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BSF: पाकिस्तान के कब्जे में 288 घंटे से बीएसएफ जवान; रिहाई के लिए रोज सीमा पर बज रही सीटी, दिखाया जा रहा झंडा

Mon, 05 May 2025 02:33 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Mon, 05 May 2025 02:33 PM IST
सार

घटना 23 अप्रैल को तब हुई, जब बीएसएफ जवान पीके साहू 182वीं बटालियन, बॉर्डर के गेट संख्या 208/1 पर तैनात थे। वे फसल कटाई के दौरान भारतीय किसानों पर नजर रख रहे थे। बीएसएफ, किसानों की सुरक्षा भी करती है। लिहाजा तेज गर्मी के मौसम में जवान ने जब पेड़ की छांव में खड़े होने का प्रयास किया तो पाकिस्तानी रेंजर्स ने उसे हिरासत में ले लिया।

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BSF jawan in Pakistan custody for 288 hours; whistle being blown flag being shown at border daily for release
BSF - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पंजाब के फिरोजपुर में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर गलती से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश करने वाले बीएसएफ जवान पीके साहू को वहां के रेंजर्स ने अपनी हिरासत में ले रखा है। यह घटना 23 अप्रैल की है। अब 12 दिन यानी 288 घंटे बाद भी पाकिस्तानी रेंजर्स, बीएसएफ जवान की रिहाई को लेकर कुछ नहीं बोल रहे हैं। जवान की सकुशल रिहाई के लिए बीएसएफ द्वारा लगातार प्रयास जारी है। अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर बीएसएफ, रोजाना दो से तीन बार सीटी बजाकर या झंडा दिखाकर पाकिस्तानी रेंजर्स को बातचीत का सिग्नल भेजती है। कई बार फ्लैग मीटिंग भी हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि जवान की रिहाई के लिए सभी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। पाकिस्तानी रेंजर्स के लिए लंबे समय तक बीएसएफ जवान को अपने कब्जे में रखना संभव नहीं होगा। 

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सूत्रों के अनुसार, इस मामले में बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स के बीच फ्लैग मीटिंग भी हुई है। हालांकि उसका कोई खास नतीजा नहीं निकला। उसमें यही बताया गया है कि जैसे ही रेंजर्स के शीर्ष नेतृत्व से हरी झंडी मिलेगी, जवान को छोड़ दिया जाएगा। बीएसएफ अपने जवान की रिहाई के लिए कोई भी कसर बाकी नहीं रख रही है। बॉर्डर पर रोजाना ही बीएसएफ की तरफ से जवान की रिहाई का प्रयास किया जा रहा है। मसलन, बॉर्डर पर सीटी बजाकर पाकिस्तानी रेंजर्स को बुलाने की कोशिश होती है। एक ही दिन में कई बार सीटी बजाने की प्रक्रिया को दोहराया जाता है। 
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इतना ही नहीं, फ्लैग मीटिंग के लिए सीटी बजाने के अलावा झंडा भी दिखाया जाता है। बीएसएफ का मकसद है कि किसी भी तरह से पाकिस्तानी रेंजर्स, बातचीत के लिए सामने आएं। जब एक बार सीटी की आवाज का पाकिस्तान की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता तो कुछ समय बाद दोबारा से जवान वहां पर पहुंचते हैं। सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तानी रेंजर्स, फ्लैग मीटिंग से दूर भाग रहे हैं। रेंजर्स की तरफ से कोई ठोस रिस्पॉंस नहीं मिल रहा। ऐसा लग रहा है कि जानबूझकर पाकिस्तानी रेंजर्स, फ्लैग मीटिंग को तव्वजो नहीं दे रहे। 
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सूत्रों के मुताबिक, बीएसएफ के जवान की रिहाई सुनिश्चित कराने के लिए डिप्लोमेटिक चैनल की भी मदद लेने की बात सामने आई है। बीएसएफ के पूर्व अफसरों का कहना है कि गलती से एक दूसरे देश की सीमा में चले जाना कोई बड़ा अपराध नहीं है। पहले भी दोनों पक्षों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है। कई बार तो कुछ घंटे बाद ही और वो भी एक ही फ्लैग मीटिंग में मामला निपटा लिया जाता रहा है। इस बार पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति जो सख्त रवैया अपनाया है, उसके चलते बीएसएफ जवान की वापसी में देरी हो रही है। हालांकि पाकिस्तान को देर सवेर बीएसएफ जवान को वापस करना होगा। 

यह घटना 23 अप्रैल को तब हुई, जब बीएसएफ जवान पीके साहू 182वीं बटालियन, बॉर्डर के गेट संख्या 208/1 पर तैनात थे। वे फसल कटाई के दौरान भारतीय किसानों पर नजर रख रहे थे। बीएसएफ, किसानों की सुरक्षा भी करती है। लिहाजा तेज गर्मी के मौसम में जवान ने जब पेड़ की छांव में खड़े होने का प्रयास किया तो पाकिस्तानी रेंजर्स ने उसे हिरासत में ले लिया। उनकी सर्विस राइफल भी जब्त कर ली गई। बताया जाता है कि वह कुछ समय पहले ही इस क्षेत्र में तैनात हुआ था। बीएसएफ के पूर्व आईजी बीएन शर्मा बताते हैं, ऐसे मामले कमांडेंट स्तर पर निपट जाते हैं। कई बार तो कुछ घंटों में ही जवान वापस आ जाते हैं। बशर्ते, कोई अपराध की मंशा न हो। हिरासत में जवान से पूछताछ की जाती है। अगर सीओ के लेवल पर बात नहीं बनती है तो उसके बाद डीआईजी स्तर पर बातचीत होती है। इसके बाद आईजी स्तर पर बात की जाती है। 


जब सभी तरह के रास्ते बंद हो जाते हैं तो कूटनीतिक प्रयास किए जाते हैं। पाकिस्तान को बीएसएफ जवान लौटाना ही होगा। वह उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। वजह, उसने जवान को लेकर खुद यह बात स्वीकार की है कि जवान उनकी हिरासत में है। इतना ही नहीं, इसके बाद पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि जवान को पूरी तरह से सुरक्षित रखना। अब वह कोई ऐसी चाल भी नहीं चल सकता है, जिसमें यह कह दिया जाता है कि जवान ने भागने का प्रयास किया, इसलिए उसे नुकसान हुआ है। उसे जवान पर हर पल नजर रखनी होगी। अगर जवान खुद को कोई नुकसान पहुंचाता है तो उसकी जिम्मेदारी भी पाकिस्तान की होगी। दूसरी तरफ बीएसएफ के राजस्थान सेक्टर में एक पाकिस्तानी रेंजर्स को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार करने की बात सामने आ रही है। हालांकि बीएसएफ ने इस मामले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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