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CAA: तीन देशों के छह प्रवासी समुदायों को मिलेगी नागरिकता, नियम बनाने के लिए MHA को मिला 6 माह का विस्तार

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 10 Jan 2024 01:44 PM IST
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सार
केंद्रीय गृह मंत्रालय को नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के नियमों को तैयार करने के लिए लोकसभा में अधीनस्थ कानून पर संसदीय समिति की तरफ से एक और विस्तार मिला है। पिछले सेवा विस्तार की अवधि 9 जनवरी को खत्म हो गई है। सीएए नियमों के लिए इस बार गृह मंत्रालय को सातवीं बार विस्तार मिला है...
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CAA: Home Ministry has got the seventh extension for CAA rules
CAA - फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt

विस्तार

भारत में 'नागरिकता संशोधन अधिनियम' (सीएए) के नियम जल्द लागू होने जा रहे हैं। इसके लिए सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली गई हैं। नियमों को लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले देश में 'सीएए' के नियम लागू हो जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय को नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के नियमों को तैयार करने के लिए लोकसभा में अधीनस्थ कानून पर संसदीय समिति की तरफ से एक और विस्तार मिला है। पिछले सेवा विस्तार की अवधि 9 जनवरी को खत्म हो गई है। सीएए नियमों के लिए इस बार गृह मंत्रालय को सातवीं बार विस्तार मिला है। इससे पहले राज्यसभा से भी गृह मंत्रालय को उक्त विषय पर नियम बनाने व लागू कराने के लिए 6 महीने का विस्तार मिला था।

गृह मंत्रालय ने होमवर्क पूरा कर लिया है ... 

सूत्रों का कहना है कि संसद में बजट सत्र के दौरान सीएए नियम, दोनों सदनों में रखे जाएंगे। सीएए को लेकर सभी नियम तैयार हैं। जिस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन मांगे जाएंगे, वह प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। पिछले दिनों केंद्र सरकार के विश्वस्त सूत्रों ने बताया था कि देश में लोकसभा चुनाव से पहले 'नागरिकता संशोधन अधिनियम' (सीएए) के नियम लागू हो जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में अपना होमवर्क पूरा कर लिया है। संसद के बजट सत्र के दौरान, दोनों सदनों के पटल पर नियमों को रखने के बाद इन्हें फरवरी में लागू कर दिया जाएगा। नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियमों के तहत भारत के तीन मुस्लिम पड़ोसी देश, जिनमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश शामिल हैं, उन देशों से आए प्रवासी समुदायों के लिए भारत की नागरिकता लेने के नियम आसान हो जाएंगे। इन छह समुदायों में हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी, शामिल हैं। नागरिकता संशोधन विधेयक 11 दिसंबर, 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया था। एक दिन बाद ही इस विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति मिल गई थी। सीएए के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय को मिला सातवीं बार विस्तार

ऐसे अल्पसंख्यक, जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों, उन्हें स्थानीय नागरिकता प्रदान की जाएगी। इससे पहले भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम से कम 11 साल तक भारत में रहना जरूरी था। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के अंतर्गत इस नियम को आसान बनाया गया है। नागरिकता हासिल करने की अवधि को 1 से 6 साल किया गया है। यह कानून, अभी तक इसलिए लागू नहीं हो सका, क्योंकि सीएए के तहत बनाए जा रहे नियमों को अंतिम रूप प्रदान नहीं किया जा सका। राज्यसभा और लोकसभा में अधीनस्थ विधान पर संसदीय समितियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को नियम तैयार करने के लिए सातवीं बार विस्तार दिया है। 2019 में सीएए को लेकर देश में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। कई राजनीतिक दलों ने भी इसका विरोध किया था। उस वक्त केंद्र सरकार इसे लागू करने का मन बना चुकी थी, लेकिन कोरोना के चलते सीएए अधर में लटक गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 200 अधिक जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। इन सबके बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यह कहते रहे कि सीएए हर सूरत में लागू किया जाएगा। कोविड-19 महामारी के कारण इस अधिनियम को लागू करने में देरी हुई है। जो लोग सोचते हैं कि ऐसा नहीं होगा, वे गलत साबित होंगे।

जून 2020 में मिला था सबसे पहला विस्तार

सीएए, किसी व्यक्ति को खुद नागरिकता नहीं देता है। इसके जरिए पात्र व्यक्ति, आवेदन करने के योग्य बनता है। यह कानून उन लोगों पर लागू होगा, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए थे। इसमें प्रवासियों को वह अवधि साबित करनी होगी कि वे इतने समय में भारत में रह चुके हैं। उन्हें यह भी साबित करना होगा कि वे अपने देशों से धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आए हैं। वे लोग उन भाषाओं को बोलते हैं, जो संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हैं। उन्हें नागरिक कानून 1955 की तीसरी सूची की अनिवार्यताओं को भी पूरा करना होगा। इसके बाद ही प्रवासी आवेदन के पात्र होंगे। किसी भी कानून को राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद उसके नियम छह माह के भीतर बनाए जाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो संसदीय समितियों से विस्तार की मांग की जाती है। सीएए नियमों के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को सबसे पहला विस्तार जून 2020 में दिया गया था।

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