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नौकरीपेशा पर महंगाई की मार, पुरानी बचत योजनाओं में भी लगाी सेंध

Tue, 02 Feb 2021 08:28 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 02 Feb 2021 08:28 AM IST
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Budget 2021: Preparation to increase inflation, cost and increase in job occupation
बजट 2021 - फोटो : अमर उजाला

कोविड-19 के दबाव में खाने-पीने की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि का सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा करदाताओं पर पड़ा है। एक तरफ उनके वेतन में कटौती हो रही है तो दूसरी ओर वर्क फ्रॉम होम से खर्च भी बढ़ा है। बजट ने राहत देने की बजाय पुरानी बचत योजनाओं में भी सेंध लगाने की कोशिश की है।

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महंगाई और बढ़ते खर्चे से जूझ रहे वेतनभोगियों को बजट ने काफी निराश किया है। आर्थिक सर्वे में सरकार ने भी माना है कि खाद्य उत्पादों की खुदरा कीमतों में अप्रैल से दिसंबर तक 9.1 प्रतिशत औसत वृद्धि हुई। साथ ही महामारी से बचाव के लिए मास्क का खर्च भी बढ़ा।
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नौकरीपेशा को बजट से उम्मीदें थीं और लग रहा था कि सरकार सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले इस वर्ग को जरूर राहत देगी। बचत योजनाओं का दायरा बढ़ाकर कर छूट की बाट जोह रहे वेतनभोगी को बड़ा झटका तब लगा जब सरकार ने पीएफ यूलिप जैसी पुरानी योजनाओं में भी सेंध लगा दी। इसमें ज्यादा निवेश पर अब टैक्स देना होगा। सरकारी आंकड़ों से देखा जाए तो जिस खाद्य उत्पाद की कीमत महामारी से पहले 100 थी, वह बढ़कर 109.10 हो गई है।
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किसी परिवार का खाद्य उत्पादों पर खर्च तीन लाख रुपये था तो महामारी के बाद यह बढ़कर 327300 रुपये हो गया। कोविड-19 के दौर में कंपनियों ने वर्क फ्रोम होम को बढ़ावा दिया जिससे  कर्मचारियों का बिजली का खर्च तो बढ़ा ही, उसे कंप्यूटर, इंटरनेट व अन्य उपकरणों पर भी ज्यादा खर्च करना पड़ा। जो औसतन 50000 रुपये तक हो सकता है।

75 साल से ज्यादा उम्र वाले नहीं भरेंगे रिटर्न, शर्तें लागू
स्वतंत्रता के 75 साल में तीन वरिष्ठ नागरिकों 36 साल से ज्यादा उम्र को बड़ी राहत मिली है। जिन वरिष्ठ नागरिकों को केवल पेंशन में ब्याज से आए होती है, उन्हें आयकर रिटर्न नहीं भरना पड़ेगा या ब्याज या पेंशन का भुगतान करने वाले बैंक ही खाते से आवश्यक कटौती कर लेंगे। हालांकि जिन वरिष्ठ नागरिकों को मकान किराए या शेयर मार्केट से अतिरिक्त आय होती है उन्हें रिटर्न भरना पड़ेगा।


लाभांश देने पर ही अग्रिम कर
बजट में सरकार ने लाभांश वितरण कर का बोझ कंपनियों से हटाकर निवेशकों पर डाल दिया था। निवेशक को लाभांश पर अपने टैक्स स्लैब के अनुसार कर का भुगतान करना पड़ता है। ऐसे लाभांश पर अग्रिम कर के भुगतान से भी छूट मिलेगी। निवेशक को तभी लाभांश कर देना होगा जब कंपनी भुगतान कर देगी।
 

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