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नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 4जी टावर को कैबिनेट की मंजूरी, दस राज्यों में जल्द होगा काम शुरू

Thu, 24 May 2018 01:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 24 May 2018 01:26 AM IST
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Cabinet approves proposal to set up 4,072 mobile towers in Naxal affected areas

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय बलों और पुलिस के जवानों को मजबूत संचार व्यवस्था मुहैया कराने की मंजूरी प्रदान कर दी। इसमें उत्तर प्रदेश समेत दस राज्यों के प्रभावित क्षेत्रों में 4जी कनेक्शन मोबाइल सेवा दुरुस्त की जाएगी। जिसके लिए कुल 4072 स्थानों पर टावर स्थापित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में नक्सल प्रभावित इलाकों में टावर स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। 

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यह सिफारिश गृह मंत्रालय ने नक्सल से प्रभावित क्षेत्रों में दूरसंचार व्यवस्था को पुख्ता करने के मद्देनजर की थी। इसके बाद दूरसंचार मंत्रालय ने 4072 स्थानों पर टावर लगाने के तकनीकी पहलुओं का अध्ययन कर कैबिनेट को प्रस्ताव भेजा था। मंत्रालय ने 10 राज्यों के 96 जिलों को चिन्हित कर रूपरेखा तैयार की। दरअसल इन क्षेत्रों में बीएसएनएल के पास 4जी का स्पेक्ट्रम नहीं है। ऐसे में विभिन्न हिस्सेदारों को साथ लेकर सरकार दूसरे चरण में 4जी कनेक्शन परियोजना को लागू करेगी। 
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इस परियोजना में कुल 7330 करोड़ रुपये खर्च आएगा। दूरसंचार मंत्रालय को इस परियोजना में कैबिनेट की मंजूरी की अनिसवार्यता खर्च के मद्देनजर थी। क्योंकि पूरा खर्च यूनिवर्सल सर्विसेज ऑब्लिगेशन फंड (यूएसएफओ) से किया जाना है। इस कोष का निर्धारण अप्रैल 2002 में इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के तहत किया गया था। याद रहे कि पहले चरण अगस्त, 2014 में कैबिनेट ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 2199 टावर लगाने की मंजूरी दी थी। हालांकि वह परियोजना 4जी कनेक्टिविटी की नहीं थी। 
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सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने नक्सल प्रभावित इलाकों ने 2014 में 3000 अपने टावर स्थापित किए थे। गौरतलब है कि उससे पहले सुकमा में नक्सलियों के हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए थे। 


संचार पुख्ता होने से मिलेगी केंद्रीय बलों को मदद- प्रकाश सिंह

बीएसएफ के पूर्व डीजीपी और आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञ प्रकाश सिंह के मुताबिक संचार माध्यम पुख्ता होने से केंद्रीय बलों के जवानों को बड़ी सहायता मिलेगी। उनके द्वारा वायरलेस का उपयोग किया जाता है, लेकिन वन क्षेत्रों और दूरी ज्यादा होने पर कई बार संपर्क टूट जाता है। ऐसे में संचार माध्यम के पुख्ता होने का फायदा सीधे तौर पर उन्हें मिलेगा। कैबिनेट का फैसला सराहनीय है।

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