फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   BSF shot down the pakistani Drones through indigenous technology

BSF: अब पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन की कुंडली खोज निकालती है बीएसएफ, सर्विलांस के लिए लगाए 5000 कैमरे

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 30 Nov 2022 07:07 PM IST
सार

BSF: बीएसएफ डीजी पंकज कुमार सिंह ने कहा, सीमा पार से आने वाले ड्रोन एक चुनौती हैं, मगर बीएसएफ ने काफी हद तक इनके सर्विलांस की तकनीक हासिल कर ली है। स्वदेशी तकनीक के जरिए इन पर नजर रखी जा रही है। पहले इन्हें इंटरसेप्ट करने का प्रयास होता है। अगर उसमें सफलता नहीं मिलती है, तो सीमा प्रहरी उसे अपनी गोली का निशाना बना देते हैं

विज्ञापन
BSF shot down the pakistani Drones through indigenous technology
DG (BSF) Pankaj Singh - फोटो : Agency

विस्तार

सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ', द्वारा पाकिस्तान से घातक हथियार, गोला-बारूद और ड्रग्स लेकर आ रहे 'ड्रोन' को अपनी देशी तकनीक के जरिए मार गिराया जाता है। इस साल अभी तक 16 ड्रोन मार गिराए गए हैं। दो दिन पहले बीएसएफ की महिला प्रहरियों ने एक विशाल ड्रोन को मार गिराया था। पाकिस्तान से आने वाले ये ड्रोन सुबह दो से चार बजे के बीच भारतीय सीमा में प्रवेश करते हैं, लेकिन सीमा प्रहरियों की सजगता के चलते उन्हें वहीं पर गिरा दिया जाता है। ड्रोन कहां से आता है, कब और कहां पर उतरना होता है, ये सारी सूचनाएं बीएसएफ की जांबाज तकनीकी टीम, अपने सिस्टम से ही पता लगा लेती है। ड्रोन में लगी 'चिप' से कई राज खुल जाते हैं। इसी चिप से मिली जानकारी की मदद से पंजाब में नशे की तस्करी में शामिल आठ लोग पकड़े गए थे। इनमें से छह लोग तो ऐसे थे जो पहले भी एनडीपीएस एक्ट में दोषी साबित किए गए थे। बीएसएफ द्वारा बहुत ही कम कीमत और स्वदेशी तकनीक पर तैयार उपकरणों की मदद से बॉर्डर सर्विलांस का काम किया जा रहा है।

विज्ञापन

ड्रोन को मार गिराते हैं मुस्तैद सीमा प्रहरी

बीएसएफ डीजी पंकज कुमार सिंह ने बल के 58वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर एक प्रेसवार्ता में यह बात कही है। बल के स्थापना दिवस की परेड इस बार अमृतसर में चार दिसंबर को आयोजित होगी। परेड संपन्न होने के बाद बीएसएफ द्वारा स्काई डाइविंग सहित कई हैरतंगेज कारनामे दिखाए जाएंगे। पंकज कुमार सिंह ने कहा, सीमा पार से आने वाले ड्रोन एक चुनौती हैं, मगर बीएसएफ ने काफी हद तक इनके सर्विलांस की तकनीक हासिल कर ली है। स्वदेशी तकनीक के जरिए इन पर नजर रखी जा रही है। पहले इन्हें इंटरसेप्ट करने का प्रयास होता है। अगर उसमें सफलता नहीं मिलती है, तो सीमा प्रहरी उसे अपनी गोली का निशाना बना देते हैं। 'एंटी ड्रोन सिस्टम' पर काम चल रहा है। बहुत जल्द यह सिस्टम बीएसएफ को मिल जाएगा। ड्रोन के चलते हमारे सीमा प्रहरी सतर्क हैं। वे जानते हैं कि जब ड्रोन आया है, तो कोई उसे लेने भी आएगा। ड्रोन के साथ हथियार, गोला बारूद या ड्रग्स जैसे पदार्थ आते हैं। बीएसएफ, इन दोनों ही मोर्चों पर सतर्क रहती है। वह ड्रोन को भी मार गिराती है और बॉर्डर के आसपास पैकेट उठाने के लिए आने वालों को भी पकड़ती है। इसके लिए बीएसएफ ने स्पेशल पेट्रोलिंग टीमें लगाई हैं।

विज्ञापन

BSF shot down the pakistani Drones through indigenous technology
बीएसएफ के महिला दस्ते ने मार गिराया पाकिस्तानी ड्रोन - फोटो : Agency

30 करोड़ में 5,000 कैमरे

बतौर पंकज कुमार सिंह, बीएसएफ ने पिछले एक साल में लो कॉस्ट तकनीक पर बेहतर काम किया है। सर्विलांस की विदेशी तकनीक बहुत महंगी थी, इसलिए बल ने खुद ही अपना सिस्टम तैयार करने पर जोर दिया। उसमें कामयाबी भी मिली। भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर सर्विलांस के लिए बीएसएफ की देशी तकनीक ने महंगे विदेशी उपकरणों को पीछे छोड़ दिया है। एंटी टनल सोल्यूशन, आईईडी का पता लगाना और घनी धुंध में बॉर्डर की चौकसी, इन सबके लिए स्वदेशी तकनीक की मदद ली जा रही है। 'व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली' (सीआईबीएमएस) पर तेजी से काम चल रहा है। बीएसएफ ने मात्र तीस करोड़ रुपये में पांच हजार कैमरे खरीद कर उन्हें बॉर्डर के विभिन्न हिस्सों पर लगा दिया है। इन कैमरों से दिन-रात सर्विलांस किया जा रहा है। सीमा के कई हिस्सों पर हाई टेक्नोलॉजी वाले जो उपकरण लगाए जा रहे हैं, उन पर काम जारी रहेगा। इसके साथ ही बॉर्डर सर्विलांस के लिए अब कम खर्चीला तरीका अपनाया जा रहा है।

ड्रोन से छोड़ेंगे आंसू गैस

बीएसएफ के आधुनिकीकरण के बारे में पंकज कुमार सिंह ने बताया, ड्रोन का इस्तेमाल कई सकारात्मक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। ड्रोन के जरिए दूरदराज वाले इलाकों में टेलीमेडिसिन सेवा शुरू की गई है। अब उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए 'आंसू गैस' छोड़ने में भी ड्रोन का इस्तेमाल होगा। बल में सभी जवानों और अफसरों की एसीआर भरने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तैयार किया जा रहा है। कई बार समय पर एसीआर न भरने के कारण संबंधित अधिकार या जवान की पदोन्नति में देरी हो जाती है। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम शुररू होने के बाद ऐसी दिक्कतों से बचा जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed