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Karnataka: कर्नाटक में परिवहन कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल; बस सेवाएं ठप, यात्रियों को हो रही परेशानी

Tue, 05 Aug 2025 09:13 AM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 05 Aug 2025 09:13 AM IST
सार

कर्नाटक में परिवहन कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण यात्रियों को हलकान होना पड़ रहा है। वहीं इस दौरान ऑटो रिक्शा और निजी वाहन चालकर मनमानी किराया वसूल रहे हैं। राज्य में फिलहाल बस सेवाएं लगभग ठप हैं और प्रमुख शहरों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।

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Bus services hit as transport workers begin strike across Karnataka, passengers stranded
कर्नाटक में परिवहन कर्मचारियों की हड़ताल से बस सेवाएं प्रभावित - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक में राज्य सरकार की तरफ से संचालित परिवहन निगमों के कर्मचारियों ने मंगलवार सुबह से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसका असर पूरे राज्य में बस सेवाओं पर पड़ा है और हजारों यात्री बस अड्डों पर फंसे हुए हैं। बता दें कि परिवहन कर्मचारियों की यूनियनों ने कई मांगों को लेकर हड़ताल का एलान किया है, जिसमें मुख्य रूप से 38 महीनों का बकाया वेतन और 1 जनवरी 2024 से वेतन संशोधन की मांग शामिल है।
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हाईकोर्ट ने हड़ताल पर लगाई थी अंतरिम रोक
हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को हड़ताल पर अंतरिम रोक लगाई थी और सरकार और यूनियनों के बीच बातचीत की उम्मीद जताई थी, लेकिन यूनियनों ने इस रोक को नजरअंदाज करते हुए हड़ताल शुरू कर दी।
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बसें डिपो में खड़ी, यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं
राज्य के प्रमुख शहरों जैसे बंगलूरू, मैसूरु, हुब्बली, धारवाड़, बेलगावी, मंगलूरू, कलबुर्गी, शिवमोगा, चित्तदुर्ग, चिकमगलूर, रायचूर समेत कई जगहों पर बस अड्डों में हजारों यात्री फंसे नजर आए। बहुत कम सरकारी बसें ही चल रही हैं, जो हड़ताल शुरू होने से पहले सड़कों पर आ चुकी थीं। कुछ ग्रामीण इलाकों में छात्रों की सुविधा के लिए थोड़ी बहुत बसें चलाई गईं। परिवहन विभाग ने हड़ताल से निपटने के लिए ट्रैनी ड्राइवरों को भी बसें चलाने की जिम्मेदारी दी है।



प्राइवेट गाड़ियों की मनमानी
सरकारी बसें बंद होने के कारण प्राइवेट बस ऑपरेटर, कैब सेवा और ऑटो रिक्शा चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। बंगलूरू में कई यात्रियों ने शिकायत की कि ऑटो वाले सामान्य किराए से दोगुना या तिगुना पैसा मांग रहे हैं।


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सरकार-यूनियन के बीच बातचीत विफल
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हड़ताल को वापस लेने की अपील की थी और सरकार ने दो साल का बकाया वेतन देने की बात कही थी। लेकिन यूनियन नेता इससे संतुष्ट नहीं हुए। केएसआरटीसी स्टाफ एंड वर्कर्स फेडरेशन के अध्यक्ष एच. वी. अनंथा सुब्बाराव ने कहा, 'हमें सरकार का प्रस्ताव मंजूर नहीं है। हमें पूरे 38 महीनों का बकाया वेतन चाहिए। हम हड़ताल वापस नहीं लेंगे।'

मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट की टिप्पणी
कर्नाटक हाईकोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर पूरी सार्वजनिक परिवहन सेवा बंद हो गई तो आम जनता को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि वेतन में देरी क्यों हुई है।
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