{"_id":"6aa53dbdb0ed384a100a8ffa","slug":"brics-membership-rules-pakistan-entry-block-turkiye-india-veto-power-explainer-2026-09-12","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एक्सप्लेनर: चीन के होते ब्रिक्स में पाकिस्तान का आवेदन क्यों मंजूर नहीं; कैसे मिलती है जगह, भारत की ताकत क्या?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
एक्सप्लेनर: चीन के होते ब्रिक्स में पाकिस्तान का आवेदन क्यों मंजूर नहीं; कैसे मिलती है जगह, भारत की ताकत क्या?
Sat, 12 Sep 2026 05:25 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 12 Sep 2026 05:25 PM IST
सार
BRICS Membership Rules: चीन के समर्थन के बाद भी पाकिस्तान ब्रिक्स में क्यों नहीं हो सका शामिल? जानिए ब्रिक्स की सदस्यता प्रक्रिया, सर्वसम्मति का नियम और भारत की कूटनीतिक ताकत।
विज्ञापन
ब्रिक्स में सदस्यता का तरीका।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत की मेजबानी में 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दिल्ली में चल रहा है। रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ईरान समेत समूह में शामिल सभी अहम देशों के नेता इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। ब्रिक्स को हमेशा से विकासशील देशों का गठबंधन माना जाता रहा है। यही वजह है कि ब्रिक्स की मूल बैठक के बाद इसके स्थायी सदस्यों की साझेदार देशों के साथ भी मुलाकात होगी। हालांकि, ब्रिक्स में अब तक पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे विकासशील देशों की एंट्री नहीं हो पाई है। खासकर पाकिस्तान को तो ब्रिक्स में आवेदन के बावजूद आज तक जगह नहीं मिली है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ब्रिक्स में अभी कितने सदस्य हैं? कितने देशों ने इसके लिए आवेदन किया है और आगे ब्रिक्स और कितना बड़ा हो सकता है? पाकिस्तान की तरफ से आवेदन किए जाने के बाद भी उसे अब तक इस गठबंधन में एंट्री क्यों नहीं मिली है? भारत के पास वह कौन सी ताकत है, जिसकी वजह से पाकिस्तान का सबसे बड़ा समर्थक चीन तक ब्रिक्स में उसकी पैरवी नहीं करता? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ब्रिक्स में अभी कितने सदस्य हैं? कितने देशों ने इसके लिए आवेदन किया है और आगे ब्रिक्स और कितना बड़ा हो सकता है? पाकिस्तान की तरफ से आवेदन किए जाने के बाद भी उसे अब तक इस गठबंधन में एंट्री क्यों नहीं मिली है? भारत के पास वह कौन सी ताकत है, जिसकी वजह से पाकिस्तान का सबसे बड़ा समर्थक चीन तक ब्रिक्स में उसकी पैरवी नहीं करता? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
पहले जानें- ब्रिक्स में मौजूदा समय में कितने सदस्य?
ब्रिक्स के संस्थापक देश।
- फोटो : अमर उजाला
अब जानें- अब तक कितने देश कर चुके ब्रिक्स के लिए आवेदन?
ब्रिक्स की पूर्ण सदस्यता के लिए अब तक 30 से ज्यादा देशों ने औपचारिक रूप से आवेदन किया है या इसमें शामिल होने की इच्छा जताई है। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया हालिया समय में इस गठबंध से जुड़ने वाले कुछ सदस्य हैं। वहीं, तुर्किये, अजरबैजान और पाकिस्तान जैसे कई देश ब्रिक्स के लिए आवेदन कर चुके हैं और सदस्यता पाने की कतार में हैं।ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: 21 देशों वाला ब्रिक्स कितना ताकतवर, भारत के लिए कितना बड़ा कारोबारी बाजार?
ब्रिक्स का इतिहास।
- फोटो : अमर उजाला
क्या है ब्रिक्स में आवेदन का तरीका, कैसे जुड़ते हैं देश?
