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Budget 2025: किसान नेता बोले, अन्नदाता को कर्जदार बनाने की साजिश; लोन से बाजार उठेगा, मगर किसान नहीं
Sat, 01 Feb 2025 01:57 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Sat, 01 Feb 2025 01:57 PM IST
सार
Budget 2025: किसान नेता वीएम सिंह कहते हैं, बजट में अन्नदाता को कर्जदार बनाने की साजिश रची जा रही है। किसानों को लोन देने की बात हो रही है, अनुदान देने की नहीं। बजट में एमएसपी का जिक्र तक नहीं है।
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बजट 2025
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 पेश कर दिया है। वित्तमंत्री ने कृषि क्षेत्र के लिए कई घोषणाएं की हैं। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, दलहन में आत्मनिर्भरता, बिहार में मखाना बोर्ड बनाने और असम में यूरिया प्लांट खोलने का एलान किया गया है। किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट को अब 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। किसान नेता वीएम सिंह कहते हैं, बजट में अन्नदाता को कर्जदार बनाने की साजिश रची जा रही है। किसानों को लोन देने की बात हो रही है, अनुदान देने की नहीं। बजट में एमएसपी का जिक्र तक नहीं है। किसानों की आय डबल करने की बात कहां तक पहुंची है, केंद्र सरकार इस बाबत चुप है।
वित्त मंत्री ने बजट में कहा, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत ऐसे 100 जिलों को चुना जाएगा, जहां पर कृषि उत्पादकता कम है। इससे वहां पर उत्पादकता बढ़ाने, खेती में विविधता लाने, सिंचाई और उपज के बाद भंडारण की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस योजना से 1.7 करोड़ किसानों को लाभ होगा। इसके दायरे में सभी तरह के किसान आएंगे। कृषि के अच्छे तरीकों को अपनाने पर जोर दिया जाएगा।
नाबार्ड के आंकड़ों के अनुसार, अक्तूबर 2024 तक सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने 167.53 लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए थे। इनकी कुल क्रेडिट लिमिट 1.73 लाख करोड़ रुपये थी। इसमें डेयरी किसानों के लिए 10,453.71 करोड़ रुपये क्रेडिट लिमिट के साथ 11.24 लाख कार्ड और मत्स्य पालकों के लिए 341.70 करोड़ रुपये क्रेडिट लिमिट के साथ 65,000 किसान क्रेडिट कार्ड शामिल हैं।
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किसान नेता सरदार वीएम सिंह कहते हैं, अन्नदाताओं द्वारा लंबे समय तक एमएसपी के लिए संघर्ष किया जा रहा है। सरकार ने इसके लिए कमेटी बनाई है, लेकिन बजट में इस बाबत कुछ नहीं कहा गया। बजट में किसान कहां पर है, बड़ा सवाल यह उठता है। भारत तो कृषि प्रधान देश है। यहां पर किसान को लोन देने की बात हो रही है, लेकिन उसे फसलों के उचित दाम मिलें, इस पर सरकार मौन है। एमएसपी की कानूनी गारंटी कहां पर है। किसानों को लोन देकर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। इससे क्या किसान का भला हो जाएगा। वह तो और ज्यादा कर्जदार होगा।
सरकार ने अपने बजट में उधारी ही तो बढ़ाई है। लोन की सीमा बढ़ा दी है, अनुदान तो नहीं बढ़ाया है। एक ही जमीन पर अन्नदाता कई बार लोन लेता है। अब लोन की सीमा बढ़ाने से किसान का भला कैसे होगा। विभिन्न परिस्थितियों में लोन का रेट तीन से नौ प्रतिशत तक चला जाता है। उद्योगपति तो लोन लेकर भाग जाते हैं, लेकिन किसान कहां भागेगा। उसकी जमीन तो यहीं पर रहेगी। किसानों को उम्मीद थी कि बजट में एमएसपी को लेकर सरकार कोई बड़ी घोषणा करेगी, लेकिन बजट में किसानों के हाथ पूरी तरह खाली हैं। ऐसा लगा कि वित्त मंत्री के बजट में किसानों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है।
एमएसपी की गारंटी के लिए कानून पर कोई बात नहीं हुई। इसमें बढ़ोतरी की बात तो छोड़ ही दीजिए। सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट से दूर भागती है। किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, लेकिन किसान का लोन दोगुना होने की तरफ बढ़ रहा है। किसानों के बच्चे, खेती से भाग रहे हैं। वजह, उनके लिए यह घाटे का सौदा साबित हो रहा है। वीएम सिंह ने कहा, किसान को कर्जदार बनाया जा रहा है। अगर वह लोन वापस नहीं करेगा तो उसे नया नहीं मिलेगा। किसानों को लोन देने का सीधा मकसद है कि सरकार मार्केट को बूस्ट करना चाहती है। जब किसान लोन की राशि समय पर नहीं चुका पाएगा तो वह संकट में आ जाएगा। सरकार ने केवल बाजार का फायदा देखा है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गत वर्ष जुलाई में बजट पेश करते हुए कृषि क्षेत्र के लिए कई घोषणाएं की थीं। सरकार ने कृषि एवं उससे जुड़े विभिन्न सेक्टरों के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपए मंजूर किए थे। तब कहा गया था कि केंद्र सरकार, एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए तैयार करेगी। पांच राज्यों में नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी होंगे। नाबार्ड के जरिए किसानों की मदद होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजूबत करने पर सरकार का फोकस रहेगा। बतौर वीएम सिंह, साल 2016 में सरकार ने यह घोषणा की थी कि अगले पांच साल में किसानों की आय डबल हो जाएगी। अब 2025 का बजट पेश हो गया है। इसमें कम से कम इतना तो बता देते कि डबल आय की घोषणा अभी कहां तक पहुंची है। इस घोषणा के पूरा होने में अभी कितने वर्ष और लगेंगे। वित्त मंत्री ने अपने बजट में किसानों की स्थिति को लेकर कुछ नहीं कहा।
