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Hindi News ›   India News ›   By the mid of the century 900 million people in world will be victims of starvation

Climate: सदी के मध्य तक दुनिया में 90 करोड़ लोग होंगे भुखमरी के शिकार, प्रभावित हो रहा फसलों का उत्पादन

Sun, 09 Jul 2023 05:30 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 09 Jul 2023 05:30 AM IST
सार

अध्ययन में 1960 से 2014 के बीच अवलोकन और जलवायु मॉडल के आंकड़ों और फिर 2045 से 2099 के अनुमानों को देखा गया। सबसे पहले जेट स्ट्रीम के प्रभाव को देखा गया। जेट स्ट्रीम-हवा की धाराएं हैं, जो दुनिया के कई सबसे महत्वपूर्ण फसल उत्पादक क्षेत्रों में मौसम के पैटर्न को संचालित करती हैं।

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By the mid of the century 900 million people in world will be victims of starvation
Agriculture - फोटो : Istock

विस्तार

एक अध्ययन के मुताबिक दुनिया भर के कई इलाकों में फसल पैदावार के कम होने के खतरों को कम करके आंका गया है। जलवायु परिवर्तन हमारे खाद्य प्रणालियों पर भारी प्रभाव डाल रहा है।

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अध्ययन के अनुसार खाद्य उत्पादन से दुनिया गर्म हो रही है और उत्सर्जन का यह एक प्रमुख स्रोत है। साथ ही इस पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का भारी असर होता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2021 में 82.8 करोड़ से अधिक लोगों को भूख का सामना करना पड़ा और जलवायु परिवर्तन के कारण सदी के मध्य तक यह संख्या आठ करोड़ तक और बढ़ सकती है। यह अध्ययन कोलंबिया यूनिवर्सिटी और जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स के शोधकर्ता और मुख्य अध्ययनकर्ता काई कोर्नह्यूबर की अगुवाई में किया गया है। जलवायु और फसल मॉडल का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि दुनिया के गर्म होने पर इसके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं। अध्ययन में कहा गया है कि फसलों पर असर पड़ने की घटनाओं से कीमतों में बढ़ोतरी, खाद्य असुरक्षा और यहां तक कि लोगों में अशांति फैल सकती है।

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2045 से 2099 तक का लगाया गया अनुमान
अध्ययन में 1960 से 2014 के बीच अवलोकन और जलवायु मॉडल के आंकड़ों और फिर 2045 से 2099 के अनुमानों को देखा गया। सबसे पहले जेट स्ट्रीम के प्रभाव को देखा गया। जेट स्ट्रीम-हवा की धाराएं हैं जो दुनिया के कई सबसे महत्वपूर्ण फसल उत्पादक क्षेत्रों में मौसम के पैटर्न को संचालित करती हैं। बड़ी लहर के आकार में बहने वाली जेट स्ट्रीम के मजबूत घुमाव का उत्तरी अमेरिका, पूर्वी यूरोप और पूर्वी एशिया के प्रमुख कृषि क्षेत्रों पर विशेष रूप से प्रभाव पड़ता है, जिससे उपज में सात प्रतिशत तक की कमी आती है।

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जलवायु परिवर्तन को लेकर चेतावनी है अध्ययन  
अध्ययन में यह भी देखा गया कि कंप्यूटर मॉडल इन खतरों का कितनी अच्छी तरह आकलन करते है और पाया गया कि हालांकि वे जेट स्ट्रीम के वायुमंडलीय गतिविधि को दिखाने में अच्छे हैं। लेकिन वे जमीन पर उत्पन्न होने वाली चरम सीमा की भयावहता को कम कर के आंकते हैं। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक यह अध्ययन खाद्य क्षेत्र पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में हमारी अनिश्चितताओं को लेकर एक चेतावनी देता है, जिसमें अधिक बार और तीव्र चरम मौसम और चरम से जटिल मौसम संबंधी बदलाव शामिल हैं।

खतरों के लिए तैयार रहने की जरूरत  
भविष्य में इस प्रकार के जटिल जलवायु संबंधी खतरों के लिए तैयार रहने की जरूरत है और मौजूदा दौर के मॉडल इसे पकड़ नहीं पाते हैं। अध्ययन में कहा गया है कि भूख और पीड़ा भविष्य के लिए वास्तव में भयानक विनाशकारी चेतावनी है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन की चरम सीमा ने फसलों, पशुधन और महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित किया है।

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