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कनाडा, यूरोप में चल रहे खालिस्तानी आंदोलन के पीछे है इस पाकिस्तानी कर्नल का हाथ

Tue, 07 Aug 2018 08:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Aug 2018 08:22 AM IST
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brain of an Pakistani colonel is behind the pro-Khalistan initiatives in Canada and Europe
Shahid Mehmood Malhi

लेफ्टिनेंट कर्नल महमूद माल्ही जिसे कि पाकिस्तानी सेना में चौधरी साहिब के तौर पर भी जाना जाता है, उसका दिमाग कनाडा और कुछ यूरोपीय देशों में चलने वाले आंदोलन रेफरेंडम 2020 के पीछे है। इस आंदोलन के जरिए यह समूह खालिस्तान की मांग कर रहा है। यह जानकारी भारतीय खुफिया एजेंसी ने दी है। भारतीय जासूसों ने दावा किया है कि उन्होंने माल्ही के कंप्यूटर से वह दस्तावेज निकाल लिए हैं जिसमें रेफरेंडम 2020 को लेकर विस्तृत रोडमैप मौजूद है।

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इस रेफरेंडम के पीछे मौजूद अमेरिका बेस्ड सिख फॉर जस्टिस समूह ने लगातार इस बात को बनाए रखा है उनकी पहल के पीछे कोई भयावह अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र नहीं है। वह केवल अतंर्राष्ट्रीय सम्मेलन के जरिए अपना अधिकार मांग रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि चौधरी साहिब आईएसआई के लाहौर की सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे हैं। यह टुकड़ी 2015 से पंजाब-विशिष्ट गतिविधियों को प्रायोजित करती रही है। उसने पिछले दो सालों से पंजाब के अंदर मारे गए राइट विंग के हिंदू नेताओं की मौत के पीछे अहम भूमिका निभाई है।
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उच्च सूत्रों ने इस बात से इंकार नहीं किया है कि लाहौर सैन्य टुकड़ी का गुरदासपुर के दीनानगर शहर में जुलाई 2015 को हुए आतंकी हमले में और 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए फिदायीन हमले में कोई हाथ नहीं था। लाहौर के वापडा शहर के निवासी 45 साल के शाहिद महमूद माल्ही, उसकी तैनाती बलोच रेजीमेंट की 25वीं बटालियन में 12 अक्टूबर 1995 में हुई थी। उसे 10 अगस्त 2012 को प्रमोशन देकर लेफ्टिनेंट कर्नल बना दिया गया।
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खुफिया एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार वह पहले कोसोवा में मई 2005 से मई 2005 के बीच कोसोवा में यूएन मिशन का हिस्सा रहा है। उसका भाई लेफ्टिनेंट खालिद महमूद माल्ही इस समय पाकिस्तान की सिंध रेजीमेंट में है। माल्ही के अपने वरिष्ठ अधिकारी को भेजे गए एक दस्तावेज के अनुसार उसने 6 जून 2020 को रेफरेंडम लॉन्च करने की बात कही है। 2020 को ऑपरेशन ब्लूस्टार की 36वीं बरसी होगी। इस रेफरेंडम का नेतृत्व अमेरिका बेस्ड संगठन कर रहा है।

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