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BRICS: ब्रिक्स सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की जाएगी, आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई की अपील जाएगी

Mon, 30 Jun 2025 09:53 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 30 Jun 2025 09:53 PM IST
सार

BRICS Summit 2025: ब्रिक्स समूह में अब कुल 11 देश हैं — ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा 2024 में शामिल हुए मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात। वहीं 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह में शामिल होगा।

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BRICS summit expected to denounce Pahalgam terror attack; call for fight against terrorism
ब्रिक्स समिट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

ब्रिक्स देशों का वार्षिक शिखर सम्मेलन इस बार ब्राजील के रियो डी जनेरियो में 6 और 7 जुलाई को आयोजित होगा। इस सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की जाएगी और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। वह 2 से 9 जुलाई के बीच पांच देशों के दौरे पर रहेंगे, जिनमें ब्राजील के अलावा घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना और नामीबिया शामिल हैं।
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विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंधों के सचिव दम्मू रवि ने बताया कि प्रधानमंत्री की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भागीदारी भारत की इस समूह के प्रति एकजुटता का संकेत है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में जो साझा घोषणा पत्र आएगा, उसमें आतंकवाद के मुद्दे को भारत की अपेक्षाओं के अनुसार बहुत गंभीरता से लिया गया है। दम्मू रवि ने कहा, 'सभी सदस्य देशों ने पहलगाम हमले को लेकर भारत के प्रति सहानुभूति और समर्थन व्यक्त किया है। साझा घोषणा पत्र में इसे स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। आतंकवाद के खिलाफ किसी को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए, यह भावना सभी देशों में है।'
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उन्होंने आगे बताया कि इस सम्मेलन में चार अहम निर्णय लिए जाने की उम्मीद है:
1. वैश्विक शासन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर चर्चा
2. जलवायु वित्त पर एक साझा फ्रेमवर्क
3. सामाजिक रूप से निर्धारित बीमारियों को समाप्त करने के लिए साझेदारी
4. व्यापारिक लेन-देन में राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देना।

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दम्मू रवि ने कहा कि यह 'डॉलर पर निर्भरता कम करने' की दिशा में नहीं है, बल्कि देशों द्वारा अपने-अपने राष्ट्रीय मुद्रा में व्यापार करने के विकल्पों की तलाश है। इस बार के ब्रिक्स सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हिस्सा नहीं लेंगे, लेकिन भारत इसे ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज को आगे बढ़ाने के एक बड़े मंच के रूप में देख रहा है।
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