Budget Session: चुनावी मूड में सांसद, बजट सत्र में सांसदों की मौजूदगी 100 से नीचे, बहस में नहीं दिखा रहे रुचि!
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विस्तार
लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा होने में भले ही अभी कुछ दिनों की देरी हो, मगर सांसदों की रूचि अब संसद की बहस में नहीं, बल्कि चुनावी सियासत में है। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बजट सत्र के तीसरे-चौथे दिन ही सदन खाली खाली नजर आने लगा है। लोकसभा में सांसदों की संख्या करीब 525 है, मगर अभिभाषण पर चर्चा के दौरान एक चौथाई सदस्य भी मौजूद नहीं रहे। इस बीच भाजपा ने लोकसभा में अपने सभी सांसदों को मौजूद रहने के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया है। भाजपा चाहती है कि सभी सांसद सदन में मौजूद रहें। प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देंगे, इसलिए सरकार के रुख का समर्थन करने के लिए सभी सांसदों को उपस्थित रहने को कहा गया है।
हर तरफ सरकार की तारीफों के पुल
चुनावी दंगल में जाने को तैयार सत्ता पक्ष और विपक्ष ने बेशक बहस में एक दूसरे पर तीखे तंज और शब्दों के बाण चलाए, मगर इस दौरान भी सदन में सांसदों की मौजूदगी का अधिकतम आंकड़ा शुक्रवार को 70-80 को पार करता नजर नहीं आया। लोकसभा में अभिभाषण पर चर्चा की शुरुआत भाजपा की हिना गावित ने की और सदन में सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और विपक्ष पर जमकर घेरा। इस दौरान सदन में विपक्ष के 30-32 से ज्यादा सांसद मौजूद नहीं थे, तो सत्ता पक्ष के सांसदों का आंकड़ा भी 45 से ज्यादा नहीं था।
शुक्रवार को लोकसभा में स्वास्थ्य राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल ने सरकार के कामों की जमकर तारीफ की। राजीव गांधी समेत पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ अपमानजक टिप्पणी करने से भी गुरेज नहीं किया। इसको लेकर कांग्रेस के सदस्यों से कुछ नोकझोंक भी हुई। सदन के माहौल में सियासी गरमी लाने के लिए बघेल विपक्षी सदस्यों को कई बार उकसाने का प्रयास करते भी नजर आए। मगर विपक्ष ने छिटपुट आपत्ति और कुछ मौकों पर टोकाटाकी से ज्यादा मौका नहीं दिया। इसके अलावा सभी भाजपा सांसद पूरे चर्चा के दौरान मोदी सरकार की अहम योजनाओं के आंकड़े और उससे हुए फायदे ही गिनाते हुए नजर आए। सत्ता पक्ष की तरफ से राष्ट्रपति अभिभाषण में भाग लेने वाले सांसदों ने अपने भाषणों में अयोध्या और राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को प्रमुखता से रखा।
विपक्ष पूरी तरह से शांत
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चल रही चर्चा के दौरान लोकसभा में कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट, सपा-बसपा ने सरकार को घेरने का काम जरूर किया। लेकिन विपक्षी सांसदों के भाषणों में भाषण में ज्यादा धार नजर नहीं आई। विपक्ष की ओर से सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने बहस की शुरुआत करते हुए सरकार और प्रधानमंत्री पर सियासी तीर चलाने शुरू किए, तो सत्ता पक्ष बेचैन होने लगा। संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे से लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी कांग्रेस सांसद की बातों को रिकॉर्ड से हटाने के लिए सक्रिय दिखीं। गोगोई ने जब पिछले सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों के रिकॉर्ड संख्या में निलंबन और सत्ता पक्ष द्वारा संसद को राज दरबार की तरह बनाए जाने की बात उठाई, तब भाजपा सांसदों के साथ स्पीकर ओम बिरला भी बिफर पड़े। स्पीकर ने कहा कि सदन के फैसलों पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। गोगोई ने इस पर कहा कि वह सत्ता पक्ष के प्रयासों की बात कर रहे हैं। जिस तरह विपक्षी सदस्यों को सदन में बार-बार बोलने से रोका जा रहा है, वह इसका प्रमाण है कि भारत के लोकतंत्र को राजतंत्र में परिवर्तित करने का प्रयास किया जा रहा है, मगर विपक्ष ऐसा होने नहीं देगा।