'ताकत के दम पर नहीं चलेंगे संबंध': ब्रिक्स समिट से शी जिनपिंग का दुनिया को संदेश, ग्लोबल साउथ पर क्या कहा?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग ने वैश्विक दक्षिण की बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए ब्रिक्स देशों से एकजुट होकर बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने AI, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी प्रतिभा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए पांच नई पहल भी सामने रखीं।
विस्तार
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक व्यवस्था, ग्लोबल साउथ और ब्रिक्स सहयोग को लेकर कई अहम बातें कहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में दिए अपने संबोधन में शी ने कहा कि दुनिया तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है और वैश्विक दक्षिण के देशों का सामूहिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से इस बदलाव के बीच अधिक सक्रिय भूमिका निभाने और वैश्विक दक्षिण की एकजुटता को मजबूत करने का आह्वान किया।
शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में किसी एक देश के दबदबे के खिलाफ संदेश देते हुए कहा कि दुनिया में नियम सभी देशों की भागीदारी से बनने चाहिए। उन्होंने कहा कि 'ताकतवर ही सही है' की सोच को काफी पहले पीछे छोड़ दिया जाना चाहिए था। चीनी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभु समानता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को जरूरी बताया।
'नियमों के बिना दुनिया में अराजकता तय'
शी ने कहा कि बिना नियमों वाली दुनिया ऐसी होगी जैसे ट्रैफिक सिग्नल के बिना चौराहा, जहां अव्यवस्था और अफरा-तफरी की स्थिति पैदा होना लगभग तय है। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता और न्याय की इच्छा सार्वभौमिक है और अंतरराष्ट्रीय नियम किसी एक देश के हिसाब से नहीं, बल्कि सभी देशों की भागीदारी से तय होने चाहिए।
उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों से अंतरराष्ट्रीय मामलों में कानून के शासन की रक्षा करने की अपील की। उनके मुताबिक, संप्रभु समानता, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांत होने चाहिए। शी ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून सभी देशों पर समान रूप से लागू होना चाहिए और इसमें दोहरे मानदंड की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षवाद पर जोर
चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया के सभी देश, चाहे वे आकार, आर्थिक ताकत या संपत्ति के लिहाज से बड़े हों या छोटे, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समान सदस्य हैं। उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों से बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाने और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करने का आह्वान किया। शी ने बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने की जरूरत भी बताई। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन में सुधार की प्रक्रिया को सही दिशा में आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के स्थापित सिद्धांतों को बनाए रखने की बात कही। उन्होंने नव विकास बैंक के विस्तार और संचालन को समर्थन देने की अपील की। साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए कहा कि विकासशील देशों की भागीदारी और उनकी आवाज को और मजबूत किया जाना चाहिए।
'विकास के केंद्र में लोगों को रखना जरूरी'
शी जिनपिंग ने कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए विकास के केंद्र में आम लोगों को रखना जरूरी है। उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों से जन-केंद्रित विकास की नीति अपनाने और 2030 सतत विकास एजेंडा के लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयास जारी रखने की अपील की।
उन्होंने चीन की ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव का भी उल्लेख किया। शी के मुताबिक, इस पहल के पांच वर्षों में चीन ने दूसरे देशों के साथ मिलकर 2,000 से ज्यादा परियोजनाएं लागू की हैं और दो लाख से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया है। उनका दावा है कि इन प्रयासों से 120 से ज्यादा देशों के लोगों को लाभ मिला है। शी ने कहा कि चीन दुनिया के लिए अपने दरवाजे लगातार खोल रहा है। उन्होंने बताया कि चीन के साथ राजनयिक संबंध रखने वाले सभी 53 अफ्रीकी देशों को शून्य शुल्क की सुविधा दी गई है।
जलवायु परिवर्तन और AI पर भी कही बड़ी बात
चीनी राष्ट्रपति ने वैश्विक सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि देशों को केवल समस्याओं के सामने आने वाले प्रभावों से निपटने के बजाय उनके मूल कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने वैश्विक जलवायु व्यवस्था को मजबूत करने और पेरिस समझौते को पूरी तरह तथा प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में काम करने की बात कही।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर शी ने कहा कि AI का इस्तेमाल मानव कल्याण और सकारात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसी वैश्विक AI व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई, जिस पर व्यापक सहमति हो और जिससे तकनीकी विकास का फायदा साझा समृद्धि के लिए उठाया जा सके।
ब्रिक्स सहयोग मजबूत करने के लिए शी ने रखीं पांच पहल
शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए पांच प्रमुख पहलों का प्रस्ताव रखा। इनमें AI, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी प्रतिभा विकास शामिल हैं।
- AI के क्षेत्र में ओपन सोर्स सहयोग
चीन ने ब्रिक्स देशों के लिए एक ओपन सोर्स AI समुदाय स्थापित करने में अग्रणी भूमिका निभाने की बात कही। इसके तहत बड़े भाषा मॉडल के विकास और इस्तेमाल में सहयोग बढ़ाने, AI पर विशेष चर्चा और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने तथा एक खुला AI पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने का प्रस्ताव है। - व्यापार और निवेश को आसान बनाने की पहल
शी ने ब्रिक्स देशों के बीच विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत सदस्य देशों के बीच नीतिगत तालमेल बढ़ाने और खुले विकास के लिए नई संभावनाएं तलाशने की बात कही गई है। चीन अगले साल सेवा व्यापार पर ब्रिक्स मंच आयोजित करने की योजना भी पेश करेगा। शी ने इसमें अन्य देशों की सक्रिय भागीदारी का स्वागत किया। - डिजिटल उद्योग में सहयोग
चीन ब्रिक्स देशों के लिए साझा डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र और क्लाउड प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में काम करेगा। इसका उद्देश्य डिजिटल कौशल प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और उद्योगों के बीच तालमेल बढ़ाना है। - स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
चीन ने ब्रिक्स देशों को स्मार्ट फैक्ट्रियां विकसित करने में सहयोग देने की पेशकश की। इसके साथ विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े मानक और नियम तैयार करने में भी मदद की जाएगी। इसका लक्ष्य उद्योगों को तकनीकी रूप से आधुनिक और अधिक सक्षम बनाना है। - विज्ञान और तकनीकी प्रतिभा पर जोर
शी ने ब्रिक्स इंजीनियर विकास गठबंधन स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इसके जरिए अलग-अलग सदस्य देशों में इंजीनियरों के विकास और उनकी योग्यता से जुड़े मानकों की पारस्परिक मान्यता को बढ़ावा देने की बात कही गई। इसके अलावा चीन वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में ब्रिक्स युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम शुरू करेगा। इसका उद्देश्य उच्च क्षमता वाले तकनीकी और वैज्ञानिक प्रतिभाशाली युवाओं को तैयार करना है।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का भी जिक्र
शी जिनपिंग ने चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल चीन के आर्थिक और सामाजिक विकास का खाका नहीं है, बल्कि दूसरे देशों के साथ सहयोग के नए अवसर भी पैदा करती है। उन्होंने कहा कि चीन उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाएगा, अपने खुलेपन का विस्तार करेगा और ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव तथा बेल्ट एंड रोड सहयोग को आगे बढ़ाएगा। इसका उद्देश्य चीन के विकास से पैदा होने वाले अवसरों को दूसरे देशों के साथ साझा करना है।