्र विधानसभा में पेश की गई।

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बुनियादी ढांचे और सेवाओं की आवश्यकता
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने कहा कि बड़ी आबादी को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए एक मजबूत स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे और सेवाओं की आवश्यकता होती है। 
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किस पद पर कितनी फीसदी कमी?
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी 22 फीसदी, 35 फीसदी और 29 फीसदी है। महिलाओं के अस्पतालों में यह कमी क्रमश: 23 फीसदी, 19 फीसदी और 16 फीसदी है। जबकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी 42 फीसदी तक पहुंच गई है।
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कैग ने बताया कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में डॉक्टरों की कुल कमी 27 फीसदी, नर्सों की 35 फीसदी और पैरामेडिकल स्टाफ की 31 फीसदी है। रिपोर्ट में क्षेत्रीय असमानता और एयुष कॉलेजों और अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी की भी बात कही गई है। इसी तरह, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा एवं औषधि विभाग के तहत ट्रॉमा केयर सेंटर में रिक्तियां क्रमशः 23  फीसदी और 44 फीसदी थीं।

अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं अपर्याप्त
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बुनियादी ढांचे की कमी के कारण अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं अपर्याप्त हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां 93 फीसदी अस्पतालों में एक ही पंजीकरण काउंटर है, जबकि आईपीएचएस के अनुसार दो काउंटर होने चाहिए थे। इसके अलावा, अस्पतालों में विशेष ओपीडी सेवाएं और रेडियोलॉजी जैसी सेवाएं भी कई जिलों में उपलब्ध नहीं हैं। 36 स्वास्थ्य संस्थानों में अग्नि सुरक्षा और संरचनात्मक ऑडिट की सिफारिशों का पालन नहीं किया गया, जिससे मरीजों और कर्मचारियों की जान को खतरा था।

कैग ने कहा कि आयुष कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पद क्रमशः 21 प्रतिशत, 57 प्रतिशत और 55 प्रतिशत हैं। स्वास्थ्य विभाग के तहत डॉक्टरों की स्वीकृत संख्या भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों (आईपीएचएस), 2012 के अनुसार आवश्यकता से 17 प्रतिशत कम है। 

खाली पदों को शीघ्र भरने का दिया सुझाव
कैग ने सरकार से स्वास्थ्य क्षेत्र में खाली पदों को शीघ्र भरने और बुनियादी ढांचे की योजनाओं को पूरा करने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दवाइयों और उपकरणों की आपूर्ति में भी कई समस्याएं हैं, जैसे कि कई जरूरी उपकरणों की आपूर्ति नहीं होना और दवाइयों का गलत तरीके से भंडारण।


अधर में लटका अमरावती अस्पताल
लेखापरीक्षा में पाया गया कि मास्टर प्लान (जनवरी 2013 और जून 2014) के अनुसार नए स्वास्थ्य सेवा संस्थानों के निर्माण का 70 फीसदी कार्य और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों के उन्नयन का 90 फीसदी कार्य सितंबर 2022 तक पूरा नहीं हुआ। इसमें कहा गया कि जून 2015 में 31.91 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (चरण II), अमरावती तीन वर्षों से अधिक समय से अधर में लटका है। इसके अलावा, मास्टर प्लान में शामिल 433 कार्य भूमि की अनुपलब्धता के कारण शुरू नहीं हो सके।

 

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