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ब्रू शरणार्थी पुनर्वास मामला: प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में लगाई आग, नेशनल हाईवे किया ब्लॉक
Sat, 21 Nov 2020 02:28 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 21 Nov 2020 02:28 PM IST
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ब्रू शरणार्थियों के पुनर्वास का विरोध करते प्रदर्शनकारी
- फोटो : ANI
त्रिपुरा में ब्रू शरणार्थियों को दोबारा बसाने को लेकर भारी विरोध हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को उनके पुनर्वास का न केवल विरोध किया बल्कि उत्तरी त्रिपुरा जिले के डोलुबरी गांव में वाहनों में तोड़फोड़ की और उनमें आग भी लगा दी। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया है। इसके मद्देनजर मौके पर भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है और आंसू गैस के गोले भी दागे गए।
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#Tripura: Demonstrators protesting against the rehabilitation of Bru refugees from Mizoram vandalise, and set fire to vehicles in Dolubari village of North Tripura district https://t.co/b3VOknpcca pic.twitter.com/TXe6tr2czU
— ANI (@ANI) November 21, 2020विज्ञापन
केंद्र ने इस साल जनवरी में इन शरणार्थियों को स्थायी तौर पर राज्य में बसाने को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और छह सौ करोड़ के पुनर्वास पैकेज का एलान किया था। दरअसल, ब्रू जनजाति का विवाद दशकों पुराना है। इस समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोग पड़ोसी राज्य मिजोरम के रहने वाले हैं। ज्यादातर ब्रू परिवार मामित और कोलासिब जिले में रहते हैं। ब्रू-रियांग और बहुसंख्यक मिजो समुदाय के बीच 1996 में हुआ सांप्रदायिक दंगा इनके पलायन का कारण बना था।
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कौन हैं ब्रू शरणार्थी?
ब्रू आदिवासी समुदाय के करीब 35 हजार सदस्य त्रिपुरा के सात कैंपों में बीते 22 सालों से रह रहे हैं। अब केंद्र सरकार ने मिजोरम के इन आदिवासी शरणार्थियों की लंबे समय से चली आ रही समस्या को समाप्त करके इन्हें स्थायी रूप से त्रिपुरा में बसाने का फैसला किया है।
मिजोरम से त्रिपुरा क्यों आए 'ब्रू'?
- 1996 में ब्रू समुदाय और बहुसंख्यक मिजो समुदाय से स्वायत्त जिला परिषद के मुद्दे पर खूनी संघर्ष हुआ। तब अक्तूबर 1997 में ब्रू जनजाति की करीब आधी आबादी (लगभग पांच हजार परिवारों) ने पलायन कर त्रिपुरा में शरण ले ली थी।
- त्रिपुरा में ये कैंपों में रह रहे हैं। त्रिपुरा लगातार यह कोशिशें करता रहा कि ब्रू वापस मिजोरम लौटें। केंद्र सरकार के साथ मिलकर इस मसले को सुलझाने की कोशिशें की गईं।
- सरकारी मध्यस्थता से कुछ परिवार वापस लौटे भी और उन्हें सरकारी सहायता भी दी गईं। 2012 की पीआईबी की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक पांच हजार विस्थापित ब्रू परिवारों में से 800 को वापस भेजा जा चुका था।