ब्रिक्स में नए देशों के शामिल होने की प्रक्रिया पूरी तरह से सर्वसम्मति और पहले से निर्धारित मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है।1. सर्वसम्मति का नियम
ब्रिक्स का कोई भी फैसला बहुमत के बजाय सभी मौजूदा सदस्यों की सर्वसम्मति से लिया जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई भी एक मौजूदा सदस्य देश किसी नए देश के आवेदन पर असहमति जताता है, तो वह देश संगठन में शामिल नहीं हो सकता।
2. औपचारिक आवेदन और परामर्श जरूरी
ब्रिक्स में शामिल होने के इच्छुक देश को ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहे देश और संगठन के सामने औपचारिक रूप से सदस्यता का आवेदन जमा करना होता है। इसके बाद ब्रिक्स विदेश मंत्रियों और नेताओं के शिखर सम्मेलनों में इस आवेदन पर चर्चा की जाती है।
3. मार्गदर्शक सिद्धांत और नियम
2023 के जोहानेसबर्ग शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स नेताओं ने सदस्यता विस्तार के लिए औपचारिक मार्गदर्शक सिद्धांत, मानक और मानदंड स्वीकार किए थे। इसके तहत ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले देशों का...
4. औपचारिक आमंत्रण
जब सभी मौजूदा सदस्य देश सर्वसम्मति से किसी आवेदन को मंजूरी दे देते हैं, तो शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स नेताओं की ओर से उस देश को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने का आधिकारिक आमंत्रण दिया जाता है।
5. साझेदार देशों का अलग वर्ग भी
2024 के कजान शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स ने साझेदार देश (पार्टनर कंट्री) की एक नई श्रेणी शुरू की। इसके माध्यम से पूर्ण सदस्यता न पाने वाले देश भी ब्रिक्स की पहलों, सम्मेलनों और व्यापारिक व्यवस्थाओं से जुड़ सकते हैं।
2023 के जोहानेसबर्ग शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स नेताओं ने सदस्यता विस्तार के लिए औपचारिक मार्गदर्शक सिद्धांत, मानक और मानदंड स्वीकार किए थे। इसके तहत ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले देशों का...
- सभी मौजूदा ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ सकारात्मक कूटनीतिक संबंध होना अनिवार्य है।
- बहुपक्षवाद (मल्टीलेटरलिज्म) और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की प्रतिबद्धता दिखाना जरूरी है।
- वैश्विक दक्षिण के विकास और बहुध्रुवीय व्यवस्था के सिद्धांतों का समर्थन करना भी जरूरी है।
4. औपचारिक आमंत्रण
जब सभी मौजूदा सदस्य देश सर्वसम्मति से किसी आवेदन को मंजूरी दे देते हैं, तो शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स नेताओं की ओर से उस देश को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने का आधिकारिक आमंत्रण दिया जाता है।
5. साझेदार देशों का अलग वर्ग भी
2024 के कजान शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स ने साझेदार देश (पार्टनर कंट्री) की एक नई श्रेणी शुरू की। इसके माध्यम से पूर्ण सदस्यता न पाने वाले देश भी ब्रिक्स की पहलों, सम्मेलनों और व्यापारिक व्यवस्थाओं से जुड़ सकते हैं।
ब्रिक्स में सदस्यता के चरण।
- फोटो : अमर उजाला
ब्रिक्स में पाकिस्तान-तुर्किये की एंट्री क्यों नहीं?