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वित्त मंत्री ने बजट में कहा, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत ऐसे 100 जिलों को चुना जाएगा, जहां पर कृषि उत्पादकता कम है। इससे वहां पर उत्पादकता बढ़ाने, खेती में विविधता लाने, सिंचाई और उपज के बाद भंडारण की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस योजना से 1.7 करोड़ किसानों को लाभ होगा। इसके दायरे में सभी तरह के किसान आएंगे। कृषि के अच्छे तरीकों को अपनाने पर जोर दिया जाएगा।
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नाबार्ड के आंकड़ों के अनुसार, अक्तूबर 2024 तक सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने 167.53 लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए थे। इनकी कुल क्रेडिट लिमिट 1.73 लाख करोड़ रुपये थी। इसमें डेयरी किसानों के लिए 10,453.71 करोड़ रुपये क्रेडिट लिमिट के साथ 11.24 लाख कार्ड और मत्स्य पालकों के लिए 341.70 करोड़ रुपये क्रेडिट लिमिट के साथ 65,000 किसान क्रेडिट कार्ड शामिल हैं।
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किसान नेता सरदार वीएम सिंह कहते हैं, अन्नदाताओं द्वारा लंबे समय तक एमएसपी के लिए संघर्ष किया जा रहा है। सरकार ने इसके लिए कमेटी बनाई है, लेकिन बजट में इस बाबत कुछ नहीं कहा गया। बजट में किसान कहां पर है, बड़ा सवाल यह उठता है। भारत तो कृषि प्रधान देश है। यहां पर किसान को लोन देने की बात हो रही है, लेकिन उसे फसलों के उचित दाम मिलें, इस पर सरकार मौन है। एमएसपी की कानूनी गारंटी कहां पर है। किसानों को लोन देकर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। इससे क्या किसान का भला हो जाएगा। वह तो और ज्यादा कर्जदार होगा।
सरकार ने अपने बजट में उधारी ही तो बढ़ाई है। लोन की सीमा बढ़ा दी है, अनुदान तो नहीं बढ़ाया है। एक ही जमीन पर अन्नदाता कई बार लोन लेता है। अब लोन की सीमा बढ़ाने से किसान का भला कैसे होगा। विभिन्न परिस्थितियों में लोन का रेट तीन से नौ प्रतिशत तक चला जाता है। उद्योगपति तो लोन लेकर भाग जाते हैं, लेकिन किसान कहां भागेगा। उसकी जमीन तो यहीं पर रहेगी। किसानों को उम्मीद थी कि बजट में एमएसपी को लेकर सरकार कोई बड़ी घोषणा करेगी, लेकिन बजट में किसानों के हाथ पूरी तरह खाली हैं। ऐसा लगा कि वित्त मंत्री के बजट में किसानों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है।
एमएसपी की गारंटी के लिए कानून पर कोई बात नहीं हुई। इसमें बढ़ोतरी की बात तो छोड़ ही दीजिए। सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट से दूर भागती है। किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, लेकिन किसान का लोन दोगुना होने की तरफ बढ़ रहा है। किसानों के बच्चे, खेती से भाग रहे हैं। वजह, उनके लिए यह घाटे का सौदा साबित हो रहा है। वीएम सिंह ने कहा, किसान को कर्जदार बनाया जा रहा है। अगर वह लोन वापस नहीं करेगा तो उसे नया नहीं मिलेगा। किसानों को लोन देने का सीधा मकसद है कि सरकार मार्केट को बूस्ट करना चाहती है। जब किसान लोन की राशि समय पर नहीं चुका पाएगा तो वह संकट में आ जाएगा। सरकार ने केवल बाजार का फायदा देखा है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गत वर्ष जुलाई में बजट पेश करते हुए कृषि क्षेत्र के लिए कई घोषणाएं की थीं। सरकार ने कृषि एवं उससे जुड़े विभिन्न सेक्टरों के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपए मंजूर किए थे। तब कहा गया था कि केंद्र सरकार, एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए तैयार करेगी। पांच राज्यों में नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी होंगे। नाबार्ड के जरिए किसानों की मदद होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजूबत करने पर सरकार का फोकस रहेगा। बतौर वीएम सिंह, साल 2016 में सरकार ने यह घोषणा की थी कि अगले पांच साल में किसानों की आय डबल हो जाएगी। अब 2025 का बजट पेश हो गया है। इसमें कम से कम इतना तो बता देते कि डबल आय की घोषणा अभी कहां तक पहुंची है। इस घोषणा के पूरा होने में अभी कितने वर्ष और लगेंगे। वित्त मंत्री ने अपने बजट में किसानों की स्थिति को लेकर कुछ नहीं कहा।