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Hindi News ›   India News ›   BRICS Summit: Putin’s Security Tightened Against ‘High-Energy Weapons’, 24 Cars in Convoy

हाई एनर्जी हथियार से पुतिन की सुरक्षा: ऑरस सीनेट सहित 24 गाड़ियां, कमरों में पावर सप्लाई/इंटरनेट पर डिवाइस

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 11 Sep 2026 05:54 PM IST
सार

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के लिए दिल्ली को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। खासतौर पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा के लिए अलग और बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। जानें पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था क्यों है खास।
 

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BRICS Summit: Putin’s Security Tightened Against ‘High-Energy Weapons’, 24 Cars in Convoy
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हिफाजत को लेकर सिक्योरिटी एजेंसियां सतर्क हैं। खासतौर से इस बार 'हाई एनर्जी हथियार' से 'पुतिन' की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दो वर्ष पहले लेबनान और सीरिया में हिजबुल्लाह के सदस्यों के पास मौजूद हजारों पेजर एक साथ फट गए थे। जिनके पास वॉकी-टॉकी थे, उनमें भी ब्लास्ट हो गया था। उसके बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा रणनीति को 'हाई एनर्जी वेपन' के बचाव के मद्देनजर तैयार किया गया है। 

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पुतिन के काफिले में 24 गाड़ियां
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति पुतिन के होटल के कमरे में ही नहीं, बल्कि उनकी गाड़ी 'ऑरस सीनेट' में 'हाई एनर्जी हथियार' से बचाव के उपाय किए गए हैं। इस बार पुतिन के काफिले में 24 गाड़ियां चल रही हैं। इनमें तीन उनकी ऑफिशियल लिमोसिन कार 'ऑरस सीनेट' हैं, जिन्हें रूस से यहां लाया गया है।
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कमरे के बाहर खास इंतजाम
 पुतिन जिस होटल के कमरे में ठहरे हैं, वहां आसपास के तीन से चार कमरों में पावर सप्लाई पर विशेष डिवाइस लगाया गया है। यानी पावर सप्लाई उस डिवाइस से होकर गुजरेगी। वही डिवाइस 'जेनसेट' में भी लगा है। 
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क्या है हाई एनर्जी हथियार?
इसी तरह से इंटरनेट को भी उसी खास डिवाइस से गुजारा गया है। पुतिन की 'क्लोज प्रोटेक्शन टीम' को 'हाई एनर्जी हथियार' से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। 'हाई एनर्जी हथियार' में उच्च क्षमता वाली लेजर का भी इस्तेमाल होता है। अगर 'क्लोज प्रोटेक्शन टीम' को लेजर का आभास होता है तो वे उसे रोक सकते हैं। अगर लेजर ज्यादा स्पीड और प्रेशर वाली है तो उससे जानमाल का नुकसान संभव है। उस वक्त सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति किसी भवन या बख्तरबंद वाहन में है तो बचाव की गुंजाइश अधिक रहती है। लेजर रोकने के लिए 'क्लोज प्रोटेक्शन टीम' के लिए विशेष ड्रेस तैयार की जाती है। 

मौजूदा समय में हाई एनर्जी हथियारों के अंतर्गत इलेक्ट्रोमेगनेटिक तकनीक भी आ चुकी है। इस तरह की तकनीक में हमला करने के लिए माइक्रोवेव और रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल होता है। अगर निशाना सटीक रहता है तो दुश्मन और सामान्य वाहन, दोनों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। हाई पावर माइक्रोवेव (एचपीएम) और रेडियो फ्रीक्वेंसी से संचालित हथियारों से भी टारगेट नष्ट हो सकता है। 


इनके द्वारा मोबाइल फोन और रेडियो फ्रीक्वेंसी वाले किसी दूसरे उपकरण पर वार किया जाता है। इसमें सामने वाले को अटैक का पता भी नहीं चलता, लेकिन इंटरनेट या रेडियो फ्रीक्वेंसी की मदद से संचालित उपकरण नष्ट हो जाते हैं। इसका छिपा अटैक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को खत्म कर देता है। कंप्यूटर, कार में लगे उपकरण और मोबाइल फोन जाम हो सकते हैं। अगर ये उपकरण किसी ड्रोन, मिसाइल या रेडियो फ्रीक्वेंसी आधारित कोई ब्लास्ट तकनीक, उसे भी नष्ट कर सकता है। 

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