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BR Ambedkar: छोटे राज्यों के निर्माण के पैरोकार थे आंबेडकर; बिहार, यूपी और एमपी को बांटने का रखा था प्रस्ताव

Mon, 14 Apr 2025 11:53 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Mon, 14 Apr 2025 11:53 AM IST
सार

आज डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती है। वर्ष 1955 में लिखी गई पुस्तक थॉट्स ऑन लिंगविस्टिक स्टेट्स में डॉ. आंबेडकर ने बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े प्रांतों को बांटने की जोरदार वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि मौजूदा प्रांत बहुत बड़े हैं और प्रशासन योग्य नहीं हैं।

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BR Ambedkar was an advocate of the creation of small states; There was a proposal to divide Bihar, UP and MP
Ambedkar Jayanti - फोटो : Adobe stock

विस्तार

देश में आज भी छोटे राज्यों के निर्माण का मुद्दा उठता है। उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटने की कई बार मांग उठी है। लेकिन इसकी सोच संविधान के मुख्य निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने ही रखी थी। उन्होंने हमेशा छोटे राज्यों के निर्माण की पैरवी की। उनका मानना था कि बड़े राज्य शासन और लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए गंभीर चुनौतियां पेश करते हैं। जबकि छोटे राज्य अधिक प्रबंधनीय होते हैं और समान विकास सुनिश्चित कर सकते हैं।

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आज डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती है। ऐसे में उनकी किताब भाषाई राज्यों पर विचार (Thoughts on Linguistic States) के बारे में जिक्र करना लाजिमी है। वर्ष 1955 में लिखी गई पुस्तक में डॉ. आंबेडकर ने बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े प्रांतों को बांटने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रांत बहुत बड़े हैं और प्रशासन योग्य नहीं हैं। आंबेडकर भाषाई आधार पर राज्यों के निर्माण के समर्थक थे, लेकिन अत्यधिक बड़ी इकाइयों के गठन को लेकर वे बहुत चिंतित थे। 
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उन्होंने किताब में लिखा था कि बड़े भाषाई राज्यों का विचार बिल्कुल भी लोकतांत्रिक नहीं है। यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों से अलग है। यह लोकतंत्र के विचार से पूरी तरह से असंगत है। उन्होंने सुझाव दिया था कि राज्यों को न केवल प्रशासनिक दक्षता के लिए बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी बांटा जाना चाहिए कि कोई भी क्षेत्र या समूह हाशिए पर महसूस न करे। आंबेडकर ने सुझाव दिया कि बिहार को दो राज्यों में बांटा जाना चाहिए। इसी तरह मध्य प्रदेश को उत्तरी और दक्षिणी मध्य प्रदेश में विभाजित किया जाना चाहिए।

डाॅ. आंबेडकर ने किताब में उत्तर प्रदेश को भी तीन राज्यों में विभाजित करने का भी प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा था कि इन तीनों राज्यों की आबादी लगभग दो करोड़ होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया था कि इन प्रस्तावित राज्यों की राजधानियां मेरठ, कानपुर और इलाहाबाद (अब प्रयागराज) हो सकती हैं। आंबेडकर ने तर्क दिया कि छोटे राज्य नागरिकों को सार्वजनिक व्यय और शासन पर अधिक नियंत्रण रखने की अनुमति देंगे। राज्य जितना बड़ा होगा खर्च की मांग उतनी ही अधिक होगी और लोगों का उस पर नियंत्रण उतना ही कम होगा। छोटे राज्य में जिम्मेदारी और जवाबदेही का लाभ होता है।


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उन्होंने राज्यों के पुनर्गठन को लेकर भावनात्मक तर्कों के प्रति आगाह किया और कहा कि भाषा के प्रति प्रेम एक सकारात्मक विघटनकारी शक्ति बन रहा है। राज्य की सीमाओं को राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक व्यावहारिकता को ध्यान में रखते हुए बनाया जाना चाहिए। हालांकि इन प्रस्तावों पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, लेकिन दशकों बाद वे प्रासंगिक हो गए। 

झारखंड और छत्तीसगढ़ का हुआ गठन
डॉ. आंबेडकर के प्रस्तावों पर गौर करते हुए साल 2000 में बिहार से झारखंड और मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ का गठन किया गया था। वहीं साल 2011 में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने बेहतर प्रशासन के लिए राज्य को चार भागों - पूर्वांचल (पूर्वी उत्तर प्रदेश), पश्चिम प्रदेश (पश्चिमी उत्तर प्रदेश), बुंदेलखंड और अवध (मध्य उत्तर प्रदेश) में बांटने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि केंद्र की यूपीए सरकार ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। राजनीतिक वैज्ञानिकों का कहना है कि आंबेडकर के विचार संघवाद और विकेंद्रीकरण पर समकालीन बहसों में गूंजते रहते हैं।

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