Supreme Court: 'काम करने के बजाय हवा में महल बना रहे', आवारा कुत्तों के खतरे पर राज्यों को 'सुप्रीम' फटकार
Supreme Court: आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और डॉग बाइट मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि आदेशों के पालन में राज्य केवल कागज़ी दावे कर रहे हैं, जमीनी काम नहीं दिख रहा। साथ ही कोर्ट ने नसबंदी, शेल्टर और सार्वजनिक इमारतों की फेंसिंग पर सख्ती से अमल का निर्देश दिया।
विस्तार
आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और कोर्ट के आदेशों के पालन में ढिलाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें जमीनी काम करने के बजाय हवा में महल बना रही हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ हलफनामे और दावे काफी नहीं हैं, बल्कि ठोस कार्रवाई दिखनी चाहिए।
क्या है मामला, कोर्ट क्यों नाराज?
कोर्ट पहले ही राज्यों को आवारा कुत्तों की नसबंदी क्षमता बढ़ाने, एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर मजबूत करने और सड़कों से आवारा जानवर हटाने के निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद जब राज्यों ने अपनी प्रगति रिपोर्ट रखी, तो पीठ ने असंतोष जताया। न्यायाधीशों ने कहा कि कई राज्यों की बातें स्टोरीटेलिंग जैसी हैं, जिनका जमीन पर असर नजर नहीं आता।
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राज्यों की रिपोर्ट में दिखी ये कमियां
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अमाइकस क्यूरी ने बताया कि कुछ राज्यों ने कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति कमजोर है।
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कई राज्यों की रिपोर्ट में ठोस और स्पष्ट जानकारी का अभाव है।
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बिहार ने 34 एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर होने का दावा किया।
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राज्य सरकार के अनुसार 20 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी की गई।
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रिपोर्ट में रोजाना नसबंदी की क्षमता का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं दिया गया।
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यह भी नहीं बताया गया कि यह नसबंदी कितने समय में की गई।
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राज्य में कुल आवारा कुत्तों की संख्या के मुकाबले यह आंकड़ा बेहद कम है।
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कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब आवारा कुत्तों की संख्या लाखों में है, तो इतनी सीमित नसबंदी से समस्या कैसे सुलझेगी।
कुत्तों के काटने के आंकड़े क्यों बने चिंता की वजह?
कोर्ट ने असम के आंकड़ों पर खास चिंता जताई। 2024 में वहां 1.66 लाख डॉग बाइट और 2025 में सिर्फ जनवरी में ही करीब 20,900 मामले सामने आए। अदालत ने इसे “चौंकाने वाला” बताया। पीठ ने कहा कि ज्यादातर राज्यों ने कुत्तों के काटने के सही आंकड़े तक पेश नहीं किए, जो प्रशासनिक लापरवाही दिखाता है।
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संस्थानों की घेराबंदी और सख्ती की चेतावनी
कोर्ट ने साफ कहा कि स्कूल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक इमारतों की फेंसिंग अनिवार्य है, ताकि आवारा जानवरों की एंट्री रोकी जा सके। यह सिर्फ जानवरों से सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि संपत्ति की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। अदालत ने चेताया कि जो राज्य अस्पष्ट और गोलमोल जवाब देंगे, उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणियां की जाएंगी। आगे की सुनवाई में अन्य राज्यों की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
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