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BSF: बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट के घर पर बल के ही अफसरों ने बिना वारंट डाली रेड, पत्नी ने थाने में दी शिकायत

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 23 Feb 2024 02:56 PM IST
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सार
अमर उजाला को मिली शिकायत की प्रति के मुताबिक डिप्टी कमांडेंट की पत्नी ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस सारे प्रकरण के चलते सुरजीत सिंह गुलेरिया आईजी, रणधीर सिंह गिल टूआईसी विजिलेंस, विजय कुमार सिंह कमांडेंट, बैद्यनाथ राउत टूआईसी और डीसी दीपेंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। इन अफसरों ने देर रात को गैर कानूनी तरीके से उनके घर में प्रवेश किया है...
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BSF Officers raided the Deputy Commandant house without warrant, wife complained in the police station
BSF - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

बीएसएफ के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर में एक बड़ा मामला सामने आया है। बल की एक टीम, जिसमें कई अफसर और जवान शामिल थे, उन्होंने बीएसएफ की इकाई (पतिराम), दक्षिण दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल में कार्यरत, डिप्टी कमांडेंट दिलीप कुमार पासवान के क्वार्टर पर रेड डाली। रात को करीब एक बजे तक सर्च चलती रही। जब पासवान और उनकी पत्नी ने सर्च वारंट या दूसरे कानूनी दस्तावेज दिखाने के लिए कहा, तो टीम के सदस्यों ने उन्हें धमकी दी। डिप्टी कमांडेंट दिलीप कुमार पासवान की पत्नी निवेदिता स्वराज ने इस घटना की शिकायत पतिराम पुलिस स्टेशन में दी है।

अमर उजाला को मिली शिकायत की प्रति के मुताबिक बीएसएफ की इकाई (पतिराम), दक्षिण दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल में कार्यरत, डिप्टी कमांडेंट दिलीप कुमार पासवान की पत्नी निवेदिता स्वराज ने पतिराम पुलिस स्टेशन में शिकायत दी है। पासवान इस वक्त बीएसएफ की 'जी' शाखा यानी 'खुफिया' इकाई, जो पतिराम टीम में तैनात है, वहां पर कार्यरत हैं। यह इकाई स्टेट हेड क्वार्टर रायगंज के तहत आती है। निवेदिता द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया है कि 14 फरवरी को रात दस बजे बीएसएफ के नॉर्थ बंगाल फंटियर से कुछ अफसर उनके घर पहुंचे। इनमें कमांडेंट विजय कुमार सिंह, बीएन राउत टूआईसी और डीसी दीपेंद्र सिंह सहित करीब दर्जनभर जवान भी शामिल थे। उन्होंने जबरदस्ती सरकारी क्वार्टर में प्रवेश किया था। बतौर निवेदिता स्वराज, घटना के समय वे मेरे पति डिप्टी कमांडेंट दिलीप पासवान, क्वार्टर पर ही थे। वह खुद जीओ मैस में थीं। जैसे ही उन्हें पता चला कि उनके क्वार्टर पर रेड हो रही है, तो वे तुरंत वहां पहुंची। बीएसएफ की टीम वहां पर सर्च कर रही थी।

अलमारी से लेकर बैड तक, घर का कोना-कोना छान मारा। उन्होंने हमें एक कोने में बैठा दिया। किसी से कोई संपर्क नहीं करने दिया। बीएसएफ टीम ने हमारे मोबाइल फोन छीन लिए। हमारी निजता का ध्यान नहीं रखा गया। निवेदिता ने अपनी शिकायत में बताया, मेरे पति ने बीएसएफ टीम से इस तरह के सर्च का आधार पूछा। कमांडेंट विजय कुमार सिंह ने दिलीप पासवान को बताया कि यह रेड पूर्वी कमांड हेडक्वार्टर के आईजी 'ऑप्स' सुरजीत सिंह गुलेरिया के निर्देश पर हो रही है। उन्होंने पासवान को बताया कि हमारे पास ऐसी सूचना है कि उनके क्वार्टर में कुछ आपत्तिजनक वस्तुएं मौजूद हैं। उसमें कैश भी शामिल है। जब शिकायतकर्ता और उनके पति ने बीएसएफ सर्च का विरोध किया, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। जब उनके पति ने सर्च का कोई आधिकारिक दस्तावेज, वारंट दिखाने के लिए कहा तो उनके साथ अंससदीय भाषा का इस्तेमाल किया गया। इससे डिप्टी कमांडेंट दिलीप पासवान और उनकी पत्नी को गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।

