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बसपा ने कराई मेरी राजनीतिक हत्या: बाबू सिंह कुशवाहा
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Tue, 17 May 2016 03:23 AM IST
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प्रदेश सरकार के पूर्व केबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के निशाने पर अब बसपा ही है।
जन अधिकार मंच की जनसंपर्क यात्रा लेकर सोमवार को दोपहर यहां पहुंचे कुशवाहा ने कहा कि बसपा के शीर्ष लोगों ने एनआरएचएम घोटाले में उनका नाम घसीटकर उनकी राजनीतिक हत्या की साजिश रची और परिवार कल्याण विभाग के दो डाक्टरों के हत्यारों को बचाने के लिए ऐसा किया गया, क्योंकि वह तत्कालीन सरकार से इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे थे।
शहर के संजय कम्यूनिटी हाल में आयोजित मंच के सम्मेलन में कुशवाहा ने सफाई देते हुए कहा कि एनआरएचएम से उनका कोई वास्ता नहीं रहा। न तो उन्होंने इससे जुड़ी किसी फाइल पर कभी हस्ताक्षर ही किए, न ही इसके बारे में कोई निर्देश ही जारी किए फिर भी उनको जेल भिजवा दिया गया।
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जन अधिकार मंच की जनसंपर्क यात्रा लेकर सोमवार को दोपहर यहां पहुंचे कुशवाहा ने कहा कि बसपा के शीर्ष लोगों ने एनआरएचएम घोटाले में उनका नाम घसीटकर उनकी राजनीतिक हत्या की साजिश रची और परिवार कल्याण विभाग के दो डाक्टरों के हत्यारों को बचाने के लिए ऐसा किया गया, क्योंकि वह तत्कालीन सरकार से इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे थे।
शहर के संजय कम्यूनिटी हाल में आयोजित मंच के सम्मेलन में कुशवाहा ने सफाई देते हुए कहा कि एनआरएचएम से उनका कोई वास्ता नहीं रहा। न तो उन्होंने इससे जुड़ी किसी फाइल पर कभी हस्ताक्षर ही किए, न ही इसके बारे में कोई निर्देश ही जारी किए फिर भी उनको जेल भिजवा दिया गया।
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कुशवाहा ने सफाई में कहा- एनआरएचएम से कभी न रहा वास्ता
बाबू सिंह कुशवाहा बोले- चार साल जेल में काटने के बाद अब वह अति पिछड़ों और अति दलितों तथा मुस्लिमों के हितों के लिए अपने संघर्ष को आगे बढ़ाने निकल पड़े हैं। उन्होंने आबादी के आधार पर पिछड़ों को 54 फीसदी आरक्षण की मांग भी उठाई।
कहा कि जातिगत आरक्षण को खत्म करने के लिए समीक्षा नहीं होनी चाहिए बल्कि सामाजिक जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक सरकार को आबादी के हिसाब से आरक्षण निर्धारित करना चाहिए।
सम्मेलन में जुटे लोगों से उन्होंने वोट की ताकत पहचानने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्ता के जरिए ही अति पिछड़ों, अति दलितों और मुस्लिमों को उनका हक मिल सकता है इसलिए 2017 के चुनाव में एकजुटता से वोट की ताकत का इस्तेमाल करके सत्ता हासिल करिए। इसके लिए वह जन अधिकार मंच को सियासी संगठन के रूप में लेकर आए हैं। सम्मेलन में प्रभात दिवाकर, सुभाष मौर्य, रागिनी सिंह, सर्वेश मौर्य, अफरोज मियां आदि ने भी विचार रखे। संचालन मौर्य विकास संस्था के अध्यक्ष रमेश मौर्य ने किया।
कहा कि जातिगत आरक्षण को खत्म करने के लिए समीक्षा नहीं होनी चाहिए बल्कि सामाजिक जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक सरकार को आबादी के हिसाब से आरक्षण निर्धारित करना चाहिए।
सम्मेलन में जुटे लोगों से उन्होंने वोट की ताकत पहचानने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्ता के जरिए ही अति पिछड़ों, अति दलितों और मुस्लिमों को उनका हक मिल सकता है इसलिए 2017 के चुनाव में एकजुटता से वोट की ताकत का इस्तेमाल करके सत्ता हासिल करिए। इसके लिए वह जन अधिकार मंच को सियासी संगठन के रूप में लेकर आए हैं। सम्मेलन में प्रभात दिवाकर, सुभाष मौर्य, रागिनी सिंह, सर्वेश मौर्य, अफरोज मियां आदि ने भी विचार रखे। संचालन मौर्य विकास संस्था के अध्यक्ष रमेश मौर्य ने किया।