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BSF: जब सीमावर्ती क्षेत्र में बीएसएफ बन गई आशा की किरण, युवाओं को कोचिंग देकर दिला दी सीएपीएफ की वर्दी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 20 Oct 2023 05:20 PM IST
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सार
पश्चिम बंगाल में इस बटालियन ने अक्तूबर 2021 से सीमावर्ती इलाकों के युवाओं का जीवन बदलने की ठानी थी। सीमित संसाधनों के जरिए ही भर्ती-पूर्व और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। बॉर्डर के आसपास के युवाओं को बताया गया कि इस कार्यक्रम से उनका जीवन बदल सकता है। वे राष्ट्र के विकास की मुख्यधारा में शामिल होकर अपना योगदान दे सकते हैं...
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BSF: When BSF became a ray of hope in the border area, provided youth the CAPF uniform
BSF - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ', अपने मूल कार्य यानी सीमा की पहरेदारी से परे भी कई तरह के सामाजिक काम कर रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं को कोचिंग एवं अन्य सुविधाएं प्रदान कर उन्हें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में स्थायी नौकरी दिला रही है। कोई युवा बीएसएफ में भर्ती होकर सीमा की पहरेदारी करेगा, तो कोई आईटीबीपी में हिमवीर बन, बॉर्डर की हिफाजत करने के लिए तैयार है। मिनिस्ट्रियल एवं दूसरे पदों के लिए भी युवाओं को मौका मिल रहा है। बीएसएफ की 40वीं बटालियन, सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं के लिए आशा की किरण बन चुकी है। ये बटालियन, बल के उत्तर बंगाल फ्रंटियर के जलपाईगुड़ी सेक्टर के तहत कूचबिहार जिले के सब डिवीजन मेखलीगंज में सीमा चौकी (बीओपी) बीआरके बारी पर तैनात है।

यह बात युवाओं की समझ में आ गई

पश्चिम बंगाल में इस बटालियन ने अक्तूबर 2021 से सीमावर्ती इलाकों के युवाओं का जीवन बदलने की ठानी थी। सीमित संसाधनों के जरिए ही भर्ती-पूर्व और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। बॉर्डर के आसपास के युवाओं को बताया गया कि इस कार्यक्रम से उनका जीवन बदल सकता है। वे राष्ट्र के विकास की मुख्यधारा में शामिल होकर अपना योगदान दे सकते हैं। बीएसएफ की यह बात, युवाओं की समझ में आ गई। यहीं से वह क्रांतिकारी यात्रा प्रारंभ हुई। सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। उनके रूझान और शिक्षा के स्तर का पता लगाया गया। उसके बाद सीमावर्ती आबादी के उत्थान के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता जताते हुए बीएसएफ ने वहां पर भर्ती-पूर्व एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की। युवाओं को सेना, सीएपीएफ, पुलिस व दूसरे क्षेत्रों की नौकरियों के लिए प्रशिक्षण दिया गया। इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का नतीजा भी मिलने लगा। लिखित परीक्षा की तैयारी कराने के अलावा युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। बॉर्डर एरिया के युवकों एवं युवतियों को प्रशिक्षण देने के लिए बीएसएफ के समर्पित कर्मियों ने अपना अहम योगदान दिया।

BSF
BSF - फोटो : Amar Ujala

अध्ययन सामग्री से लेकर जूते और ट्रैक सूट तक

बीएसएफ ने एक लक्ष्य निर्धारित किया था कि सीमावर्ती इलाके के युवाओं का जीवन संवारना है। उन्हें अच्छी तरह से कोचिंग प्रदान करनी है। यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिभागियों को अध्ययन सामग्री के अलावा जूते और ट्रैक सूट प्रदान किए गए। उनकी जरूरतों की अन्य वस्तुएं भी मुहैया कराई गईं। 2022 में, 'बीओपी' बीआरके बारी में एक अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित की गई। यहां पर युवाओं ने सामान्य ड्यूटी के अलावा मिनिस्ट्रियल पोस्ट के लिए भी स्वयं को तैयार करना शुरू कर दिया। कंप्यूटर पर टाइपिंग अभ्यास की कक्षाएं भी लगाई गई। यहां से मिली कोचिंग एवं प्रशिक्षण की मदद से अब इस क्षेत्र के तीन युवा बीएसएफ में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) के रूप में पद हासिल कर रहे हैं। वे 27 अक्तूबर, 2023 को बीएसएफ में शामिल होने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, नौ लड़के और लड़कियां ने भी बीएसएफ व आईटीबीपी में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी), कांस्टेबल (ट्रेड्समैन) और हेड कांस्टेबल (मिनिस्ट्रियल) के पदों के लिए चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि ने न केवल इन युवाओं के जीवन को बदल दिया है, बल्कि स्थानीय सीमावर्ती आबादी के भीतर आशा और प्रेरणा भी जगाई है।

100 स्थानीय युवाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य

जब आसपास के युवाओं को बीएसएफ की इस पहल का पता लगा, तो भारी संख्या में वहां पर युवा पहुंचना शुरू हो गए। उन्होंने बीएसएफ के कोचिंग सेंटर में आने की इच्छा जताई। इस सफलता के बाद बीएसएफ ने अब अपनी सामाजिक पहल का लक्ष्य भी बड़ा कर लिया है। अब झिकाबारी बीओपी पर एक और पूर्व-भर्ती एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस केंद्र का लक्ष्य 100 स्थानीय युवाओं को लाभान्वित करना है। सीमावर्ती क्षेत्रों के ऐसे लोग, जिनके बच्चे दसवीं से नीचे रहे गए, वे भी उन्हें कंप्यूटर जागरूकता क्लास में भेज रहे हैं। वहां पर उन्हें गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों में बुनियादी शिक्षा प्रदान की जा रही है। बीएसएफ के डीजी नितिन अग्रवाल ने 19 अक्तूबर को 40 बटालियन में स्थित इस सेंटर का दौरा किया है। उन्होंने प्रतिभाशाली युवाओं के साथ बातचीत की। उनकी उपलब्धियों का सम्मान करते हुए उन्हें उपहार और पुरस्कार वितरित किए। उन्होंने कहा, सीमावर्ती आबादी की क्षमता को बढ़ावा देने और देश के भविष्य का पोषण करने के लिए बीएसएफ प्रतिबद्ध है। बीएसएफ की यह सफलता की कहानी, सीमावर्ती क्षेत्र में शिक्षा और प्रशिक्षण के प्रति बल की निष्ठा एवं लगन को प्रदर्शित करती है।

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