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Cabinet Reshuffle: ज्यूडिशियरी को निशाने पर लेने के चलते हटाए गए रिजिजू? मेघवाल के प्रमोशन से साधा राजस्थान

Thu, 18 May 2023 05:54 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Thu, 18 May 2023 05:54 PM IST
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सार
Cabinet reshuffle: किरेन रिजिजू के बारे में यही कहा जाता रहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम सिस्टम को लेकर सार्वजनिक मंचों पर अपनी राय जाहिर कर चुके थे। हाल में ही आयोजित हुए कार्यक्रम में पूर्व कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कॉलेजियम सिस्टम पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा था कि कॉलेजियम में उन्हीं के बारे में चर्चा होती है, जिन्हें जज जानते हैं...
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Cabinet reshuffle: Arjun Ram Meghwal replaces Kiren Rijiju as law minister
Cabinet reshuffle: Kiren Rijiju - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

किरेन रिजिजू को कानून मंत्री के पद से हटाए जाने को लेकर सियासत गरमा गई है। कहा यह जा रहा है कि पूर्व कानून मंत्री किरेन रिजिजू ज्यूडिशियरी पर न सिर्फ निशाना साध लेते थे, बल्कि कॉलेजियम सिस्टम से लेकर तमाम अन्य मामलों पर खुलकर अपनी राय भी रखते थे। हाल में ही एक कार्यक्रम में कानून मंत्री ने 'अंकल जज सिंड्रोम' कहकर न्यायपालिका के कॉलेजियम सिस्टम पर सीधा निशाना साधा था। वहीं इस बड़े बदलाव के बीच में कहा यह भी जा रहा है कि अगले कुछ महीने में होने वाले राजस्थान के विधानसभा चुनावों से पहले ही राजस्थान के दलित नेता अर्जुन राम मेघवाल को कानून मंत्री बनाकर भाजपा ने राजस्थान के सियासी समीकरणों को भी साधने की भरपूर कोशिश की है।



इस पूरे मामले में सियासी तौर पर एक दूसरा पहलू भी खंगाला जा रहा है। माना यही जा रहा है कि किरेन रिजिजू की जगह पर राजस्थान के दलित मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को यह मंत्रालय देकर राजस्थान की सियासत को साधने की भाजपा ने बड़ी कोशिश की है। राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रमन वत्स कहते हैं कि केंद्र ने किरेन रिजिजू को किस लिए हटाया, यह तो पार्टी ज्यादा बेहतर समझेगी। लेकिन अर्जुन राम मेघवाल को कानून मंत्री बनाकर पार्टी ने राजस्थान को यह जरूर संदेश देने की कोशिश की है कि उनके राज्य के एक बड़े दलित चेहरे को बड़ा पोर्टफोलियो दिया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगले कुछ महीने में राजस्थान में चुनाव होने हैं और अर्जुन मेघवाल को बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी ने सियासी तौर पर इसका फायदा भी उठाने की पूरी रणनीति बना ली है।


यह भी पढ़ें: किरेन रिजिजू से कानून मंत्रालय क्यों लिया गया: जजों से लड़ाई या कुछ और? तीन बिंदुओं में समझें सबकुछ

गुरुवार सुबह सियासी गलियारों में कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर चर्चाएं हो रही थीं, तभी अचानक केंद्रीय कानून मंत्री रिजिजू के हटाए जाने का आदेश जारी हो गया। केंद्र सरकार के इस फैसले से चर्चा इस बात की होने लगी कि नार्थ-ईस्ट के बड़े नेता और मोदी कैबिनेट के चहेते मंत्री किरन रिजिजू को अचानक कानून मंत्रालय से क्यों हटा दिया गया। सियासी गलियारों में इसके मायने सीधे तौर पर यही निकाले जा रहे हैं कि पूर्व कानून मंत्री लगातार न्यायपालिका पर हमलावर रहते थे। न्याय पालिका और केंद्र सरकार के बीच कोई टकराव की स्थिति न बने इसलिए यह बड़ा बदलाव किए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।

पूर्व कानून मंत्री के कानून मंत्रालय संभालने के बाद भी न्यायपालिका से अनबन बनी ही रहती थी। सार्वजनिक मंचों से लेकर कई कार्यक्रमों में किरेन रिजिजू लगातार न्यायपालिका और पूर्व जजों के ऊपर अपनी खुलकर राय रखते थे। सूत्रों का कहना है कि इस तरह के माहौल में न्यायपालिका और कानून मंत्रालय के बीच में विवाद की स्थितियां उत्पन्न हो रही थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के जज कई बार इन्हीं जगह सार्वजनिक मंचों पर बातचीत या भाषण के दौरान बहुत सहज नहीं दिखे।

हालांकि किरेन रिजिजू के बारे में यही कहा जाता रहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम सिस्टम को लेकर सार्वजनिक मंचों पर अपनी राय जाहिर कर चुके थे। हाल में ही आयोजित हुए कार्यक्रम में पूर्व कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कॉलेजियम सिस्टम पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा था कि कॉलेजियम में उन्हीं के बारे में चर्चा होती है, जिन्हें जज जानते हैं। जिसको कॉलेजियम के लोग नहीं जानते हैं उनकी चर्चा नहीं होती है। इस दौरान पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने 'अंकल जज सिंड्रोम' का जिक्र भी किया था। उन्होंने कहा था कि अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जो जज बन गया है, तो आपका कॉलेजियम सिस्टम से जज बनने का रास्ता साफ हो जाता है। किरेन रिजिजू ने कॉलेजियम सिस्टम को निशाने पर लेते हुए कहा था कि अगर आप किसी अच्छे जज या प्रभावशाली जज को नहीं जानते हैं, भले ही आप कितने अच्छे वकील हो, तो आपका नाम की जज के तौर पर सिफारिश थोड़ी मुश्किल होगी।

यह भी पढ़ें: Kiren Rijiju: कॉलेजियम व्यवस्था के विरोध में लगातार बयान दे रहे थे किरेन रिजिजू, जानें क्या-क्या कहा

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इससे पहले भी कई कानून मंत्री रहे, लेकिन वह इतना मुखर होकर न्यायपालिका का विरोध नहीं करते थे। लेकिन किरेन रिजिजू इस मामले में ज्यादा मुखर होकर अपनी मंशा सार्वजनिक मंचों से व्यक्त की। हालांकि इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुमित वर्मा कहते हैं कि किरेन रिजिजू को मंत्रालय से हटाया जाने का मतलब उनका कोई डिमोशन नहीं है। वह कहते हैं कि बतौर कानून मंत्री रहते हुए किरेन रिजिजू ने देश के सभी राज्यों में बेहतरीन काम किया है। उनका तर्क है कि किरन रिजिजू इससे पहले जिन मंत्रालय में रहे, वहां पर भी उनका परफॉर्मेंस सबसे अच्छा था। सुमित वर्मा कहते हैं रिजीजू नॉर्थ ईस्ट के सबसे बड़े भाजपा के चेहरे हैं। भले ही लोग इस बदलाव के पीछे ज्यूडिशियरी से टकराव की बात करें लेकिन हकीकत में रिजिजू को अर्थ साइंस मंत्रालय देकर एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

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