Buland Bharat: सेना का निगरानी और मारक क्षमता का अभ्यास खत्म, अरुणाचल में तैनात विशेष बलों के जवान हुए शामिल
जानकारी के मुताबिक बुलंद भारत के तहत अभ्यास में अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग और तवांग जिलों में तैनात विशेष बलों, उड्डयन और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवान शामिल हुए। साथ ही आर्टिलरी और इन्फैंट्री की निकट समन्वय में निगरानी और मारक क्षमता का अभ्यास किया गया।
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भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनातनी के बीच भारतीय सेना ने पूर्वी क्षेत्र में ऊंचे आर्टिलरी रेंज क्षेत्र में बुलंद भारत के तहत एक एकीकृत निगरानी और मारक क्षमता का अभ्यास किया। यह अभ्यास पूर्वी क्षेत्र के सबसे ऊंचाई वाली आर्टिलरी रेंज में संचालित किया गया था। अभ्यास करीब एक महीने तक चला।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बुलंद भारत के तहत अभ्यास में अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग और तवांग जिलों में तैनात विशेष बलों, उड्डयन और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवान शामिल हुए। साथ ही आर्टिलरी और इन्फैंट्री की निकट समन्वय में निगरानी और मारक क्षमता का अभ्यास किया गया।
जानकारी के मुताबकि जिन लक्ष्यों को रखा गया था, उसमें सफलता हासिल हुई है। महीने भर चले इस प्रशिक्षण में ऊंचाई वाले क्षेत्र में नकली युद्ध जैसी स्थिति बनी, जिसमेें सैनिकों और हथियारों का बखूबी प्रशिक्षण हुआ। इस दौरान इन्फैंट्री और आर्टिलरी रॉडार, हथियार प्रणालियों और हवा से आग की दिशा से समन्वित निगरानी और मारक क्षमता का भी अभ्यास किया गया। इस दौरान लंबी दूरी तक मार मार करने वाली कई मल्टीमीडिया निर्बाध संचार का भी अभ्यास किया गया।
भारत-आसियान नौसैनिक अभ्यास के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए नौसेना प्रमुख
नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार मंगलवार को सिंगापुर के एक प्रमुख नौसैनिक अड्डे पर पहले आसियान-भारत समुद्री अभ्यास (एआईएमई) के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। भारत और सिंगापुर की सह-मेजबानी में हो रहे इस अभ्यास में अन्य आसियान (एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस) देशों के युद्धपोत और कर्मचारी भाग ले रहे हैं। भारतीय नौसेना के दो अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत आईएनएस सतपुड़ा और आईएनएस दिल्ली अभ्यास में भाग लेने के लिए सिंगापुर पहुंचे हैं। अभ्यास का बंदरगाह चरण चार मई तक चांगी नौसेना केंद्र में चलेगा, जबकि समुद्री चरण सात से आठ मई तक दक्षिण चीन सागर में आयोजित किया जाएगा। दक्षिण चीन सागर में पिछले कुछ साल से चीन की सैन्य आक्रामकता देखी जा रही है।