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मुजफ्फरपुर बालिका गृह केस का आरोपी बोला- कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की कर रहा था तैयारी

Wed, 08 Aug 2018 01:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Updated Wed, 08 Aug 2018 01:18 PM IST
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Brajesh Thakur says I was thinking of joining Congress and and contest elections from Muzaffarpur
Brajesh Thakur
बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक बालिका गृह यौन शोषण मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने आज बड़ा खुलासा किया है। उसने कहा कि हां मैं कुछ समय पहले तक कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करना चाहता था। यही नहीं मैं मुजफ्फरपुर से चुनाव भी लड़ना चाहता था और सबकुछ लगभग फाइनल हो गया था। आज मेरे ऊपर बच्चियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जा रहा है लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि किसी भी बच्ची और लड़की ने मेरा नाम नहीं लिया है। आप इसकी जांच कर सकते हैं। 
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ब्रजेश ने जेल की वैन में बैठकर कहा कि उसका मधु से कोई रिश्ता नहीं रहा है। उसने कहा कि यह कुछ समाचार पत्रों द्वारा फैलाई गई अफवाह है ये वही समाचार पत्र वाले हैं जो मेरा अखबार बंद कराना चाहते हैं। उन अखबार वालों का बिजनेस मेरे अखबार की वजह से कम हो रहा था।
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बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक बालिका गृह यौन शोषण मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में प्रकाशित होने वाले तीन अखबारों का मालिक हैं। उस पर इन अखबारों की कुछ प्रतियां छपवाकर उस पर बड़ा-बड़ा सरकारी विज्ञापन पाने में कामयाब होने के आरोप हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ब्रजेश तीन अखबारों मुजफ्फरपुर से प्रकाशित एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र प्रात: कमल, पटना से प्रकाशित एक अंग्रेजी अखबार न्यूज नेक्स्ट और समस्तीपुर जिला से उर्दू में प्रकाशित एक अखबार हालात-ए-बिहार से प्रत्यक्ष या परोक्ष से जुड़ा हुआ है।

ब्रजेश के पिता राधामोहन ठाकुर ने 1982 में मुजफ्फरपुर से एक हिंदी अखबार शुरू किया था। इस अखबार का नाम था प्रात: कमल। राधामोहन ठाकुर की पत्रकारों के बीच अच्छी पहुंच थी। बिहार में छोटे अखबारों को शुरू करने वाले शुरुआती नामों में से एक नाम राधामोहन ठाकुर का भी था। धीरे-धीरे राधामोहन ठाकुर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर अपने अखबार के लिए सरकारी विज्ञापन लेने शुरू कर दिए।


इन विज्ञापनों से राधामोहन ठाकुर ने खूब पैसे बनाए और फिर उसे रियल स्टेट में लगा दिया। वो रियल स्टेट का शुरुआती दौर था, तो राधामोहन ठाकुर ने इससे भी खूब पैसे बनाए। जब पिता की मौत हो गई, तो विरासत संभालने का जिम्मा आया ब्रजेश ठाकुर पर। पैसे पहले से ही थे और पिता का रसूख भी था। इसलिए ब्रजेश के हाथ में कमान आते ही उसने रियल स्टेट के कारोबार से एक कदम आगे बढ़कर राजनीति में हाथ आजमाना शुरू कर दिया।
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