पाकिस्तान की तरफ से ब्रिक्स में शामिल होने के लिए साल 2023 में औपचारिक रूप से आवेदन किया गया था। इसके बावजूद उसे अब तक ब्रिक्स की सदस्यता नहीं मिल सकी है। ब्रिक्स में किसी भी देश के शामिल करने की सबसे बड़ी ताकत संस्थापकों को ही दी गई है, जिसमें भारत भी शामिल है। इसे वीटो शक्ति कहा जाता है, जिसके तहत संस्थापक किसी भी देश की एंट्री पर रोक लगा सकते हैं।- ब्रिक्स में नए सदस्यों के आने के लिए सभी संस्थापक और स्थायी सदस्यों की सहमति जरूरी है। तुर्किये-पाकिस्तान की स्थायी सदस्यता के आवेदन पर विचार न होने की एक यह बड़ी वजह है।
- ब्रिक्स का नियम, जिसमें आवेदन करने वाले देश का सभी सदस्यों से अच्छा कूटनीतिक रिश्ता होना जरूरी है, पाकिस्तान के लिए मुश्किल पैदा करता है। कूटनीतिक स्तर पर आतंकवाद की वजह से वह दुनियाभर में घिर चुका है।
- पाकिस्तान को सार्वजनिक तौर पर चीन का समर्थन हासिल है। बीते वर्षों में उसने रूस के साथ भी रिश्ते बढ़ाने की कोशिश की है। हालांकि, भारत के ब्रिक्स में सभी देशों के साथ गहरे रिश्ते हैं, जो पाकिस्तान पर भारी पड़ते हैं।
तो भारत से कूटनीतिक तालमेल न रखने वालों की ब्रिक्स में एंट्री नहीं?
ब्रिक्स में आवेदन के बावजूद जिन देशों की सदस्यता को मंजूरी नहीं मिल पाई, उन्हें ब्रिक्स से जोड़ने के लिए कजान में हुए सम्मेलन में 'ब्रिक्स पार्टनर कंट्री' यानी साझेदार देशों के तौर पर शामिल करने का नया आयाम जोड़ा गया था। पाकिस्तान और तुर्किये को इसी के चलते ब्रिक्स के साझेदार देश बनने का प्रस्ताव भी दिया गया। हालांकि दोनों ही देशों की तरफ से इस पर अब तक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके अलावा अजरबैजान ने भी ब्रिक्स की पूर्ण सदस्यता के लिए आवेदन किया है। लेकिन न तो उसकी सदस्यता और न ही उसे साझेदार देश के तौर पर जुड़ने का प्रस्ताव भेजा गया है।
ब्रिक्स के भारत में आयोजन का इतिहास।
- फोटो : अमर उजाला/AI
पाकिस्तान ब्रिक्स से जुड़ने में दिलचस्पी क्यों ले रहा?
1. ब्रिक्स से पाकिस्तान को मिल सकते हैं आर्थिक लाभ
- पाकिस्तान काफी लंबे समय से गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ब्रिक्स से जुड़कर वह अपने आर्थिक और वित्तीय विकल्पों को बढ़ाना और विविध करने की कोशिश में जुटा है।
- पाकिस्तान पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक पर अपनी निर्भरता को कम करने की भी कोशिश कर रहा है और उसके बजाय ब्रिक्स जैसे संगठनों की वित्त व्यवस्था तक पहुंच हासिल करने की उम्मीद कर रहा है।
2. ब्रिक्स विकासशील देशों से संपर्क साधने का जरिया
- ब्रिक्स देश मौजूदा समय में दुनिया की 40% से ज्यादा आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक जीडीपी में लगभग 40% की हिस्सेदारी रखते हैं। यानी पाकिस्तान इससे जुड़कर 20 देशों से सीधा संपर्क रखने के साथ वैश्विक वित्त धारा में भी शामिल होने की राह देख रहा है।
- इसके अलावा, ब्रिक्स देशों के पास वैश्विक तेल और खाद्य उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा है। इस समूह का हिस्सा बनने से पाकिस्तान को सदस्य देशों के साथ व्यापार, निवेश और नए भुगतान तंत्रों का फायदा मिल सकता है।
3. ब्रिक्स से जुड़कर ग्लोबल साउथ में मंच की तलाश
ब्रिक्स को वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख और उभरते हुए बहुपक्षीय विकल्प के रूप में देखा जाता है। ऐसे में ब्रिक्स की सदस्यता मिलने से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक चर्चाओं, समावेशी बहुपक्षवाद और कूटनीतिक वार्ताओं में एक मजबूत वैश्विक मंच मिल सकता है।
ब्रिक्स को वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख और उभरते हुए बहुपक्षीय विकल्प के रूप में देखा जाता है। ऐसे में ब्रिक्स की सदस्यता मिलने से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक चर्चाओं, समावेशी बहुपक्षवाद और कूटनीतिक वार्ताओं में एक मजबूत वैश्विक मंच मिल सकता है।