बीएसएफ ने पासवान और उनकी पत्नी के विरोध के बावजूद तीन घंटे तक सर्च जारी रखी। सर्च के दौरान उन्हें दूसरे कमरे में नहीं जाने दिया गया। यहां तक कि उन्हें भोजन से भी वंचित रखा। इस रेड से उनके छोटे बच्चों के दिमाग पर गहर असर पड़ा। सर्च की शुरुआत से लेकर उसके समाप्त होने तक बीएसएफ टीम कोई भी लीगल दस्तावेज या वारंट नहीं दिखा सकी, जिससे कि उस सर्च को कानूनी तौर पर सही ठहराया जा सके। पूरे सर्च ऑपरेशन में बीएसएफ टीम को कोई भी आपत्तिजनक या संदिग्ध पदार्थ एवं वस्तु नहीं मिली। इसके बाद उस टीम ने डिप्टी कमांडेंट पासवान का निजी मोबाइल फोन, एक हार्ड डिस्क, क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड और बैंक पासबुक अपने कब्जे में ले ली। पासवान की पत्नी ने अपनी शिकायत में बताया कि इस सर्च के चलते उनका परिवार गहरे सदमे में है। अगर इस सर्च से मुझे और मेरे पति डिप्टी कमांडेंट दिलीप पासवान के साथ कोई घटना होती है, तो उनके पीछे बच्चों को कौन संभालेगा।

डिप्टी कमांडेंट की पत्नी ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस सारे प्रकरण के चलते सुरजीत सिंह गुलेरिया आईजी, रणधीर सिंह गिल टूआईसी विजिलेंस, विजय कुमार सिंह कमांडेंट, बैद्यनाथ राउत टूआईसी और डीसी दीपेंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। इन अफसरों ने देर रात को गैर कानूनी तरीके से उनके घर में प्रवेश किया है। उनके पास कोई सर्च वारंट भी नहीं था। उन्होंने हमें बुरे परिणाम भुगतने की धमकी दी। ऐसे में उक्त अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। निवेदिता स्वराज ने 16 फरवरी को यह शिकायत दी थी। सूत्रों का कहना है कि बीएसएफ के पास कोई बेनाम पत्र आया था। उसमें कुछ अफसरों के तस्करी में संलिप्त होने के आरोप लगे थे। हालांकि तीन वर्ष में बॉर्डर से लगते इस इलाके में तस्करी की घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लगा है। 'जी' इकाई के कामकाज को सराहना भी मिली थी।

सूत्रों ने बताया कि डिप्टी कमांडेंट से कहा गया कि उनके खाते में दो वर्ष के दौरान 70 लाख रुपये आए हैं। इसमें करीब 39 लाख रुपये अनअकाउंटेड हैं। इसी आधार पर सर्च की गई। वह रेड उक्त बीएसएफ अधिकारी के दफ्तर, आवास और इंस्पेक्टर 'जी' के यहां पर हुई थी। सर्च के बाद पासवान पर साइन करने का दबाव डाला गया। उन्हें धमकाया गया कि दस्तावेजों पर साइन नहीं करोगे, तो कार्रवाई होगी। 19 फरवरी की रात को बीएसएफ के एक बड़े अधिकारी पासवान के घर आए थे। कई घंटे तक उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला गया। सूत्रों का कहना है कि यह रेड एक बड़े अफसर के मौखिक आदेश पर हुई थी। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। यह मामला दक्षिण दिनाजपुर के एसपी के संज्ञान में भी लाया गया है।

 

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