CAA Rules Notification: क्या सीएए खोलेगा BJP के लिए 400 सीटें जीतने की राह? विपक्ष के लिए कितना होगा मुश्किल?
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के तमाम नेता लगातार लोकसभा चुनाव 2024 में 400 से अधिक सीटें लाने की बात कर रहे थे। तमाम राजनीतिक विश्लेषक यह तो मान रहे थे कि राम मंदिर निर्माण, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और विकास के कार्यों के कारण केंद्र सरकार चुनावों में बढ़त की स्थिति में है और उसे चुनाव में लाभ मिल सकता है, लेकिन चार सौ सीटों की संख्या पार कर पाने को असंभव सा काम माना जा रहा था। लेकिन जिस तरह लोकसभा चुनावों की घोषणा के ठीक पहले नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू किया गया है, माना जा रहा है कि इससे जबरदस्त ध्रुवीकरण हो सकता है और इसका भाजपा को लाभ हो सकता है। अब कई राजनीतिक विश्लेषक यह मानने लगे हैं कि भाजपा अपने लिए 370 और एनडीए के लिए चार सौ सीटों की संख्या को पार कर सकती है।
दरअसल, इसके पहले के चुनाव से ठीक पहले भी केंद्र सरकार ने संविधान की अनुच्छेद 35ए से संबंधित दांव खेला था। बालाकोट एयरस्ट्राइक और 35ए की रोशनी में हुए चुनाव में भाजपा ने रिकॉर्ड 303 सीटें हासिल की थीं। अब लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के ठीक पहले सीएए की घोषणा कर भाजपा ने एक बार फिर अपना ट्रंप कार्ड खेल दिया है। विपक्ष इसकी कोई काट खोज पाएगा, कह पाना मुश्किल है।
कहां होगा सबसे ज्यादा लाभ?
भाजपा उत्तर भारत के राज्यों में पहले ही बहुत मजबूत स्थिति में है। वहां पर उसे इस तरह के किसी समीकरण के बिना भी बेहतर सफलता मिलने की पूरी-पूरी उम्मीद है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में वह सीएए जैसे किसी कानून के बिना भी मजबूत सफलता हासिल करेगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।
भाजपा को बिहार और पश्चिम बंगाल में अभी भी सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। बिहार में तेजस्वी यादव की रैली ने भाजपा की नींद हराम कर दी है, तो पश्चिम बंगाल में तमाम परेशानियों के बाद भी ममता बनर्जी किसी तरह से कमजोर होती दिखाई नहीं पड़ रही हैं। लेकिन सीएए के आने से इन राज्यों के समीकरणों में भी बड़ा बदलाव आ सकता है।
पिछले चुनाव में भाजपा ने बिहार की मुस्लिम बाहुल्य किशनगंज लोकसभा सीट को छोड़कर सभी सीटों पर सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन यदि सीएए का मुस्लिम समुदाय की ओर से बड़ा विरोध होता है, तो इसकी प्रतिक्रिया में हिंदू मतदाताओं में भी देखने को मिल सकती है और वे भाजपा या उसके सहयोगी दलों के पीछे लामबंद हो सकते हैं। इससे तेजस्वी यादव के समीकरण धरे के धरे रह सकते हैं।
पश्चिम बंगाल में बदल सकते हैं समीकरण
सीएए के लागू होने के तुरंत बाद जिस तरह पश्चिम बंगाल में जश्न का माहौल है, उसे देखकर माना जा रहा है कि भाजपा इसका जमकर लाभ उठा सकती है। चूंकि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुस्लिमों को लेकर हिंदू मतदाताओं के बीच कड़ी प्रतिक्रिया देखी जाती है, ठीक चुनाव के समय सीएए के लागू होने से यह विभाजन बढ़ सकता है, जिससे भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है।
संदेशखाली में घटी घटना में आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख स्वयं को खुले तौर पर बांग्लादेशी बताता था। वह बांग्लादेश से आए अवैध मुस्लिम प्रवासियों के रहने-खाने, कमाने और राशन कार्ड और आधार कार्ड तक बनवाने का काम कर रहा था। भाजपा इस मुद्दे को ऐसे अवसर पर और ज्यादा उछालेगी और इससे भी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ेगा।
केरल तक होगा असर
राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने कहा कि सीएए का मुद्दा केवल उत्तर भारतीय राज्यों में ही अपना असर नहीं दिखाएगा। दक्षिण में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में भी भाजपा इस तरह के मुद्दे को लगातार हवा देने का काम करती रही है। यदि सीएए का मुस्लिम वर्ग से विरोध बढ़ता है, तो इसकी प्रतिक्रिया में हिंदुओं के बीच एकजुटता बढ़ सकती है।
धीरेंद्र कुमार ने कहा कि सीएए का कानून केवल लोगों को नागरिकता देने का कानून है। इसमें किसी से नागरिकता छीनने की बात नहीं कही गई है। लेकिन पिछली बार शाहीन बाग में हुए प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए इस बात की पूरी संभावना बढ़ सकती है कि इसे मुस्लिम समाज के विरोध में पेश किया जाए। इससे लोगों में भ्रम और इसका विरोध बढ़ सकता है। लेकिन इसका विरोध जितना ज्यादा होगा, उसका असर और ज्यादा हो सकता है। यानी लोकसभा चुनावों के ठीक पहले सीएए लागू करना भाजपा का सोचा समझा और बहुत बेहतर तरीके से खेला गया कार्ड है। 2024 के चुनाव परिणाम पर भाजपा के संदर्भ में इसका बेहतर असर देखने को मिल सकता है।
देश को तोड़ना चाहती है सरकार- कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता प्रबल प्रताप शाही ने अमर उजाला से कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार इस चुनाव में ठीक 370 सीटें ही लाने की बात क्यों कर रही है, इस पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में बड़े बदलाव के लिए दो तिहाई का बहुमत चाहिए। दो तिहाई की संख्या लगभग 360 के करीब होती है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार जनता से अपने लिए 370 सीटें देने की मांग की है।
प्रबल प्रताप शाही ने आशंका जाहिर की कि यदि सरकार को लोकसभा और राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत प्राप्त होता है, तो वह एससी-एसटी वर्ग के आरक्षण को खत्म कर सकती है। वह कानून में बड़े बदलाव करते हुए किसी वर्ग विशेष को कानूनी अधिकारों से वंचित कर सकती है। उन्होंने कहा कि वे सरकार की तानाशाही के खिलाफ पूरे देश में प्रदर्शन करेंगे। 12 मार्च को जंतर-मंतर पर कांग्रेस की अगुवाई में बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। इसके बाद इस मुद्दे पर जनता को साथ लाने के लिए आंदोलन चलाया जाएगा।