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बीएसएफ प्रमुख राकेश अस्थाना ने कहा- सीमा पर हिंसा में होगी कमी
Sun, 20 Sep 2020 02:04 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 20 Sep 2020 02:04 AM IST
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राकेश अस्थाना
- फोटो : PTI
बीएसएफ प्रमुख राकेश अस्थाना ने शनिवार को कहा कि निकट भविष्य में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अपराधियों को मारने की घटनाओं में काफी कमी आएगी। उन्होंने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि उनके सैनिक केवल सीमा पार से आए घुसपैठियों से जान को खतरा होने पर ही आत्मरक्षा में गोली चलाएंगे।
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सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक (डीजी) 50वीं बॉर्डर कोआर्डिनेशन कॉन्फ्रें स में भाग लेने के लिए चार दिवसीय यात्रा पर ढाका गए हैं। उन्होंने यह बात बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के महानिदेशक मेजर जनरल शफीनुल इस्लाम से द्वि-वार्षिक वार्ता के अंत में कही।
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बीएसएफ प्रमुख ने कहा कि सीमा पर नागरिकता पर ध्यान दिए बिना अपराधियों की मौत या गिरफ्तारी होती है। उन्होंने कहा कि बीएसएफ के जवान बड़ी संख्या में घुसपैठियों से जान को खतरा होने के बाद गैर-घातक हथियारों से केवल आत्मरक्षा में गोली चलाते हैं। जबकि घुसपैठिये चाकू, लाठी आदि से लैस होते हैं, जिससे जवानों का जीवन खतरे में पड़ जाता है।
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बीएसएफ के प्रवक्ता ने नई दिल्ली में जारी एक बयान में कहा कि बीएसएफ ने सीमा पर होने वाली मौत की घटनाओं को निकट भविष्य में काफी कम करने का आश्वासन दिया है।
मानवाधिकारों को बनाए रखने और सीमा पर हिंसा को रोकने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता को दोहराते हुए, दोनों पक्ष सीमा पर अतिरिक्त एहतियाती कदम उठाने पर सहमत हुए हैं, जिसमें जन जागरूकता कार्यक्रम तेज करना, उचित सामाजिक-आर्थिक विकास कार्यक्रम और वास्तविक समय की जानकारी साझा करना शामिल है।
प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्ष इस मुद्दे पर सहमत हुए हैं कि ऐसे मामले में पकड़े गए व्यक्ति को मानवीय आधार पर एक पीडि़त समझकर कार्रवाई की जाएगी। बाद में मानसिक तौर पर विकलांग व्यक्ति की नागरिकता की जांच पड़ताल कर उसे एक-दूसरे के मध्य सहयोग की भावना के साथ संबंधित फोर्स को सौंपने की प्रक्रिया शुरू होगी।
बीएसएफ के महानिदेशक ने इस मानवीय मुद्दे को सुलझाने के लिए आपसी परामर्श में एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार किए जा सकने का सुझाव दिया है।