यूपी में गंगा से निकले मिथेन से चलेंगी बसें, राजमार्ग मंत्रालय ने की CM योगी से बात

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Fri, 16 Feb 2018 01:39 AM IST
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Buses will run from methane out of Ganga in Uttar Pradesh

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केंद्र सरकार की योजना पर यदि ढंग से अमल हुआ तो वह दिन दूर नहीं है, जब गंगा नदी से निकले मिथेन गैस से उत्तर प्रदेश में बसें चलेंगी। ऐसा होने पर बस का किराया घटकर आधा हो जाएगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा तैयार की गई इस तरह की योजना पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात हो गई है, जहां से इस पर सहमति मिली है।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस बारे में हो चुकी है बात, राज्य सरकार की सहमति मिली 
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि केंद्र ने उत्तर प्रदेश में मिथेन और इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन से सार्वजनिक परिवहन के साधनों यथा- बस, टैक्सी, ऑटो रिक्शा चलाने की योजना बनाई है। इस बारे में उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात कर ली है और वहां से इस पर हरी झंडी मिल गई है।
गंगा जल से निकाला जाएगा मिथेन

जल संसाधन एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय संभाल रहे गडकरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी आदि शहरों में गंगा का पानी काफी प्रदूषित हो गया है। इसलिए गंगा को स्वच्छ करने के लिए उन्होंने सफाई की 150 परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। इन परियोजनाओं को अंतिम रूप देकर अगले महीने से काम शुरू करने की योजना है। तय किया गया है कि गंगा के पानी को साफ करने के क्रम में गंदे पानी से मिथेन गैस निकाला जाएगा और उससे बस और टैक्सी चलाई जाएगी।

नागपुर में हो चुका है ऐसा प्रयोग

गडकरी ने बताया कि गंदे पानी से मिथेन निकाल कर बस चलाने की योजना कोई नई नहीं है, इसका परीक्षण वह नागपुर में कर चुके हैं। वहां सीवर के पानी से मिथेन गैस निकाला जाता है और उससे शहर में बसें चलती हैं। यही नहीं, वहां तो सीवर के पानी से बिजली भी बनाई जा रही है। सीवर का पानी बेचने से नगर निगम को 18 करोड़ रुपये की आमदनी भी हुई है।

इथेनॉल से भी चलेंगे वाहन

गडकरी के मुताबिक धान, गेहूं या गन्ना काटने के बाद बचे पुआल या अवशेष से इथेनॉल बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। एक टन पुआल से 280 लीटर इथेनॉल बनाया जा सकता है। अब बसों या अन्य मोटर वाहनों में ऐसे फ्लेक्सी इंजन लग चुके हैं, जिन्हें 100 फीसदी इथेनॉल पर चलाया जा सकता है। यही नहीं, इससे ऑटो रिक्शा और बाइक भी चलाया जा सकता है।

वैकल्पिक ईंधन से किराया आधा

मंत्री का कहना है कि इस समय एक लीटर डीजल करीब 60 रुपये का, एक लीटर इथेनॉल 47 रुपये का जबकि ई व्हीकल का एक यूनिट का खर्च आठ से 10 रुपये पड़ रहा है। यदि इन ईंधनों से बस, टैक्सी या ऑटो चले तो किराया घटकर आधा रह जाएगा। नागपुर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां इस तरह से बस चलाने पर किराया घट गया।

ई-मोबिलिटी परियोजना की शुरुआत

गडकरी ने बृहस्पतिवार को यहां केंद्र सरकार की ई-मोबिलिटी योजना की शुरूआत की। इसके तहत सबसे पहले नीति आयोग के कार्यालय परिसर में इलेक्ट्रिक व्हीकल को चार्ज करने वाले स्टेेशन को शुरू किया गया। इस समय नीति आयोग परिसर में पांच चार्जिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जिनमें धीमी गति से चार्ज करने वाली मशीन के साथ साथ तेज गति से चार्ज करने वाला स्टेशन भी बनाया गया है।
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